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Home बिहार कैमूर मध्यांतर में शिक्षकों को सड़क पर खड़े होकर करनी पड़ती है बच्चों की निगरानी

मध्यांतर में शिक्षकों को सड़क पर खड़े होकर करनी पड़ती है बच्चों की निगरानी

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मध्यांतर में शिक्षकों को सड़क पर खड़े होकर करनी पड़ती है बच्चों की निगरानी

– 65 वर्ष बाद भी बिछियां विद्यालय में नहीं बन सकी बाउंड्रीवॉल, हादसे का डर -बाउंड्रीवॉल के लिए दर्जनों बार विभाग को लिखा गया पत्र, अब तक नहीं हुई कोई पहल नशेड़ियों का अड्डा व आवारा पशुओं का बसेरा बना स्कूल, मुख्य सड़क के किनारे होने से हादसे का डर रामपुर. प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत पसाई पंचायत के बिछियां गांव में सरकार द्वारा वर्ष 1960 से विद्यालय संचालित किया जा रहा है. पहले यहां प्राथमिक विद्यालय व उसके बाद उत्क्रमित मध्य विद्यालय बिछियां के नाम से इसका संचालन हो रहा है. इस विद्यालय में कुल सात कमरे हैं. वर्तमान में वर्ग एक व दो के बच्चों को एक कमरे में तथा वर्ग सात व आठ के छात्र-छात्राओं को एक ही कमरे में बैठाया जाता है. वहीं, वर्ग चार, पांच व छह के बच्चों के लिए अलग-अलग कमरों में कक्षा का संचालन किया जाता है. विद्यालय में छह शिक्षक-शिक्षिकाएं हैं, जबकि कक्षा एक से आठ तक कुल 100 छात्र-छात्रा नामांकित हैं. विद्यालय के एचएम गुफरान अली ने बताया कि इस विद्यालय की स्थापना वर्ष 1960 में हुई थी. इस प्रकार यहां विद्यालय को संचालित होते 65 वर्ष हो गये, लेकिन अब तक विद्यालय की अपनी बाउंड्रीवॉल नहीं बन सकी है. इस स्थिति में विद्यालय बंद होने के दौरान बधार में स्थित विद्यालय परिसर गंजेड़ी, शराबी व उचक्कों का अड्डा बना रहता है. रात में यहां आवारा पशुओं का बसेरा रहता है. इसके अलावा विद्यालय के बगल से ही मुख्य सड़क गुजरी है, जो प्रखंड पसाई, बिछिया, कुर्था, खजुरा, मझियाव सहित दर्जनों गांवों को जोड़ते हुए प्रखंड मुख्यालय व बेलांब भगवानपुर को जाती है. सड़क पर सैकड़ों वाहनों का आना-जाना लगा रहता है, जिससे कभी भी बच्चों के साथ अप्रिय घटना से इनकार नहीं किया जा सकता. विद्यालय का मध्यांतर (लंच) होते ही बच्चे सड़क तक आ जाते हैं या खेलने के दौरान सड़क की ओर दौड़ लगा देते हैं. बाउंड्री विहीन विद्यालय होने के कारण शिक्षकों को सड़क पर खड़े होकर बच्चों की निगरानी करनी पड़ती है. एचएम ने गुरुवार को बताया कि बाउंड्रीवॉल के लिए उनके व पूर्व के एचएम द्वारा दर्जनों बार विभाग को पत्र लिखकर सूचित किया गया, लेकिन अब तक कोई पहल नहीं हो सकी है. परिसर को हरा-भरा बनाने के लिए हर वर्ष पौधे लगाये जाते हैं, लेकिन बाउंड्री नहीं होने से पशु उन्हें नष्ट कर देते हैं. एचएम ने यह भी बताया कि अब तक कई छात्राएं दुर्घटना का शिकार हो चुकी हैं. यदि भविष्य में बच्चों के साथ कोई बड़ी अनहोनी होती है, तो इसकी जवाबदेही विभाग व प्रशासन की होगी.

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