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Home बिहार कैमूर Kaimur News : त्योहार के साथ चुनाव को लेकर उत्साह, पर कई प्रमुख ट्रेनों में आरक्षण फुल

Kaimur News : त्योहार के साथ चुनाव को लेकर उत्साह, पर कई प्रमुख ट्रेनों में आरक्षण फुल

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Kaimur News : त्योहार के साथ चुनाव को लेकर उत्साह, पर कई प्रमुख ट्रेनों में आरक्षण फुल
सांकेतिक तस्वीर

भभुआ सदर. त्योहारों का मौसम अब अपने परवान पर आ चुका है और शारदीय नवरात्र बीतने के बाद धनतेरस व प्रकाश पर्व दीपावली और इसके सात दिन बाद लोक आस्था का महापर्व कार्तिक छठ सामने है, तो इस बार छठ पर्व के बाद बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर वोटिंग भी है. अब पर्व के साथ चुनाव की भी घर-घर तैयारी चल रही है. इसे लेकर शहर से लेकर गांव तक में लोगों के बीच गजब का उत्साह है. इधर, परदेसी घर लौटने को लेकर उत्साहित हैं. एक तरफ जगह-जगह जहां बड़े त्योहारों को लेकर उत्साह है, वहीं दूसरी ओर इस अवसर पर परदेसी पूतों के आगमन को लेकर लोगों का मन अभी से प्रफुल्लित नजर आ रहा है, लेकिन इस बार भी दीपावली और छठ पूजा पर्व पर घर लौटना किसी चुनौती से कम नहीं है. क्योंकि, अभी से ही दिल्ली, मुंबई, बैंगलुरू और हैदराबाद सहित महानगरों से पूर्वांचल की तरफ रुख करने वाली ट्रेनों से लोगों को घर लौटने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है. यूपी और बिहार जाने वाली लगभग सभी प्रमुख ट्रेनों की सीटें पहले ही भर चुकी हैं. अब हालत यह है कि 18 अक्तूबर के बाद किसी भी ट्रेन में वेटिंग टिकट तक उपलब्ध नहीं है, ऐसे में लोगों की उम्मीद अब सिर्फ तत्काल कोटे और रेलवे की ओर से चलायी गयी स्पेशल ट्रेनों पर टिकी है. इनमें सबसे अधिक परेशानी दिल्ली के अलावा सूरत, अहमदाबाद, मुम्बई, पुणे, बैंगलुरू जैसे बड़े शहरों के लिए है. रविवार को सूरत से लौटे छावनी मुहल्ला निवासी सुनील सिंह ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि वह सूरत स्थित कपड़ा मिल में काम करता है. उन्हें सपरिवार घर लौटना था, लेकिन महीनों पहले से ट्रेन में आरक्षण नहीं मिला. मजबूरन वह सपरिवार जनरल कम्पार्टमेंट में जैसे तैसे घर लौट पाये हैं, जबकि इसके लिए भी उन्हें दो दिन तक सूरत रेलवे स्टेशन पर गुजारने पड़ गये. = लंबी दूरी की सभी ट्रेनों में बर्थ फूल दीपावली और छठ महापर्व के समय परदेसियों के आगमन को लेकर ट्रेनों में काफी भीड़ बढ़ जाती है, लेकिन पहले से ही सारे बर्थ बुक हैं. लंबी दूरी की सभी ट्रेनों में बर्थ लगभग फूल चल रहा है. दुर्गापूजा के समय तो स्थिति कुछ ठीक थी, लेकिन दीपावली व छठ के समय तो अधिकतर ट्रेनों में वेटिंग टिकट भी मिलना मुश्किल हो गया है. एक माह से अधिक समय पहले से ही नो रूम का बोर्ड दिल्ली, मुम्बई, सूरत और हैदराबाद से आने वाली कई प्रमुख गाड़ियों में लटका हुआ है. वंदे भारत, बिहार संपर्क क्रांति सुपरफास्ट, सीएसटी पटना सुपरफास्ट, मुम्बई मेल, पुरुषोत्तम एक्सप्रेस, महाबोधि एक्सप्रेस, पाटलिपुत्र लोकमान्य तिलक सुपर फास्ट, मुंबई छपरा गोदान एक्सप्रेस, शिवगंगा एक्सप्रेस, काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस ट्रेनों में 18 अक्तूबर के बाद वेटिंग टिकट भी उपलब्ध नहीं है. =अपनों के आने का रहता हैं इंतजार दरअसल, दशहरा के बाद दीपावली और छठ में परदेश कमाने गये लोग अपने घर लौटते हैं, इन बड़े त्योहारों में घर गांव में भी वृद्ध मां-बाप सहित अपने एक ओर जहां अपनी बहू-बेटी के इस मौके पर आने को लेकर हर्षित नजर आते हैं, वहीं दूसरी ओर नाती-पोतों के आगमन का भी उन्हें बेसब्री से इंतजार रहता है. हालांकि परदेसी पूतों को इस त्योहार के मौसम में अपनी जन्मभूमि वापस आना मुश्किल लग रहा है. कारण आगमन का सहज तथा मुख्य रूप से एक मात्र साधन ट्रेन में आरक्षण उपलब्ध नहीं है. जिन लोगों को अभी तक आरक्षण नहीं मिल सका है, वे काफी परेशान हैं. वैसे पहले से आरक्षण करा चुके लोग इस चिंता से निश्चिंत हैं. रेलवे ने इसके लिए पर्व त्योहार के मद्देनजर 15 हजार विशेष ट्रेनें तो दी हैं, लेकिन उसमें भी अधिकतर फुल चल रहे हैं या फिर ऐसे ट्रेनों की जानकारी ही परदेसियों को नहीं हो पा रही है. = छठ पर अपने गांव, शहर लौटते हैं परदेसी कैमूर जिले का शायद ही कोई ऐसा परिवार हैं, जिसके कम से कम एक सदस्य बाहर नहीं रहते हों. उल्लेखनीय है कि इस क्षेत्र के प्राय: सभी परिवार के सदस्य बाहर रहते हैं. कोई रोजी-रोटी के लिए बाहर गया हुआ है, तो कोई पढ़ाई लिखाई के लिए. कोई निजी, तो कोई सरकारी नौकरी की वजह से परदेसी बना हुआ है. इस क्षेत्र में साल में दो अवसर ऐसे हैं जिस मौके पर परदेस रहनेवाले वापस अपने गांव लौटते हैं. इसमें होली के बाद दूसरा मौका यही है. यानी दुर्गापूजा, दीपावली व छठ. इन्हीं दो अवसर पर गांव अपने परदेसी पूतों से गुलजार होते हैं. देश और विदेश में रहने वालों के फासले भी इन्हीं मौके पर मिटते हैं. एक-दूसरे से भेंट होती है. इस इलाके में अधिकांश लोग दुर्गापूजा पर घर आते हैं और इसके बाद छठ पूजन के पश्चात ही वापस लौटते हैं. लेकिन इस बार छठ के बाद ही विधानसभा चुनाव होने हैं, इसको लेकर भी परदेसियों में घर लौटने की अफरातफरी है.

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