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Home बिहार कैमूर Kaimur News : रात की निशा पूजा को लेकर दिन से उमड़ने लगे श्रद्धालु

Kaimur News : रात की निशा पूजा को लेकर दिन से उमड़ने लगे श्रद्धालु

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Kaimur News : रात की निशा पूजा को लेकर दिन से उमड़ने लगे श्रद्धालु
सांकेतिक तस्वीर

भभुआ-भगवानपुर. सूबे का विख्यात और प्राचीन शक्ति पीठों में शामिल जिले के भगवानपुर प्रखंड के पवरा पहाड़ी पर स्थित मां मुंडेश्वरी भवानी के निशा पूजन में दर्शन के लिए शनिवार को रात भर माता रानी के दरबार को सजाये पवरा पहाड़ी का त्रिकूट पर्वत रात भर गहगहाता रहा. मध्य रात्रि को होने वाली इस निशा पूजा के लिए सूबे सहित अन्य जगहों से आये श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा था. श्रद्धालु मां की आरती और घंटे की आवाज का बेसब्री से इंतजार करते हुए दरबार परिसर में जमे थे. गौरतलब है कि निशा पूजा एक खास पूजा होती है. निशा पूजा के दिन मां का दरबार 24 घंटे के लिए खुला रहता है. जिला मुख्यालय से जाने वाली हर सड़क पर मां की जयकारे की आवाज गूंजती हुई पवरा पहाड़ी 630 फुट ऊपर माता के दरबार तक पहुंच जाती है. मंदिर को विशेष फूलों से आकर्षक रूप से सजाया गया था और मां मुंडेश्वरी प्रतिमा की भव्य शृंगार पुजारियों द्वारा की गयी थी. जैसे ही मध्य रात्रि को निशा पूजा आरंभ हई पूरी पवरा पहाड़ी माता रानी के जयकारे से गूंजने लगी. निशा पूजा के समापन के बाद मां का आशीर्वाद ले श्रद्धालुओं के लौटने के सिलसिला रात्रि के तीसरे पहर से शुरू हो गया था. चैत्र नवरात्र के अष्टमी के दोपहर करीब दो बजे तक माता मुंडेश्वरी धाम पहुंचकर महाशक्ति की आठवीं स्वरूप का दर्शन-पूजन कर चुके थे, वहीं यह सिलसिला खबर लिखे जाने तक जारी भी था. उम्मीद की जा रही था कि संध्या की आरती तक यह आंकड़ा रिकॉर्ड दो लाख के पार पहुंच सकता है. इस मामले की जानकारी देते हुए धार्मिक न्यास के अकाउंटेंट गोपाल कृष्ण ने बताया कि मुंडेश्वरी धाम में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की आज की भीड़ मौजूदा नवरात्र की सारी रिकॉर्ड तोड़ चुकी है, पिछले वर्ष के चैत्र नवरात्र के अष्टमी को भी कुछ दर्शनार्थियों की भीड़ कुछ इसी कदर माता रानी के इस पावन धाम में जुटी देख गयी थी, तब यह भीड़ संध्या की आरती तक करीब दो लाख के जादुई आंकड़े को पार कर गयी थी. उन्होंने बताया कि आज अष्टमी को भी माता आदिशक्ति मुंडेश्वरी धाम में दर्शनार्थियों की भीड़ कुछ इसी तरह उमड़ती हुई देखी जा रही है, दोपहर में श्रद्धालुओं की मंदिर परिसर में लंबी कतारें लगने के साथ-साथ परिसर के करीब तमाम हिस्से श्रद्धालुओं की भीड़ से खचाखच भरी नजर आयी. इसके आधार पर संध्या आरती तक दर्शनार्थियों की संख्या दो लाख से पार पहुंचना तय माना जा रहा था. इधर, धार्मिक न्यास के सचिव अशोक कुमार सिंह के नेतृत्व में जगत जननी मुंडेश्वरी के इस पवित्र धाम में प्रत्येक चैत्र नवरात्र की अष्टमी तिथि की रात को परंपरागत रूप से आयोजित होने वाली निशा पूजा की तैयारी जारी थी, मंदिर व धाम के विभिन्न हिस्सों को तरह-तरह के खूबसूरत फूलों व विभिन्न प्रकार की लाइटों के माध्यम से सजाया जा रहा था, साथ ही दर्शनार्थियों की सुविधा तथा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये जा रहे थे. अष्टमी तिथि के दिन में माता महागौरी के दर्शन-पूजन करने के लिए मुंडेश्वरी धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं में हजारों श्रद्धालु ऐसे थे, जो दिवा में माता का दर्शन-पूजन करने के बाद रात के 12 बजे से आयोजित होने वाली ऐतिहासिक निशा पूजा में शामिल होना चाहते थे. इसके लिए वे न्यास कर्मियों से निशा पूजा की प्रक्रिया की जानकारी हासिल करने के साथ-साथ उस घड़ी का बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहे थे, तब तक समय काटने के लिए मंदिर परिसर में आराम फरमाने के साथ-साथ वे सभी अपने अलग-अलग जत्थे के साथ धाम के बाजार में घूमने के साथ मुंडेश्वरी के इको पार्क में घूमने के लुत्फ भी उठाते देखे गये. मंदिर को सजाने के लिए कोलकाता से आयी 40 कारीगरों की टीम धार्मिक न्यास के नेतृत्व में अष्टमी की रात आयोजित होने वाली निशा पूजा को लेकर मुंडेश्वरी धाम तथा उससे संबंधित हिस्सों को सजाने की तैयारी खबर लिखे जाने तक जारी थी. फूलों तथा उनसे पिरोए गये मालाओं से धाम को सजाने में कोलकाता के कुल 40 कारीगरों की टीम काम कर रही थी. इसके लिए कोलकाता, दिल्ली व वाराणसी के साथ-साथ विदेशों से विभिन्न प्रजातियों के खूबसूरत व सुगंधित पुष्पों को मंगवाया गया था. इनमें कुछ ऐसे दुर्लभ प्रजाति के पुष्प थे, जो कि काफी आकर्षक व मनमोहक थे, जो कि हवाओं में अपनी महक घोलकर धाम में पहुंचे दर्शनार्थियों व ड्यूटी में तैनात कर्मियों को खुद की ओर खींचने पर विवश कर रहे थे. बताया जाता है कि पिछले कई वर्षों से चैत्र नवरात्र के अष्टमी तिथि को आयोजित होने वाली इस अद्भुत व विलक्षण निशा पूजा को लेकर स्थानीय प्रखंड के उमापुर गांव निवासी एक दूबे फैमिली द्वारा लाखों रूपये खर्च कर देशी-विदेशी पुष्पों को देश के अलग-अलग प्रांतों के साथ-साथ अलग-अलग मुल्कों से लुभावन व सम्मोहक पुष्पों को मंगवाया जाता रहा है. वहीं, कोलकाता से माता महामाया के इस पवित्र थाम में सजावट के लिए पहुंची जिन आला दर्जे की कलाकारों की टीम पहुंचती है, उनकी श्रम की भी खर्च दूबे फैमिली ही उठाती है.

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