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Home बिहार कैमूर कैमूर का खजुरा मध्य विद्यालय: जर्जर छत के साये में पढ़ने को मजबूर बच्चे, मंडरा रहा बड़ा खतरा

कैमूर का खजुरा मध्य विद्यालय: जर्जर छत के साये में पढ़ने को मजबूर बच्चे, मंडरा रहा बड़ा खतरा

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कैमूर का खजुरा मध्य विद्यालय: जर्जर छत के साये में पढ़ने को मजबूर बच्चे, मंडरा रहा बड़ा खतरा
स्कूल का जर्जर छत

Kaimur News (कर्मनाशा से मैनुद्दीन शाह की रिपोर्ट ):
दुर्गावती प्रखंड क्षेत्र में एक ऐसा स्कूल है, जहां हर दिन बच्चों व शिक्षकों के अंदर दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है. दुर्घटना की आशंका के बावजूद भी बच्चे स्कूल हर दिन आते हैं, ताकि उनकी शिक्षा की भूख मिट सके. जिस स्कूल की बात की जा रही है, वह राजकीय कृत मध्य विद्यालय खजुरा है, जो की कर्मनाशा में अवस्थित है. इस विद्यालय में चार पुराने भवन और चार नए भवन अवस्थित हैं. जिसमें 4 पुराने भवन पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं. कमरे में लगे लोहे के गाटर में जंग लग रहे हैं और पटिया नीचे गिर रहे हैं.

लंच टाइम होने के कारण टल गया था बड़ा हादसा

अभी दो माह पहले ही पढ़ाई पीरियड में भवन का एक पटिया नीचे गिर पड़ा. संजोग अच्छा था कि उस समय लंच का समय था और बच्चे बाहर खाना खा रहे थे. नहीं तो बड़े हादसे को टाला नहीं जा सकता था. इस डर के बावजूद बच्चे पढ़ाई पीरियड में रोज पढ़ने आते हैं. वहीं विद्यालय के प्रिंसिपल का कहना है कि वरीय अधिकारियों को इसके बारे में सूचित किया गया है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. फिलहाल मेंटेनेंस से काम चलाया जा रहा है, जबकि जर्जर भवन को तोड़कर नए भवन बनाने की यहां जरूरत है.

1975 में हुआ था निर्माण, अब 800 से अधिक बच्चे हैं नामांकित

दरअसल, वर्ष 1975 में खजुरा कर्मनाशा सहित आसपास के गांवों के बच्चों को शिक्षा प्रदान करने के लिए सरकार द्वारा राजकीय कृत मध्य विद्यालय खजुरा का निर्माण कराया गया था. पूर्व में यहां चार ही कमरे उपलब्ध थे. बाद में यहां चार और नए कमरे बनाए गए हैं, जिसमें पुराने वाले चार कमरे जर्जर हो गए हैं. आठ कमरों वाले इस स्कूल में कक्षा 1 से 8 तक 324 छात्र नामांकित हैं.

इसके अलावे विद्यालय अपग्रेड होने के बाद कक्षा 10 से 12 तक के 520 बच्चे नामांकित हैं. टेन प्लस टू अपग्रेड होने के बाद 10 + 2 के बच्चों को पढ़ने के लिए मात्र दो कमरे ही बने हैं और तीन कमरे अभी निर्माणाधीन हैं. जो नए कमरे बन रहे हैं, उसके भवन निर्माण में काफी अनियमितता की शिकायत ग्रामीणों द्वारा की जा रही है. 10+2 विद्यालय में कमरा कम होने के कारण 10 और 12 के बच्चों की पढ़ाई दो शिफ्टों में होती है.

सरकारी दावों की खुली पोल, स्कूल तक पहुंचने का रास्ता भी नहीं

राजकीय कृत मध्य विद्यालय खजुरा में पढ़ने आने वाले स्कूली बच्चों का हौसला इतना बुलंद है कि वे हादसे के डर के बावजूद हर दिन स्कूल आ रहे हैं. पंचायती राज व्यवस्था हो या बिहार सरकार द्वारा शिक्षा में गुणात्मक सुधार के सभी दावे, इस विद्यालय की जर्जर स्थिति के आगे टूट रहे हैं. लंबा समय बीत जाने के बावजूद भी न तो स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस स्कूल की दुर्दशा सुधारने की कोशिश की और ना ही सरकार एवं प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया.

अगर प्रशासन द्वारा इसे गंभीरता से लिया गया होता तो इस स्कूल में आने-जाने के लिए रास्ता बन गया होता. रोड से स्कूल में जाने के लिए रास्ते के लिए जमीन उपलब्ध है, लेकिन रोड से स्कूल तक गड्ढा होने के कारण रास्ता नहीं बन पाया है. इस स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे अपनी शिक्षा की भूख तो मिटा रहे हैं, लेकिन व्यवस्था को हर दिन कोस रहे हैं.

अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को कराया गया है संज्ञान: प्रधानाध्यापिका

विद्यालय की प्रधानाध्यापिका प्रियंका ने बताया कि विद्यालय भवन की जर्जर स्थिति को लेकर विभागीय अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों को पूर्व में संज्ञान में दिया गया है, लेकिन अभी तक उस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई है. स्कूल में आने-जाने के लिए रास्ते और नए भवन के लिए हम लोग लगातार प्रयास कर रहे हैं ताकि रास्ता और भवन बन जाए, जिससे कि बच्चों की पढ़ाई में कोई दिक्कत ना आने पाए.

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सूर्यकांत कुमार प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर हैं और डिजिटल मीडिया में तीन वर्षों का अनुभव रखते हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल चैनल न्यूज रील्स से की. इसके बाद नेशन दर्पण और खबरिया जंक्शन में कार्य किया, जहां कंटेंट राइटिंग, वीडियो एडिटिंग और वॉयस ओवर से जुड़े विभिन्न कार्यों का अनुभव हासिल किया. उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया है. वर्तमान में वे गया, औरंगाबाद, कैमूर और बक्सर जिलों से जुड़ी हाइपरलोकल खबरों, शिक्षा, रोजगार, प्रशासनिक गतिविधियों और जनसरोकार के विषयों पर समाचार लेखन का कार्य कर रहे हैं. इसके अलावा खेल और मनोरंजन से जुड़ी खबरों में भी विशेष रुचि रखते हैं.
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