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किसानों ने बगैर उचित मुआवजा सड़क निर्माण नहीं होने देने की खायी कसम

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किसानों ने बगैर उचित मुआवजा सड़क निर्माण नहीं होने देने की खायी कसम

भभुआ. वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे के निर्माण में किसानों की अधिग्रहित भूमि का जब तक उचित मुआवजा नहीं मिलता, तब तक एक्सप्रेसवे का निर्माण नहीं होने देने की कसम किसानों द्वारा खायी गयी. उचित मुआवजा को लेकर रविवार को अधिग्रहित भूमि के 93 मौजों में किसानों का विरोध जारी रहा. गौरतलब है कि वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे के निर्माण में सरकार द्वारा अधिग्रहित भूमि के उचित मुआवजा भुगतान को लेकर किसान लंबे समय से धरना, प्रदर्शन, उपवास, पदयात्रा, तालाबंदी आदि कार्यक्रम चला रहे हैं. वर्तमान में एक्सप्रेसवे निर्माण करने वाली कंपनी के बेस कैंप मसोई पर 380 दिन से धरना देने सहित अपने-अपने मौजों में भी किसानों द्वारा धरना-प्रदर्शन किया जा रहा है, जो रविवार को भी जारी था. रविवार को जिले के निसीझा, झाली, रामपुर, झलकोरा, विजरा, लोहंदी, गंगापुर, ठकुरहट, मसोई, पसाई, मईडाढ, बसनी, गंगापुर, चांद, गोई सहबाजपुर, जिगना, सिहोरियां, बबुरहन, बेतरी, सिहोरा, सिवों, दुमदुम, सारनपुर, ढहनियां, गोडहन, जगरियां, बीउर, दुलहरा, कुसहा, करयडा, भेरी, खैटी, निरबिसपुर, बघेला, सरेला, बैरी, मोरवां, गेहुआं आदि गांवों में किसानों द्वारा विरोध किया गया. सुबह 11 बजे दिन से विरोध कर रहे किसान किसान एकता जिंदाबाद, जय जवान जय किसान, उचित मुआवजा नहीं तो एक्सप्रेसवे नहीं आदि नारे लगा रहे थे. अनिश्चितकालीन धरना दे रहे किसान राजेश पासवान, मराछी देवी, द्वारिका बिंद आदि ने बताया कि उन लोगों के पास जो थोड़ी बहुत बाप-दादों की जमीन बची है. उसे भी सरकार बगैर उचित दाम दिये छीनने पर उतारू है. लेकिन, हम अपने जमीन को बगैर उचित मुआवजा लिये किसी भी कीमत पर सरकार को नहीं देंगे. किसानों ने बताया कि उन लोगों ने कसम खायी है कि जब तक उचित मुआवजा का भुगतान सरकार नहीं करती है तब तक किसान एक्सप्रेसवे का निर्माण जिले में नहीं होने देंगे. इधर, रविवार को जिले के 93 मौजों में बगैर उचित मुआवजा एक्सप्रेसवे निर्माण का विरोध कर रहे किसानों ने चक्का जाम करने तथा प्रशासनिक गतिविधियों को आगे बंद करने का भी एलान किया. विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे किसान संघर्ष मोर्चा और भारतीय किसान यूनियन के नेता पशुपतिनाथ सिंह, अभिमन्यु सिंह, अनिल सिंह आदि ने बताया कि सरकार द्वारा अधिग्रहित किये गये 93 मौजों के भूमि मालिक किसानों का जमीन आखिर क्यूं बिना उचित दाम के छीनना चाहती है. अगर सरकार को किसान कमजोर या बेबस दिखाई देते हैं तो सरकार इसे भूल जाये. सरकार अगर हमारी जमीन की उचित मुआवजा नहीं देती है, तो आगे हम चक्का जाम सहित प्रशासनिक गतिविधियों को बंद कराने का भी आंदोलन चलायेंगे. जब तक उचित मुआवजा नहीं मिलेगा, तब तक एक्सप्रेसवे का निर्माण नहीं होने देंगे. सरकार अगर जबर्दस्ती करती है तो हम मरने के लिए भी तैयार हैं. औद्योगिक पार्क के विरोध में भी लगा किसानों का महापंचायत = वाराणसी कोलकाता एक्सप्रेसवे के साथ अब औद्योगिक पार्क भी बना मुद्दा फोटो महापंचायत में जुटे किसान भभुआ. जिले में अभी वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे निर्माण में अधिग्रहित भूमि के मुआवजा का पेच सुलझ भी नहीं पाया है कि जिले में बनाये जाने वाले औद्योगिक पार्क के लिए भूमि अधिग्रहण भी एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है. इसे लेकर रविवार को चैनपुर अंचल की सिरबिट पंचायत में किसानों ने महापंचायत लगायी गयी. इसमें मसोई, खरहनियां, रूपी आदि गांवों के किसान जुटे थे. महापंचायत में किसानों ने कहा कि कैमूर जैसे कृषि प्रधान जिले में सरकार औद्योगिक पार्क आखिर क्यों बनाना चाहती है. इस पिछड़े जिले के लिए औद्योगिक पार्क जैसी योजनाओं के बजाय रोजगार परक योजनाओं की जरूरत है. किसानों ने कहा कि औद्योगिक पार्क के नाम पर किसानों की 1000 एकड़ जमीन छीनने का कोई औचित्य नहीं हैं. सरकार फालतू योजनाएं बना कर औने-पौने दाम पर किसानों की जमीन हड़पना चाहती है. लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे. महापंचायत में टुनटुन सिंह, अशोक कुमार, संजय जयसवाल, अमित रंजन, मुन्ना चौहान, विकास यादव, तिलेश्वर दूबे, इंदु देवी, अरुण पांडेय, मंशा सिंह, प्रभात सिंह, ठाकुर गोड, चंद्रजित यादव आदि शामिल थे.

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