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Home बिहार कैमूर साइकिल व बाइक पर किसान सब्जी बेचने को मजबूर

साइकिल व बाइक पर किसान सब्जी बेचने को मजबूर

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साइकिल व बाइक पर किसान सब्जी बेचने को मजबूर

नुआंव. बाजार की मुख्य सड़क मोहनिया-बक्सर पथ पर पिछले 15 वर्षों से जान जोखिम में डालकर क्षेत्र के किसान सब्जी की दुकान लगाने को विवश हैं. ठंड के इस मौसम में घने कोहरे व बह रहे तेज शीतलहर के बीच किसान कब सड़क से गुजर रहे वाहन की चपेट में आ जायें, कहना मुश्किल है. किसानों की इस वेदना को लेकर ना तो जनप्रतिनिधि संज्ञान ले रहे, ना ही प्रशासनिक पदाधिकारी. ऐसे में क्षेत्र के किसान मेहनत से उपजाई गयी सब्जियों को मंडी के अभाव में बाइक व साइकिलों पर रखकर घंटों इंतजार के बाद औने-पौने दाम पर बाजार के दुकानदारों को बेच घर जाने को विवश हैं. प्रशासन द्वारा एक सब्जी मंडी का इंतजाम हो जाये तो गांव व बाजार के लोगों को सस्ते दामों पर सब्जियां मिल पाती. दरअसल, प्रखंड के लगभग एक दर्जन गांवों में सब्जी उपजाने वाले किसान लगभग 15 वर्षों से अहले सुबह खेतों से उपजाई गयी सब्जियों को साइकिल व बाइक पर रखकर बाजार की मुख्य सड़क जगदेव चौक आते हैं. मंडी के अभाव में किसान सब्जियों को साइकिल पर रख दो से तीन घंटे तक ग्राहक का इंतजार करते हैं. इधर, बाजार के दुकानदार लेट होने पर मजबूर किसानों की सब्जियों को औने-पौने दाम पर खरीदते हैं. धरातल पर नजर डालें तो सात गांव जैतपुरा, बराढी, महरथा, तियरा, सुरहा, अकोल्ही, पंजराव के दर्जनों किसान अपने खेतों से सब्जियां तोड़ कर बाइक व साइकिल पर लोड कर बाजार की मुख्य सड़क पर लगने वाली सब्जी मंडी में पहुंचते हैं. बाइक व साइकिलों पर लगने वाली मंडी दो से तीन घंटे तक चलती है, आखिर थक हारकर सामान को औने-पौने दामों पर बेचकर घर जाने को विवश होते हैं, जबकि किसानों से ली गयी सब्जियों को दुकानदार नुआंव के बाजार में ही अपनी दुकानों पर शाम तक दोगुने भाव पर ग्राहकों को बेचते है. किसान रवि शंकर,भोला सिंह, राम बिहारी, रामअवध की माने तो अगर उक्त बाजार में सब्जी मंडी होती, तो किसानों की सब्जियों के अच्छे दाम मिलते वहीं ग्राहकों को भी इसका सीधा लाभ मिलता. उक्त संबंध में पंचायत की मुखिया पुष्पा देवी ने कहा बाजार की सब्जी मंडी के लिए जगह की तलाश कर प्रखंड विकास पदाधिकारी से बात कर इस पर पहल की जायेगी.

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