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खतियान के लिए जिला कार्यालय गेट के बाहर गुजारनी पड़ रही रात

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खतियान के लिए जिला कार्यालय गेट के बाहर गुजारनी पड़ रही रात

भभुआ शहर. बिहार सरकार ने जमीन का सर्वे करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है, लेकिन अधिकारियों व कर्मचारियों की सीथिलता के कारण यह प्रक्रिया आम लोगों के लिए परेशानी का सबब बनती जा रही है. हालात यह है कि सुदूर गांव से लोग हर रोज सर्वे व लेखागार कार्यालय का चक्कर लगाते नजर आ रहे. जिला मुख्यालय अभिलेखागार कार्यालय में रोज सैकड़ों की संख्या में खतियान लेने के लिए किसानों की भीड़ देखी जा रही है. जिला मुख्यालय अभिलेखागार कार्यालय से रोज सिर्फ 50 ही खतियान बांटे जा रहे हैं, जबकि खतियान लेने वाले किसानों की संख्या रोज सैकड़ों रह रही है. ऑनलाइन सिस्टम कमजोर होने की वजह से भी कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. किसानों को हो रही परेशानी किसानों ने बताया कि सर्वे करना सरकार की अच्छी पहल है. लेकिन, इसके लिए सरकार को पहले तैयारी करनी चाहिए थी. बगैर किसी तैयारी के सर्वे करने की घोषणा कर दी गयी और सर्वे का कार्य जैसे ही प्रारंभ हुआ, किसानों को कागजात इकट्ठा करने में भी काफी परेशानी हो रही है. वहीं, उपस्थित किसान राम अवतार ने बताया कि मैं रामगढ़ से आया हूं और तीन दिन से ठेले का लिट्टी चोखा खाकर जिला कार्यालय गेट पर सो रहा हूं, लेकिन आज तीन दिन हो गये फिर भी मेरा खतियान नहीं मिल पाया. यहां बेवजह काम किया जा रहा है, जो रात-रात भर यहां नंबर लगाया है उसका लिस्ट में नंबर पीछे आ रहा है, जो सुबह आया है उसका पहले आ रहा है. इससे हम सभी किसान असंतुष्ट हैं. वहीं, विकलांग किसान प्रताप कुमार भारती ने बताया कि मैं दुर्गावती से आया हूं यहां विकलांगों के लिए कोई अलग से व्यवस्था नहीं है. इसी भीड़ में लोग धक्का मुक्की कर रहे हैं, जिससे हमें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. किसानों में जयप्रकाश अनिल ठाकुर, शिव मूरत, मोती सिंह, कामेश्वर पासवान इत्यादि ने बताया कि यहां बहुत भीड़ है. खतियान लेने में बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. खतियान लेने के लिए महिला किसान भी एक भीड़ की हिस्सा थी. क्या कहते हैं प्रधान लिपिक जिला अभिलेखागार कार्यालय के प्रधान लिपिक दिनेश कुमार ने बताया कि यहां खतियान के लिए सैकड़ों किसानों की भीड़ इकट्ठा हो रही है. कोशिश की जा रही है अधिक से अधिक खतियान का वितरण किया जाये, लेकिन 50 खतियान से ज्यादा वितरण नहीं हो पा रहा है. इसे रोज भीड़ बढ़ते ही जा रही है. उसी में कुछ मौजा का खतियान कटे-फटे होने की वजह से सो नहीं हो रहा है, वैसे किसानों को चकबंदी कार्यालय में भेजा जा रहा है.

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