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जिले में भूमि सर्वे का कार्य नहीं पकड़ रहा रफ्तार

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जिले में भूमि सर्वे का कार्य नहीं पकड़ रहा रफ्तार

भभुआ. सरकार द्वारा कराये जाने वाले भूमि सर्वे का कार्य अभी भी जिले में रफ्तार नहीं पकड़ सका है. क्योंकि, अभी तक भूमि सर्वे को लेकर सिर्फ 14 प्रतिशत रैयतों द्वारा ही अपनी जमीन के स्वामित्व का स्व घोषणा पत्र दिया गया है. जबकि, जिले के 1680 राजस्व ग्रामों के लगभग 10 लाख 66 हजार रैयतों की जमीन का सर्वे किया जाना है. गौरतलब है कि जमीन संबंधित कागजात को अपडेटेड कराने के लिए सरकार ने भूमि सर्वे का काम तो शुरू करा दिया है. लेकिन, अपेक्षित गति सर्वे अभियान में नहीं दिखाई दे रही है, क्योंकि भूमि सर्वे में आने वाली कठिनाइयों जैसे बाप दादाें के नाम का खतियान रद्द होकर खराब हो जाना या गुम हो जाने के कारण नये खतियान की व्यवस्था करना, भूमि संबंधी रकबा, खाता, खेसरा आदि के परिमार्जन कराने, चकबंदी हुए मौजों का संपुष्ट नक्शा और खतियान नहीं मिलना, कंप्यूटर पर ऑफलाइन जमा किये गये वार्षिक लगान रसीद को अपडेटेड नहीं दिखाना, एक ही खाते की जमीन दो-दो किसानों के नाम पर अंचल के जमाबंदी में दर्ज होना है, परिमार्जन के लिए अपनी खेती गृहस्थी का काम छोड़ कर कई दिनों तक अंचल कार्यालयों पर कर्मचारी और अधिकारियों को खोजने के लिए चक्कर लगाने आदि लफड़े से किसानों के सामने शुरू से लेकर अब तक भारी परेशानी बनी हुई है. हालांकि सरकार द्वारा स्व घोषणा पत्र जमा करने की तिथि भी बढ़ा दी गयी है. बावजूद इसके पिछले पांच माह से सर्वे का काम रफ्तार नहीं पकड़ सका है. जबकि, सर्वे के काम को गति देने के लिए जिले के सभी अंचलों में विशेष बंदोबस्त शिविर स्थापित कर पर्याप्त मात्रा में बंदोबस्त पदाधिकारी, कानूनगो, अमीन तथा कार्यपालक सहायक प्रतिनियुक्त किये गये हैं. जानकारी के अनुसार, जिले में कुल 1700 राजस्व ग्रामों की संख्या में से 1680 ग्रामों के रैयतों की जमीन का सर्वे किया जाना है. इस संबंध में पूछे जाने पर जिला बंदोबस्त पदाधिकारी मो उमैर ने बताया कि 1700 राजस्व ग्रामों में 20 राजस्व ग्राम जो शहरी क्षेत्र में है, उनका सर्वे अभी नहीं किया जा रहा है. जिले के 1680 ग्रामों का ही सर्वे कार्य अभी जारी है. उन्होंने बताया कि इन सभी 1680 राजस्व ग्रामों में ग्राम सभा कर ली गयी है और किसानों द्वारा ऑफ लाइन और ऑनलाइन दिये गये स्व घोषणा पत्र जमा करके सॉफ्टवेयर पर अपलोड किये जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि जहां तक उन्हें याद है जिले के भभुआ, भगवानपुर, रामपुर, मोहनिया, चांद, चैनपुर, नुआंव, कुदरा, रामगढ़, दुर्गावती तथा रामपुर अंचल में लगभग 10 लाख 66 हजार रैयतों की जमीन का नया भू सर्वे किया जाना है. इसमें से अब तक ऑफलाइन और ऑनलाइन मिलाकर लगभग एक लाख 50 हजार रैयतों द्वारा शिविर सहित अन्य माध्यमों से अपना स्व घोषणा पत्र अंचल स्तरीय बंदोबस्त कार्यालयों में दिया जा चुका है. इन्सेट कागजात जमा करने में छूट रहे किसानों के पसीने भभुआ. भूमि संबंधित रिकाॅर्डों को अपडेटेड करने के लिए जिले में चल रहे भूमि सर्वे के लिए सरकार को दिये जाने वाले कागजातों को लेकर किसानों के पसीने छूट रहे हैं. किसानों का मानना है कि सरकार ने भूमि सर्वे का काम बगैर पूर्व होमवर्क किये अचानक शुरू कर दिया. नतीजा है कई दिनों तक घंटों चक्कर लगाने के बाद किसानों को जमीन का खतियान मिल पाता है. अगर जमीन पूर्वजों के नाम पर है और पूर्वज वर्तमान में स्वर्ग सिधार चुके है तो ऐसे में पूर्वजों के मरण काल की जानकारी या मृत्यु प्रमाण पत्र की व्यवस्था करना, पुराने बाप दादों के नाम के जमीन की मालगुजारी रसीद खोजना आदि विभिन्न समस्याओं ने किसानों को बेचैन कर दिया है. गौरतलब है कि नये सर्वे में जमीन रैयत के नाम पर है या फिर उसके परिवार के किसी अन्य सदस्य के नाम पर तो इसके लिए प्रपत्र दो और प्रपत्र तीन ए भरकर उसके साथ खतियान, केवाला, मालगुजारी रसीद, आधार कार्ड, वंशावली सहित मोबाइल नंबर भी देना है. अगर जमीन पूर्वजों के नाम पर थी और वे अब मर चुके है तो उनके मरने का सबूत और उनके पुराने जमीन का रिकार्ड भी देना है. जमीन खरीदी है तो जमीन का रजिस्ट्री दस्तावेज और अगर जमीन के विवाद को ले कोई कोर्ट में केस या कोई आदेश है, तो उसका भी हवाला रैयत को बंदोबस्त कार्यालय को देना है.

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