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Home बिहार कैमूर वितरणी में नाले की तरह खुदाई, पानी हो रहा ओवरफ्लो

वितरणी में नाले की तरह खुदाई, पानी हो रहा ओवरफ्लो

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वितरणी में नाले की तरह खुदाई, पानी हो रहा ओवरफ्लो

मोहनिया सदर. दुर्गावती मुख्य नहर से निकलने वाली वितरणियों के पुनर्स्थापन कार्य में जल संसाधन विभाग के कुछ अधिकारियों व ठेकेदारों द्वारा बड़े पैमाने पर अनियमितता बरती गयी है. जल संसाधन विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2023-24 में दुर्गावती मुख्य नहर व इससे निकलने वाली 10 वितरणियों के मेंटेनेंस पर करोड़ों रुपये खर्च किया गया है. यदि बहदुरा के समीप दुर्गावती मुख्य नहर से निकलने वाली लक्ष्मीपुर वितरणी की बात करें, तो इसके उद्गम स्थल से इसके टेल प्वाइंट चौरसिया तक इसकी लंबाई 06.22 किलोमीटर के पुनर्स्थापन कार्य पर 60 लाख 4000 रुपये खर्च किये गये है, जहां पुनर्स्थापन के नाम पर बड़े पैमाने पर योजना में लूट-खसोट किया गया है, जिसकी वजह से किसानों की समस्याएं कम होने की बजाय और अधिक बढ़ गयी हैं. जबकि, उक्त वितरणी के पुनर्स्थापन कार्य पर प्रति किलोमीटर 965273 रुपये खर्च किया गया है. इतना ही नहीं विभाग द्वारा खर्च की गयी राशि का 50 प्रतिशत भुगतान भी ठेकेदार को कर दिया गया है. नहर की सफाई के दौरान जेसीबी के बकेट की चौड़ाई के बराबर ही उक्त वितरणी के बीच वाले भाग में नाले की तरह खुदाई कर उसकी मिट्टी से वितरणी के दोनों किनारों का मेंटेनेंस किया गया है. इस तरह यदि देखा जाये तो वितरणी के पुनर्स्थापन के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति कर लाखों रुपये डकार गये हैं. #वितरणी में पर्याप्त पानी छोड़े जाने पर टूट रहा तटबंध यदि उस क्षेत्र के किसानों की मानें तो उक्त वितरणी की जितनी चौड़ाई है, उतनी सफाई जेसीबी से नहीं की गयी है बल्कि वितरणी के बीच भाग की मिट्टी को निकाल कर वितरणी की बैंक पर रख दिया गया है, जिसका नतीजा है कि वितरणी की चौड़ाई बीच की गहराई के हिसाब से काफी कम हो गयी है और वितरणी में पर्याप्त मात्रा में पानी छोड़े जाने पर पानी ओवरफ्लो होकर कई जगहों पर तटबंध के ऊपर से बह रहा है. इसकी वजह से अहिनौरा के समीप उक्त वितरणी का तटबंध भी क्षतिग्रस्त हो गया है. इतना ही नहीं अभी जुलाई महीने में ही वितरणी के पुनर्स्थापन कार्य को अंतिम रूप दिया गया है, इसके बावजूद कुछ स्थानों पर वितरणी में बड़ी झाड़ीनुमा घास को देखा जा सकता है. # क्या कहते हैं किसान – तुर्कवलियां के किसान मनोज सिंह शेरा कहते हैं कि लक्ष्मीपुर वितरणी के पुनर्स्थापन की आड़ में योजना को सिर्फ लूट लिया गया है. वितरणी की चौड़ाई लगभग 10 फीट है, लेकिन पुनर्स्थापन के नाम पर वितरणी के बीच वाले भाग की लगभग दो फुट चौड़ाई में जेसीबी के बकेट बराबर मिट्टी लंबाई में निकाल कर उसे नाला की तरह बना दिया गया है, जिसका परिणाम है कि मानो वितरणी की चौड़ाई सिकुड़ कर दो फुट में हो गयी है और पर्याप्त मात्रा में पानी छोड़े जाने पर कई स्थानों पर ओवरफ्लो होकर तटबंध के ऊपर से पानी बहने लगता है. इसकी वजह से अहिनौरा के समीप वितरणी का तटबंध भी क्षतिग्रस्त हो गया है. हम वितरणी की देखरेख के लिए गठित समिति के उपाध्यक्ष हैं, लेकिन हम लोगों को इसके पुनर्स्थापन की कोई सूचना नहीं दी गयी. रात के समय जेसीबी लगाकर जैसे-तैसे मेंटनेंस कार्य करा कर कोरम पूरा किया गया है. बाहर से मिट्टी लाकर तटबंध का मेंटनेंस करना था, लेकिन ठेकेदार ने वितरणी के बीच भाग की मिट्टी निकलवा कर तटबंध का मेंटनेंस करवा दिया है. – अहिनौरा के किसान अमितेश कुमार सिंह कहते है कि लक्ष्मीपुर वितरणी की लड़ाई 6.22 किमी के मेंटनेंस की प्राक्किलत राशि 6004000 रुपये है, इस तरह प्रति किमी पर खर्च 9,65,273 रुपये आता है. यदि ईमानदारी से इस वितरणी का पुनर्स्थापन कार्य किया गया होता तो यह नाला नहीं वितरणी होती. इसके बीच वाले हिस्सा की मिट्टी लगभग दो फुट की चौड़ाई में खुदाई करा वितरणी के बैंक का मेंटनेंस किया गया है, जितनी चौड़ी वितरणी है उसकी पूरी सफाई करायी ही नही गयी है. इसकी वजह से कई स्थानों पर पानी ओवरफ्लो हो रहा है. हमारे गांव के समीप तटबंध क्षतिग्रस्त होकर टूट रहा है. पुनर्स्थापन के नाम पर खिलवाड़ कर विभाग के अधिकारी व ठेकेदार ने योजना को भ्रष्टाचार की बली चढ़ा दिया है. भले ही इसके पुनर्स्थापन पर लाखों रुपये पानी की तरह बहा दिया गया है, लेकिन इसका फायदा किसानों को नहीं मिल रहा है. अधिकारी और ठेकेदार का बैंक बैलेंस भले बढ़ गया है. – अहिनौरा के किसान बसावन कहार कहते है कि लक्ष्मीपुर वितरणी के पुनर्स्थापन के नाम पर भले बहुत रुपये खर्च किया गया है. लेकिन, इसका सही फायदा हम किसानों को नहीं मिल रहा है. वितरणी की खुदाई नाले की तरह की गयी है. पानी वितरणी से बाहर बहने लगता है, जिससे बैक भी खराब हो गया है. # बोले जेइ इस संबंध में पूछे जाने पर विभाग के जेइ रामाशंकर सिंह ने कहा कि लक्ष्मीपुर वितरणी के पुनर्स्थापन का कार्य अच्छी तरह से कराया गया है. किसान जैसा बता रहे हैं वैसा तो नहीं होना चाहिए. उसका मेंटनेंस कार्य पूर्ण हो चुका है. लागत का 50 प्रतिशत राशि का ही भुगतान ठेकेदार को किया गया है.

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