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Home बिहार कैमूर दो बार मापी, दो बार बना एस्टीमेट, फिर भी फाइलों में गुम हो गया छठ घाट का निर्माण

दो बार मापी, दो बार बना एस्टीमेट, फिर भी फाइलों में गुम हो गया छठ घाट का निर्माण

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दो बार मापी, दो बार बना एस्टीमेट, फिर भी फाइलों में गुम हो गया छठ घाट का निर्माण

ठंडे बस्ते में कटराकला के ऐतिहासिक पोखरा का जीर्णोद्धार, ग्रामीण लगा रहे गुहार – जून माह से पहले नहीं हुआ छठ घाट का निर्माण, तो पोखरा में भर जायेगा नहर का पानी – पटना से आयी वरीय अधिकारियों की टीम ने निरीक्षण कर दिया था एनओसी # प्रभात खास # मोहनिया सदर. कटराकला के ऐतिहासिक ब्रिटिश कालीन पोखरा के कच्चे तट पर छठ घाट निर्माण के लिए दो बार मापी हुई. वित्तीय वर्ष 2024-25 में एस्टीमेट भी तैयार किया गया. योजना को स्वीकृति प्राप्त हुए एक वित्तीय वर्ष बीत गया. इसके बावजूद इस ऐतिहासिक पोखरा में छठ घाट का निर्माण कार्य शुरु नहीं किया जा सका है. यदि जून माह से पहले छठ घाट का निर्माण कार्य नहीं कराया गया, तो पोखरा नहर के पानी से भर जायेगा. लोग उक्त पोखरा में छठ घाट निर्माण को लेकर आस लगाये हुए है और इधर अधिकारियों ने इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया. बीते 28 मई 2025 को पोखरा का निरीक्षण कर पंचायत सचिव व जेइ से छठ घाट निर्माण के लिए मापी करा एस्टीमेट तैयार कराया गया. इसके पहले प्रमुख प्रतिनिधि राजेश प्रसाद गुप्ता द्वारा जेइ से 04 अप्रैल 2025 को उक्त पोखरा की मापी करा छठ घाट के लिए एस्टीमेट तैयार कराया गया था. उसका वित्तीय वर्ष 2024-25 व एक्टिविटी कोड 97678458 है, इसके बावजूद आज तक निर्माण कार्य शुरु नहीं कराया गया. 13 जून 2024 को मत्स्य प्रसार पदाधिकारी अभय रंजन गुप्ता, 12 जुलाई 2024 को मत्स्य व पशुपालन विभाग की प्रधान सचिव एन विजयलक्ष्मी के आदेश पर मत्स्य पटना परिक्षेत्र के उप निदेशक आभास चंद्र मंडल व पटना के प्रभारी निदेशक बाद टुनटुन सिंह ने निरीक्षण कर प्रधान सचिव को अपनी रिपोर्ट सौंपी. 15 मई 2025 को मत्स्य निदेशक अभिषेक रंजन ने छठ घाट निर्माण के लिए अनापत्ति दिया. कटराकला के इस ऐतिहासिक पोखरा के जीर्णोद्धार का उद्घाटन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रिमोट से 26 अक्तूबर 2019 को किया था. इस पोखरा के कई हिस्सों का पक्कीकरण एक करोड़ 83 लाख 12 हजार 275 रुपये की लागत से कराया गया है. शेष बचे कच्चे तट पर कुछ लोग अपने घरों का कूड़ा कचरा पोखरा में फेंक कर पानी में गंदगी फैला रहे हैं. # ऐतिहासिक पोखरा की विशेषता 06.62 हेक्टेयर क्षेत्रफल में अपनी भुजाएं फैलाये सागर के समान यह ऐतिहासिक ब्रिटिश कालीन पोखरा अपने अंदर कई यादों को समेटे है .लगभग चार दशक पूर्व इसी पोखरा के पानी से लोग खाना बनाने, पीने व नहाने का कार्य करते थे, यहां तक कि पोखरा के पानी का उपयोग लोग शौच के लिए नहीं करते थे. पोखरा के एक तट पर अवस्थित बाबा भोलेनाथ का मंदिर, विवाह मंडप, पक्की सीढ़ियां, शांत जल में हठखेलियां करता हंसों का जोड़ा, पेड़ों पर कलरव करता पक्षियों का झुंड, हल्की हवा के झोकों के साथ विशालकाय पोखरा के पानी में उठती लहरें बेबस ही लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करती है. इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए ग्रामीण डीएम से गुहार भी लगा चुके हैं. # प्रभात खबर की पहल पर डीएम व प्रधान सचिव ने लिया था संज्ञान इस ऐतिहासिक ब्रिटिश कालीन पोखरा को धरोहर के रूप में बचाये रखने के लिए आपके अपने समाचार पत्र प्रभात खबर ने 09 जून 2024 को अपने संस्करण में कई यादों को समेटे है कटराकला का ब्रिटिश कालीन ऐतिहासिक पोखरा, एनओसी के पेच में बन रहा कूड़ादान नामक शीर्षक से खबर को प्रकाशित किया था. इस पर डीएम सावन कुमार और प्रधान सचिव ने गंभीरता से संज्ञान लिया, 12 जून 2024 को कटराकला पोखरा के सौंदर्यीकरण की कवायद तेज, जांच के लिए पहुंचे अफसर, 19 मई 2025 को कटराकला के ऐतिहासिक पोखरा पर बनेगा पक्का छठ घाट, आज होगी मापी व 19 मई 2025 को 19 लाख की लागत से छठ घाट का होगा निर्माण नामक शीर्षक से खबर को प्रकाशित किया था. प्रभात खबर की पहल पर डीएम सावन कुमार ने इस ऐतिहासिक पोखरा को बचाने की दिशा में पहल शुरु की थी. # बोले डीएम इस संबंध में जिलाधिकारी नितिन कुमार सिंह ने कहा कि ऐतिहासिक पोखरा में छठ घाट निर्माण की दिशा में क्या हो रहा है, मैं देखवाता हूं. # बोले बीडीओ इस संबंध में पूछे जाने पर बीडीओ मानेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि योजना बन गयी है, तो एक बार हम पोखरा का निरीक्षण कर लेते है, फिर जैसा होगा किया जायेगा.

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