चंद्रग्रहण व भद्रा की वजह से दो को होलिका दहन और चार को मनेगी होली

तीन मार्च को चंद्रग्रहण लगने के चलते दो मार्च को ही देर रात होगा होलिका दहन

By VIKASH KUMAR | February 23, 2026 3:23 PM

फोटो 1 = दो मार्च को रात 12.50 से लेकर सुबह 4.30 तक रहेगा होलिका दहन का शुभ मुहूर्त = तीन मार्च को चंद्रग्रहण लगने के चलते दो मार्च को ही देर रात होगा होलिका दहन भभुआ सदर. हिंदू धर्म में दीपावली के बाद होली का त्योहार सबसे बड़ा पर्व माना जाता है. पंचांग के अनुसार, फाल्गुन पूर्णिमा को प्रदोष काल में होलिका दहन होता है और उसके अगले दिन यानी चैत्र कृष्ण प्रतिपदा को होली खेली जाती है. रंगों के त्योहार होली में लोग एक दूसरे को रंग, अबीर, गुलाल लगाते हैं और बधाई व शुभकामनाएं देते हैं. इस बार भद्रा नक्षत्र और चंद्रग्रहण के चलते दो मार्च को होलिका दहन और चार मार्च को होली का त्योहार मनाया जायेगा. होली के पर्व को लेकर ज्योतिषविद पंडित हरीशंकर तिवारी ने बताया कि फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा तिथि दो मार्च की शाम 5:55 बजे से शुरू होकर तीन मार्च की शाम 05:07 बजे तक रहेगी. पूर्णिमा के साथ ही भद्रा काल भी लगेगा. साल पहला चंद्रग्रहण भी तीन मार्च को दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर शुरू होगा और यह ग्रहण 6 बजकर 47 मिनट पर समाप्त होगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भद्रा रहित, प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा तिथि को होलिका दहन के लिए उत्तम माना जाता है. इधर ग्रहण से भी लगभग नौ घंटे पहले सूतक काल आरंभ हो जाता है. सूतक काल के दौरान शुभ कार्य, पूजा-पाठ और उत्सव करना उचित नहीं माना गया है. यही कारण है कि इस बार तीन मार्च को रंगों का उत्सव न मनाकर चार मार्च को होली खेलना शास्त्रों के अनुसार सही माना गया है. उन्होंने बताया कि इस बार होलिका दहन का शुभ समय दो मार्च, सोमवार को रात 12:30 बजे से सुबह में 04:00 बजे तक रहने वाला है. = होलिका दहन की तैयारी हुई शुरू इधर, जिले भर में होलिका दहन के लिए लगभग एक महीने पहले से ही तैयारियां शुरू कर दी जाती हैं. कांटेदार झाड़ियों या लकड़ियों को इकट्ठा किया जाता है, फिर होली वाले दिन शुभ मुहूर्त में होलिका दहन किया जाता है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार होलिका दहन में गाय के गोबर से बने कंडे और कुछ चुने हुए पेड़ों की लकड़ियों को ही जलाना चाहिए, क्योंकि धार्मिक दृष्टि से भी पेड़ों पर किसी न किसी देवता का आधिपत्य होता है. इस बार दो मार्च को मनाये जाने वाले होलिका दहन के लिए जगह जगह लकड़ी आदि को इकट्टा कर अभी से तैयारी कर शुरू कर दी गयी है. = 27 फरवरी को रंगभरी एकादशी इधर, होली से पूर्व 27 फरवरी को रंगभरी एकादशी का पर्व मनाया जायेगा. इस दिन श्रद्धालु भगवान शिव व विष्णु पर रंग-गुलाल चढ़ा जीवन में खुशहाली की कामना मांगेंगे. ऐसी मान्यता है कि रंगभरी एकादशी के दिन सहस्त्रानाम पाठ के साथ शिवलिंग पर गुलाल और भगवान विष्णु पर तुलसी व गुलाल चढ़ाने से विशेष फल मिलता है. साथ ही भगवान का इस दिन विशेष शृंगार किया जाता है. पंचांग के मुताबिक इस बार फाल्गुन माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 27 फरवरी की रात 12:33 बजे से शुरू होगी और उसी दिन रात 10:32 बजे तक रहेगी.