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Home बिहार कैमूर हर माह 21 लाख रुपये खर्च, पर सफाई का काम नदारद

हर माह 21 लाख रुपये खर्च, पर सफाई का काम नदारद

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हर माह 21 लाख रुपये खर्च, पर सफाई का काम नदारद

एक वार्ड पर खर्च किये जाते हैं एक लाख से अधिक रुपये

नगर पंचायत में सफाई की जिम्मेदारी दो एनजीओ को दी गयी है

फोटो 1-वार्ड 11 में थाने के समीप मुहल्ले में लगा कूड़े का ढेर.

2-डड़वा में लगा कूड़ा का अंबार. प्रतिनिधि, मोहनिया शहर

मोहनिया नगर पंचायत में सफाई के नाम पर लूट की छूट है. यहां मनमाने तरीके से सरकारी राशि लूटी जा रही है. सबसे हैरान करने वाली बात है कि इसी शहर की सफाई के लिए 2016 में कभी लगभग 4 लाख रुपये में एनजीओ से सफाई करायी जाती थी, लेकिन इसी नगर पंचायत द्वारा नौ साल बाद ही इस राशि को पांच गुने से अधिक तक बढ़ा कर अब 21 लाख रुपये एक महीना एनजीओ को भुगतान कर सफाई करायी जाती है. इससे साफ जाहिर हो रहा हैं कि नगर पंचायत में लूट की छूट मची है. नगर पंचायत में के वार्डों की सफाई की बात करें, तो कुल 16 वार्डों के लिए लाखों रुपये महीना खर्च होता है, लेकिन सफाई के नाम पर मुख्य सड़कों की सफाई कर खाना पूर्ति किया जाता है. नियम के अनुसार सुबह 6 बजे से 9 बजे तक वार्डों सहित मुख्य सड़क पर झाड़ू एवं कूड़ा उठाव करना है. साथ ही शाम में दो बजे से शाम पांच बजे तक सफाई करने का प्रावधान है, लेकिन कई वार्डों की गलियों में तो दिन में एक बार भी सफाई नहीं होती है. सबसे हैरानी की बात यह है कि यही शहर की सफाई के लिए पहले इसी एनजीओ को 2016 में करीब 4 लाख में टेंडर दिया गया था, जिसमें शहर की सफाई एवं कूड़ा उठाव शामिल था, जिसे फिलहाल अब 9 साल बाद इसे 5 गुना से अधिक बढ़ा कर 21 लाख रुपये सफाई के लिए एक महीने का दिया जा रहा है, जिससे एनजीओ का पैसा तो बढ़ गया, लेकिन सफाई की व्यवस्था नहीं बढ़ी. वहीं, शहर की सफाई किस कदर हो रही है यह जग जाहिर हैं.

घरों से कूड़ा उठाव की योजना भी अधर में

नगर पंचायत द्वारा कूड़ा उठाव के लिए दो वाहनों की खरीदारी की गयी थी. इसमें एक खाने में गीला कूड़ा, तो दूसरे खाने में सूखे कूड़े का उठाव करना था. साथ ही प्रत्येक घर में 2 बाल्टी वितरण करने की योजना थी. लेकिन, लापरवाही से अब तक आधा-अधूरा ही बाल्टी का वितरण किया गया, जबकि नये नियम के अनुसार, कूड़ा उठाव भी हवा हवाई साबित हो रहा है. नगर पंचायत द्वारा खरीदे गये लाखों रुपये की लागत से कूड़ा उठाव वाले वाहन नगर पंचायत कार्यालय में खड़े होकर शोभा बड़ा रहे हैं.

2016 में चार लाख रुपये में होती थी सफाई

नगर पंचायत को जिस एनजीओ की सफाई का जिम्मा 2016 में दिया गया, उस समय महज सभी वार्डों के लिए चार लाख प्रति माह भुगतान होता था, लेकिन उसके बाद सत्ता बदली, तो उसे बढ़ा कर 13 लाख प्रति माह एक महीने के लिए किया गया. फिर 14 लाख और अब एक मई 2022 से इसे बढ़ा कर 17 लाख 77 हजार 777 रुपये प्रति माह किया गया, जहां अब प्रति माह सफाई के नाम पर 21 लाख रुपये का भुगतान किया जा रहा है, लेकिन सफाई की व्यवस्था नहीं बदली जो आज भी पहले की तरह चल रही है.

सड़कों के किनारे लगा रहता है कूड़े का अंबार, नही दिख रहे डस्टबिन

नगर पंचायत द्वारा सफाई के लिये विभाग से न करा कर एनजीओ को दिया गया है, लेकिन शहर की सफाई किस तरह हो रही है यह जगजाहिर है. जिसमे शहर में दो टाइम सफाई की बात भी कही गयी है, लेकिन केवल कागजों पर ही दो टाइम सफाई होती है. शहर के वार्ड 11 में थाने की बगल के मुहल्ले की पड़ताल की गयी, तो पता चला कि सफाई कर्मी कभी-कभी ही आते हैं. इससे लोग अपने से घरों की सफाई कर कूड़े को बगल में ही फेंकते हैं. इससे वार्डों व मुहल्ले में जगह-जगह कूड़े का ढेर लगा था. इसके साथ ही डड़वा में भी कूड़े का अंबार देखने को मिला. गौरतलब है कि कि नगर पंचायत को लोगो द्वारा कूड़ा उठाव से लेकर अन्य सुविधाओं को लेकर टैक्स दिया जाता है, लेकिन सुविधा के नाम पर लोगों को कुछ भी नसीब नहीं हो रहा है. शहर के सड़को के किनारे कूड़ा का अंबार लगा रहता हैं जहां अब सड़कों के किनारे डस्टबिन भी गायब हो गये हैं, एक्का दुक्का लगे हैं तो वह जर्जर होकर सिर्फ नाम के लिये रह गये हैं, जिसके कारण लोग सड़क के किनारे ही कूड़ा रख देते हैं.

सफाई को लेकर डीएम से की गयी शिकायत

मोहनिया शहर के साफ-सफाई की व्यवस्था को लेकर जिला 20 सूत्री सदस्य जगदानंद कुशवाहा ने जिलाधिकारी को आवेदन देकर शिकायत की है. इसमें बताया गया है कि शहर के वार्डों में कूड़े का अंबार लगा है, जिससे शहरवासी परेशान हैं. समस्या को लेकर नगर के अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे है.

दो एनजीओ से करायी जाती है शहर की सफाई

मोहनिया नगर पंचायत के सभी वार्डों में दो एनजीओ से सफाई करायी जाती है. इसमें एक एनजीओ को वार्ड एक से आठ तक, तो दूसरे एनजीओ को वार्ड 9 से वार्ड 16 तक की सफाई की जिम्मेदारी दी गयी है. जहां नगर पंचायत द्वारा एक एनजीओ को सफाई के लिए 10 लाख 50 हजार, तो दूसरे एनजीओ को भी 10 लाख 50 हजार रुपये भुगतान प्रति माह किया जाता है. लेकिन, सफाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है.

क्या कहते हैं मुख्य पार्षद प्रतिनिधि

इस संबंध में मुख्य पार्षद प्रतिनिधि इंद्रजीत राम ने बताया कि यह सही है कि शहर की सफाई राम भरोसे है. एनजीओ को हटाने के लिए बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन कार्यपालक पदाधिकारी द्वारा इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया. दो एनजीओ को प्रति माह 21 लाख सफाई के नाम पर भुगतान किया जाता है.

क्या कहते हैं कार्यपालक पदाधिकारी

इस संबंध में नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी सुधांशु कुमार ने बताया कि सफाई के लिए यदि कर्मी प्रतिदिन नहीं जाते हैं और कूड़े का ढेर लगा है, तो इसकी शिकायत लोगों को करनी चाहिए.

यह है संसाधनों का हाल

सफाई कर्मी-90लोडर-2ट्रिपर-3ट्रैक्टर-3हाथ ठेला-32कूड़ेदान-500सफाई सुपरवाइजर-6कूड़ा वाहन-4जेसीबी- 1ट्राइसाइकिल-16

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