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अधौरा की डुमरांवा पंचायत में भूजल स्तर पहुंचा 65 फुट नीचे

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अधौरा की डुमरांवा पंचायत में भूजल स्तर पहुंचा 65 फुट नीचे

भभुआ. इस प्रचंड गर्मी में जिले में पेयजल की समस्या लगातार गहराते जा रही है. नतीजा है जिले के पहाड़ी प्रखंड अधौरा में पानी पाताल में जा रहा है. हालात इतने गंभीर बनते जा रहे हैं कि अधौरा प्रखंड की डुमरांवा पंचायत में भूजल स्तर 65 फुट नीचे चला गया है. जिले में अब तक माॅनसून नहीं आने के कारण पानी को लेकर कोहराम मच गया है. आदमी से लेकर पशु तक बेहाल हो चुके हैं. यही नहीं पानी के अभाव में पहाड में मवेशियों के भी मरने की खबर बतायी जाने लगी है. इधर, इस संबंध में डुमरांवा पंचायत के डुमरांवा गांव के रहने वाले पूर्व मुखिया मेशलाल यादव ने बताया कि डुमरांवा पंचायत में पानी की गंभीर समस्या खडी हो गयी है. डुमरांवा चैनपुरा आदि पंचायतों से गुजरने वाली नाशन नदी सूख कर कीचड़ में बदल गयी है. पहाड़ा चुओं से भी पिछले तीन-चार माहों से पानी रिसना बंद हो चुका है. आदमी के साथ-साथ पशु भी पानी के बिना छटपटा रहे हैं. पूर्व मुखिया ने बताया कि अभी हाल में ही डुमरांवा के मनोज कुमार यादव की एक भैंस पानी के अभाव में मर गयी. उन्होंने बताया कि मनोज के पास आधा दर्जन से ऊपर मवेशी हैं. पानी के संकट को देखते हुए बाकी मवेशियों को मनोज के पिता पहाड़ से नीचे उतर कर मैदानी इलाके में चले गये हैं. एक भैंस घर में दूध खाने के लिए रखी गयी थी, जो सुबह चरने के लिए निकली थी. लेकिन, शाम में नदी के किनारे भैंस को मरा पाया गया. ग्रामीणों को अंदाजा है कि प्यास से छटपटा रही भैंस नदी के किनारे पहुंची होगी और पानी नहीं मिलने के कारण छटपटा कर मर गयी. उन्होंने बताया कि डुमरांवा में सरकार द्वारा एक वाटर टैंक भी पशुओं के पानी पीने के लिये बनवाया गया है. लेकिन, भू जल स्तर भागने के कारण यह वाटर टैंक भी कभी भर नहीं पा रहा है. थोड़ा बहुत पानी आने के बाद वाटर टैंक का मोटर बंद हो जा रहा है. डुमरांवा के ही रहने वाले सुरेन्द्र जयसवाल, अनिल यादव आदि ग्रामीणों ने बताया कि यहां पर सरकार की लगायी गयी नल जल योजना से भी 70 प्रतिशत लोगों के घरों में पानी नहीं पहुंच पा रहा है. कई जगहों पर पाइप फटने के कारण कनेक्शन बंद हो चुका है. नल जल योजना के बाद गांवों में लगे अधिकांश चापाकल को विभाग उखाड़ ले गया और कुछ बचे चापाकल खराब स्थिति में पड़े हुए हैं. पहाड़ में यह हाल सिर्फ डुमरांवा पंचायत का ही नहीं है. बल्कि पूरा पहाड़ पानी को लेकर कराह रहा है. चैनपुर पंचायत के भुईफोर गांव के रहने वाले उमाशंकर सिंह ने बताया कि चैनपुरा पंचायत में भी पानी को लेकर हाहाकार मचा हुआ है. नल जल योजना से अधिकांश लोगों को पानी नहीं मिल पा रहा है. चापाकल भी जवाब दे रहे है. नदी, पोखर और चुओं के सूख जाने के कारण पानी की सबसे विकट समस्या पशुओं के सामने खड़ी हो गयी है. इन्सेट 50 फुट नीचे भूजल स्तर वाली पंचायतें क्रिटिकल जोन में शामिल प्रतिनिधि भभुआ. अधौरा प्रखंड के 50 फीट नीचे भूजल स्तर वाली पंचायतों को क्रिटिकल जोन में शामिल किया गया है. लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग द्वारा 15 जून 2024 को लिए गये भू जल स्तर के आंकड़ों के अनुसार अधौरा प्रखंड की डुमरांवा पंचायत में भू जल स्तर 64.7 फुट, दिघार पंचायत में 69.4 फुट, सड़की पंचायत में 58.6 फुट, बडवान कला में 57.3 फुट, रउता में 56.1 फुट, अधौरा में 51.04 तथा बभनी कला पंचायत में 51.9 फुट नीचे पाया गया है. जबकि लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के भू जल स्तर सर्वे के आंकड़ों के अनुसार जिले के चार प्रखंडों में भूजल स्तर 40 फीट से नीचे होने के कारण पेयजल समस्या की गंभीर घंटी बजा रहा है. इन प्रखंडों में अधौरा प्रखंड को औसत भू जल स्तर 48.5, भभुआ प्रखंड का औसत भे जल स्तर 45.6, नुआंव प्रखंड का औसत भू जल स्तर 40.0 तथा रामग़ढ प्रखंड का औसत भू जल स्तर 40.1 पाया गया है. इधर, इस संबंध में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के कार्यपालक अभियंता अमित कुमार ने बताया कि अधौरा के विभिन्न पंचायतों को क्रिटिकल जोन में शामिल किया गया है. यहां पर नल जल योजना की लगातार मानिटरिंग कराने के साथ साथ चापाकलों में राइजर पाइप लगाकर पेयजल सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है. जहां से नल जल योजना या चापाकलों के खराब होने की सूचना प्राप्त होती है वहां तत्काल धावा दल को भेज उसे ठीक कराया जाता है. उन्होंने बताया कि अधौरा प्रखंड सहित विभिन्न जगहों पर कुल नौ स्थलों पर टैंकर से भी पानी की आपूर्ति करायी जा रही है.

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