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सांप काटने के बाद झाड़-फूंक के चक्कर में अधेड़ की मौत

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सांप काटने के बाद झाड़-फूंक के चक्कर में अधेड़ की मौत

रामगढ़. रविवार की देर शाम थाना क्षेत्र के तरैथा गांव के बधार में सर्पदंश के बाद झाड़-फूंक के चक्कर में एक 55 वर्षीय अधेड़ की मौत हो गयी. मृतक की पहचान शिव मूरत बिंद पिता स्वर्गीय सुदर्शन बिंद बतायी गयी है. जानकारी के अनुसार, शिव मूरत रविवार की देर शाम अपने खेतों में धान की फसल देखने गये थे. इसी दौरान खेतों से निकलकर एक जहरीले सांप ने उन्हें काट लिया, जिससे वह खेत में अचेत होकर गिर पड़े. उधर से गुजर रहे ग्रामीणों की जब नजर पड़ी, तो अन्य लोगों के सहयोग से उन्हें गांव लाया गया. यहां परिजनों द्वारा उन्हें झाड़-फूंक के लिए लगभग 100 किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश के अमवा के सतीमाई ले जाया गया, वहां उनकी तबीयत और बिगड़ने लगी तो आखिरकार परिजन उन्हें गंभीर अवस्था में मोहनिया के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सक ने उन्हें जांच के बाद मृत घोषित कर दिया. बताते चलें कि सरकार द्वारा सरकारी अस्पतालों में सर्पदंश के बाद लगने वाले इंजेक्शन व इलाज के लिए सुविधा प्रदान करने के बाद आज भी ग्रामीण परिवेश के लोग सर्पदंश के बाद सीधा अस्पताल जाने के बजाय झाड़-फूंक पर ज्यादा विश्वास कर रहे हैं, जिससे आये दिन मौत की घटनाएं सुनने को मिल रही है. बहरहाल, पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भभुआ सदर अस्पताल भेज दिया है. मृतक के दो बेटे व दो बेटियां हैं, जिनके सिर से पिता का साया उठ गया. सर्पदंश की घटनाएं बढ़ी बीते 16 सितंबर को थाना क्षेत्र के नावानगर गांव में खाना बनाने के दौरान किचेन में छुपे जहरीले सांप के काटने से एक महिला संगीता देवी की मौत हुई थी. जबकि, 16 अक्तूबर को रामगढ़ नगर पंचायत वार्ड नौ के रहने वाले राम प्यारे धोबी व उनके 13 वर्षीय बेटे छोटू की खाना खाकर सोने के दौरान सर्पदंश से मौत हुई थी. उक्त दोनों ही घटनाओं में परिजन सर्पदंश के बाद तत्काल अस्पताल जाने के बजाय अपने गांव से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी तय कर उत्तर प्रदेश के अमवा के सतीमाई धाम पर गये और तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उन्हें जांच के बाद मृत घोषित कर दिया था.

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