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Home बिहार कैमूर 68.41 लाख खर्च के बाद भी वितरणी का दुर्गावती नदी में नहीं हुआ विलय

68.41 लाख खर्च के बाद भी वितरणी का दुर्गावती नदी में नहीं हुआ विलय

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68.41 लाख खर्च के बाद भी वितरणी का दुर्गावती नदी में नहीं हुआ विलय

मोहनिया सदर. दुर्गावती मुख्य नहर से अधवार फाल के समीप से निकलने वाली 07.30 किमी लंबी अधवार-भोखरी वितरणी दुर्गावती नदी में विलय होने से लगभग तीन किलोमीटर पहले ही दियां गांव से उत्तर तरफ विलुप्त हो जाती है. कारण यह है कि निचले भाग के किसानों ने अपनी खेतों से होकर वितरणी को आगे ले जाने नहीं दिया था. इतना ही नहीं खरीफ फसलों के समय तो इस वितरणी से खेतों को पानी मिल जाता है, लेकिन रबी फसल की बुआई के बाद वितरणी में पानी छोड़ने को लेकर भी रस्साकशी का खेल शुरु हो जाता है. जिन किसानों ने अपने खेतों से होकर वितरणी को नहीं निकलने दिया, वे वितरणी में पानी नहीं छोड़ने के लिए विभागीय अधिकारियों पर दबाव डालते है, तो ऊपर के किसान वितरणी में पानी छोड़ने की मांग करते हैं. वितरणी में पानी छोड़ने व नहीं छोड़ने की रस्साकशी के बीच जहां विभाग के अधिकारियों की फजीहत होती है, वहीं उक्त वितरणी से जुड़े 17 गांवों के सैकड़ों किसान भी इससे बुरी तरह प्रभावित होते हैं. वितरणी के विलुप्त होने से वहां से खेतों से होकर वितरणी का पानी किसी तरह दुर्गावती नदी में गिर जाता है, लेकिन ऐसा सिर्फ खरीफ फसल के समय ही होता है, जबकि रबी की फसल के समय तो नहर विभाग के अधिकारियों पर इतना दबाव रहता है कि उनकी समझ में खुद ही नहीं आता है कि कितनी मात्रा में पानी वितरणी में छोड़ा जाये कि निचले क्षेत्र के उन किसानों के खेतों तक पानी नहीं पहुंचे, जो वितरणी में पानी का छोड़े जाना पसंद नहीं करते हैं. वितरणी के आगे जंगल की तरह ऊगी है झाड़ियां अधवार-भोखरी वितरणी जिस स्थान पर फाइलों में विलुप्त हो जाती है, उससे आगे इसमें जंगल की तरह झाड़ियां ऊगी हुई है, जहां उक्त दूरी के बीच पुनर्स्थापन कार्य के लिए वित्तीय वर्ष 2023-24 में 68.41 लाख रुपये खर्च किये गये हैं. उक्त वितरणी से अधवार, बघिनी, अहिनौरा, टिकैतपुर, सरहुला, हरनाथपुर, चोरडिहरा, तुर्कवलियां, मनकेवटियां, खझरा, केशवपुर, भलुही, गौरा, भोखरी, खुर्दगौरा, सराय, दियां गांवों के हजारों एकड़ खेतों की सिंचाई होती है. # वितरणी के पुनर्स्थापन पर दो योजनाओं की राशि खर्च अधवार-भोखरी वितरणी के पुनर्स्थापन पर जहां वित्तीय वर्ष 2023-24 में टेंडर के माध्यम से जल संसाधन विभाग द्वारा 68.41 लाख रुपये खर्च किया गया है. जबकि, इस वित्तीय वर्ष में भी भोखरी पंचायत में मनरेगा द्वारा इसी वितरणी को बाहा बता कर सफाई के नाम पर चार लाख से अधिक राशि का भुगतान कर दिया गया है. हालांकि, इस मामले में जिलाधिकारी को आवेदन देकर जांच की मांग की गयी है, जिसमें डीएम द्वारा दो सदस्यीय जांच टीम का गठन पर मामले की जांच कर रिपोर्ट मांगी गयी है. इससे पहले इसी मामले में मनरेगा के लोकपाल को भी आवेदन दिया गया था, लेकिन सभी ने मिलकर इस मामले को रफा-दफा कर दिया और इसके दोषियों को क्लीन चिट दे दिया था. हालांकि, इस बार शिकायतकर्ता द्वारा शपथ पत्र के साथ जिलाधिकारी को आवेदन दिया गया है. इस मामले में जांच भी की जा चुकी है. वहीं, अगर इस मामले की निष्पक्ष जांच कर रिपोर्ट डीएम को सौंपी गयी, तो मनरेगा के कुछ कर्मियों का गला फंसना तय माना जा रहा है. # बोले जेइ इस संबंध में पूछे जाने पर नहर विभाग के जेइ रामाशंकर सिंह ने बताया कि अधवार-भोखरी वितरणी के पुनर्स्थापन कार्य जल संसाधन विभाग द्वारा टेंडर निकालकर कराया गया है. भोखरी के समीप मनरेगा द्वारा भी वितरणी की सफाई का कार्य नाम मात्र का कराया गया था. जहां निचले क्षेत्र के कुछ किसानों द्वारा अपनी खेत में वितरणी की खुदाई करने ही नहीं दिया था, जिससे नदी में मिलने से लगभग तीन किलोमीटर पहले ही वितरणी विलुप्त हो जाती है. सबसे ज्यादा परेशानी रबी फसल के समय होता है, उस समय कुछ किसान सीधे ऊपर के अधिकारियों को फोन कर वितरणी में पानी नहीं छोड़ने की मांग करते है, तो कुछ किसान वितरणी में पानी छोड़े जाने की मांग करते हैं. इसको लेकर हम लोग भी काफी पशोपेश में रहते हैं कि आखिर वितरणी में कितनी मात्रा में पानी छोड़ा जाये, यह तय करना काफी मुश्किल हो जाता है.

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