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Home बिहार कैमूर दिन-रात बेखौफ होकर किसान जला रहे पुआल, कार्रवाई का नहीं है डर

दिन-रात बेखौफ होकर किसान जला रहे पुआल, कार्रवाई का नहीं है डर

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दिन-रात बेखौफ होकर किसान जला रहे पुआल, कार्रवाई का नहीं है डर
सांकेतिक तस्वीर

प्रदेश में बढ़ रहे प्रदूषण को लेकर खेतों में धान के डंठल( पराली) जलाने पर है रोक

पकड़े जाने पर किसान का रजिस्ट्रेशन हो सकता है रद्द, नहीं मिलेंगी सरकारी सुविधाएं

फोटो 4 खेतों में जलाये गये धान के डंठळ

प्रतिनिधि,रामपुर.

प्रखंड क्षेत्र के गांवों में शाम तो शाम दिन में भी बेखौफ हो किसान धान की पराली( पुआल) जला रहे. जबकि प्रदेश में बढ़ रहे प्रदूषण को लेकर खेतों में धान के डंठल जलाने पर रोक लगायी गयी है. ऐसे किसानों पर सरकार कानूनी कार्रवाई भी कर रही है. साथ ही इसे लेकर जिला प्रशासन व कृषि विभाग स्तर से लगातार किसानों को जागरूक करने का काम भी किया जा रहा है. लेकिन, क्षेत्र के किसान अभी भी इस पर अमल नहीं कर रहे हैं. प्रत्येक दिन किसी न किसी गांव के बधार में दिन हो या रात वातावरण में धुआं दिखाई दे रहा है. खेतों के बगल से होकर गुजरने वाला प्रशासन भी खेत में डंठल जलता देख बेखबर बना हुआ है. धान के डंठल जलाने से उठने वाले धुएं से प्रदूषण फैल रहा. वहीं आग की चपेट में दूसरे किसानों के खेत में लगी फसल जलने व अगलगी का खतरा भी बना रहता हैं. इससे खेतों की नमी व उर्वरा शक्ति भी समाप्त हो रही है. कई बार बधार में लगायी गयी आग गांव के नजदीक तक चला आ रहा है, जिससे गांव में भी आग लगने का भय बना रहता है.

प्रशासनिक कार्रवाई की जानकारी के बाद भी किसान डंठल जला रहे

खजुरा, विछिया, कुर्था, सबार, मझियांव, बड़कागांव, दड़वा, गम्हरिया, बाघी, बेलांवए निरविसपुरए बसुहारी, भीतरीबांध अमांव सहित लगभग दर्जनों गांवों में ठंडल जलाये जा रहे हैं. विभाग की मानें तो पिछले साल कुछ किसानों का रजिस्ट्रेशन बंद कर दिया गया था. लेकिन , प्रशासनिक कार्रवाई की जानकारी होने के बाद भी किसान डंठल जलाने से बाज नहीं आ रहे है.बता दें कि प्रखंड में धान की कटनी हो रही है. यदि प्रशासन कोई ठोस कार्रवाई नहीं करती है, तो किसान इसी तरह पराली जलाते रहेंगे. ऐसे में जिला प्रशासन का किसानों को जागरूक कर पराली जलाने पर रोक लगाने का प्रयास भी असफल होता दिख रहा है.

क्या कहते हैं कृषि समन्वयक

इस संबंध में कृषि समन्वयक प्रवीण कुमार से संपर्क करने पर बताया कि पटना कृषि विभाग से फायर प्वाइंट से जानकारी प्राप्त कर जिला कृषि कार्यालय को सूची जारी होती है. जिसके बाद यह सूची प्रखंड कृषि कार्यालय आती है. इसके बाद सूची के आधार पर ऐसे किसानों को चिह्नित कर उनका किसान रजिस्ट्रेशन बंद कर दिया जायेगा. साथ ही तीन साल तक कृषि संबंधित सरकार की किसी भी योजना का लाभ उक्त किसान को नहीं दिया जायेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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