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भटवलिया में स्कूल नहीं होने से तीन किमी दूरी तय कर पढ़ने जाते हैं बच्चे

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भटवलिया में स्कूल नहीं होने से तीन किमी दूरी तय कर पढ़ने जाते हैं बच्चे

भगवानपुर. प्रखंड की जैतपुरकलां पंचायत के भटवलिया गांव में स्कूल नहीं होने से प्रत्येक दिन करीब तीन किलोमीटर की दूरी तय कर वहां के बच्चे बसंतपुर गांव में स्थित स्कूल जाते हैं. इस दौरान बच्चों को भगवानपुर-जैतपुरकला पथ से गुजरना पड़ता है, जो कि वाहनों के परिचालन के दृष्टिकोण से काफी व्यस्त माना जाता रहा है. इसकी वजह से करीब-करीब हर एक-दो महीने के अंतराल पर बसंतपुर उत्क्रमित मध्य विद्यालय पहुंचने वाले बच्चे आवागमन के दौरान दुर्घटना के शिकार होते रहे हैं. इसका जीता जागता व ताजा उदाहरण बसंतपुर-जैतपुरकला मुख्य मार्ग के बसंतपुर ताल (जलाशय) के पास बीते बुधवार की सुबह करीब आठ बजे हुई सड़क दुघर्टना है, जिसमें स्कूल के लिए अपने गांव भटवलिया से बसंतपुर के उत्क्रमित मध्य विद्यालय में पढ़ने जाने के दौरान जयराम प्रसाद उर्फ जयराम बिंद का आठ वर्षीय पुत्र मिथिलेश कुमार जो कि दूसरी कक्षा का छात्र है, बुरी तरह घायल हो गया था, इस घटना में बाइक के जोरदार धक्के से मिथिलेश के पैर दो जगह फ्रैक्चर हो गये थे, जिसके बाद बाइक सवार के हीं सहयोग से घायल बच्चे को सदर अस्पताल ले जाकर उसका इलाज करवाया गया था. बच्चों के अभिभावकों ने इस जटिल समस्या से प्रभात खबर संवाददाता को अवगत कराते हुए बताया कि आज तक के इतिहास में हमारे गांव में कभी भी स्कूल नहीं रहा है, जबकि मौजूदा समय में सरकार द्वारा स्थानीय प्रांत के लगभग प्रत्येक गांवों में भवन निर्माण कर स्कूल खुलवा दिया गया है. मगर हमारा गांव इस क्षेत्र में स्थानीय प्रखंड के सबसे पिछड़े गांवों में से एक है. बच्चों के अभिभावकों ने बताया कि अब से करीब चार-पांच वर्ष पूर्व हमारे गांव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र के एक से लेकर पांचवीं तक के बच्चों को अस्थायी रूप से शिफ्ट कर पठन-पाठन का कार्य संचालित किया जाता था, मगर मौजूदा समय में यहां के प्राथमिक विद्यालय स्तर के बच्चों को यहां से करीब तीन किलोमीटर दूर बसंतपुर उत्क्रमित मध्य विद्यालय में शिफ्ट कर दिया गया, जहां पढ़ने जाने के लिए अति व्यस्त सड़क से होकर बच्चों को गुजरना पड़ता है, जिससे कई बार हमारे बच्चे सड़क दुघर्टना के शिकार हो चुके हैं. साथ ही इस दौरान अभिभावकों की सांसें तब-तक अटकी रहती हैं, जब तक उनके बच्चे स्कूल से पढ़कर खुद के घरों तक सुरक्षित नहीं लौट जाते. अभिभावकों का कहना है कि यदि हमारे बच्चे स्कूल आने-जाने के लिए शार्टकट रास्ते का उपयोग भी करें तो उन्हें खेतों के मेढ़ से गुजरना पड़ेगा, ऐसे में रोड एक्सिडेंट का खतरा यदि बहुत हद-तक कम भी हो जाये तो विषैले जीव-जंतुओं से खतरा बना रहता है. इस तरह से एक तरफ कुआं, तो दूसरी तरफ खाईं जैसी स्थिति बनी रहती है. भटवलिया गांव के अभिभावकों ने प्रभात खबर अखबार में प्रकाशित खबर के माध्यम से शासन-प्रशासन से गांव में शीघ्र विद्यालय भवन निर्माण करवाकर उसमें पठन-पाठन के संचालन करवाने की मांग की है. क्या कहते हैं ग्रामीण– —भटवलिया गांव के घरेलू शिक्षक अर्जुन बिंद ने बताया कि हमारे बच्चों के बार-बार एक्सीडेंट होने का मुख्य वजह हमारे गांव में विद्यालय का नहीं होना है. इस समस्या से हम सभी ग्रामीण स्थानीय प्रखंड तथा अंचल स्तर के पदाधिकारी के साथ-साथ जिला स्तर के आला अधिकारियों से भी कई बार लिखित गुहार लगा चुके हैं, बावजूद उसके इस समस्या का निदान अब तक नहीं हो सका है. –अभिभावक दयानंद चौबे ने बताया कि विद्यालय भवन निर्माण के दृष्टिकोण से हमारे यहां सरकारी जमीन पर्याप्त रकबा क्षेत्र में उपलब्ध है. उस पर गांव के ही कुछ लोगों का अवैध कब्जा है, जो कि निजी स्वार्थ की वजह से उसे मुक्त करना नहीं चाहते हैं. –अभिभावक मंगल बिंद ने बताया कि इस समस्या से हम सभी बिहार सरकार के पूर्व मंत्री ब्रजकिशोर बिंद व अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मो जमां खां से अवगत करा चुके हैं, मगर अब तक आश्वासन के साथ कुछ नहीं हासिल हो सका. –गांव में ही बच्चों को प्राथमिक शिक्षा देने वाले घरेलू शिक्षक सह अभिभावक विरेंद्र बिंद ने बताया कि गांव में विद्यालय नहीं होने से हमारे यहां के ज्यादातर लोग अशिक्षित श्रेणी के हैं, लिहाजा चुनाव के दौरान कोई भी प्रत्याशी व नेता वोट लेने के लिए आश्वासन देने का झांसा देकर यहां की ग्रामीणों को चुना लगा जाते हैं. मैं यहां के बच्चों को पढ़ाने का भी कार्य किया करता हूं, ताकि वे शिक्षित होकर खुद का भविष्य बना सकें.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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