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एक जनवरी से अंचलों में ऑनलाइन मिलेगी भूमि दस्तावेजों की नकल

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एक जनवरी से अंचलों में ऑनलाइन मिलेगी भूमि दस्तावेजों की नकल

# भू-अभिलेख पोर्टल से ऑनलाइन भुगतान के बाद घर बैठे डाउनलोड कर सकेंगे दस्तावेज # 31 दिसंबर से चिरकुट फाॅर्म के माध्यम से नकल व्यवस्था समाप्त खतियान व जमाबंदी अब घर बैठे होंगे डाउनलोड, भ्रष्टाचार पर लगेगा अंकुश भूमि से जुड़े कार्यों में पारदर्शिता, सरलता व सुविधा बढ़ेगी, दलालों की भूमिका समाप्त प्रभात खास मोहनिया शहर. नये वर्ष की शुरुआत के साथ ही जिले के सभी अंचलों में भूमि से संबंधित दस्तावेजों की नकल प्राप्त करने की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन हो जायेगी. सरकार के ताजा निर्देश के अनुसार अब खतियान, जमाबंदी सहित अन्य भू-अभिलेखों की नकल के लिए लोगों को अंचल कार्यालयों का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा. इस संबंध में विभाग द्वारा सभी अंचलाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भेज दिये गये हैं. एक जनवरी से निर्धारित ऑनलाइन शुल्क जमा कर सरकार द्वारा संचालित भू-अभिलेख पोर्टल के माध्यम से लोग घर बैठे ही आवश्यक भूमि दस्तावेज डाउनलोड कर सकेंगे. अब तक अंचल कार्यालयों में चिरकुट फॉर्म के माध्यम से नकल उपलब्ध करायी जाती थी, लेकिन इस व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि 31 दिसंबर के बाद चिरकुट फाॅर्म से किसी भी प्रकार की नकल जारी नहीं की जायेगी. इसके बाद जिले के किसी भी अंचल में ऑफलाइन नकल की सुविधा उपलब्ध नहीं रहेगी. प्रशासन का मानना है कि एक जनवरी से लागू होने जा रही यह ऑनलाइन नकल व्यवस्था डिजिटल सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. इससे भूमि से जुड़े कार्यों में पारदर्शिता, सरलता व सुविधा बढ़ेगी. खासकर किसानों व ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को इससे बड़ी राहत मिलेगी. वहीं, ऑनलाइन प्रणाली लागू होने से दलालों की भूमिका समाप्त हो जायेगी व भ्रष्टाचार की संभावना पर भी प्रभावी रूप से अंकुश लगेगा. नयी व्यवस्था के तहत भू-अभिलेख पोर्टल पर जिले के सभी अंचलों का रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा. पोर्टल के माध्यम से लोग अपनी आवश्यकता के अनुसार खतियान, जमाबंदी, भूमि स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज, खेसरा व प्लॉट से संबंधित विवरण आसानी से देख व डाउनलोड कर सकेंगे. इसके लिए आवेदक को पहले ऑनलाइन आवेदन करना होगा, जिसके बाद निर्धारित शुल्क का भुगतान डिजिटल माध्यम से किया जायेगा. भुगतान पूरा होते ही संबंधित दस्तावेज पीडीएफ फॉर्मेट में उपलब्ध हो जायेगा, जिसे डाउनलोड या प्रिंट किया जा सकेगा. नयी व्यवस्था से नहीं लगाना होगा अंचल कार्यालय का चक्कर नयी प्रणाली से किसानों व आम नागरिकों को सबसे अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है. अब तक नकल प्राप्त करने के लिए अंचल कार्यालय जाना, आवेदन देना व कई दिनों तक प्रतीक्षा करना आम बात थी. नयी व्यवस्था लागू होने के बाद लोग अपने मोबाइल या कंप्यूटर से घर बैठे ही भूमि से संबंधित आवश्यक दस्तावेज प्राप्त कर सकेंगे. इससे समय व धन दोनों की बचत होगी. प्रशासनिक स्तर पर भी इस व्यवस्था से कामकाज में तेजी आयेगी. जहां पहले नकल जारी करने में कई दिन लग जाते थे, वहीं अब कुछ ही मिनटों में दस्तावेज उपलब्ध हो सकेंगे. इससे अंचल कार्यालयों पर कार्यभार कम होगा व कर्मचारियों को अन्य महत्वपूर्ण कार्यों के लिए अधिक समय मिल सकेगा. पहले नकल लेने की क्या थी व्यवस्था पहले अंचल कार्यालय में चिरकुट फॉर्म के माध्यम से आवेदन करना पड़ता था. आवेदन के बाद कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता था व बार-बार कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ता था. अभिलेखागार में दस्तावेज उपलब्ध होने पर ही नकल मिलती थी, जिसमें खोजबीन में भी काफी समय लगता था व आम लोगों को काफी परेशानी होती थी. अब नकल लेने का नया नियम नयी व्यवस्था के अनुसार आवेदक को भू-अभिलेख पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा. इसके बाद डिजिटल माध्यम से शुल्क का भुगतान किया जायेगा. भुगतान होते ही संबंधित दस्तावेज पीडीएफ फॉर्मेट में ऑनलाइन उपलब्ध हो जायेंगे, जिन्हें घर बैठे डाउनलोड किया जा सकेगा. क्या कहते हैं कुदरा सीओ इस संबंध में कुदरा अंचल के प्रभारी सीओ नारायण कुमार ने बताया कि 31 दिसंबर के बाद चिरकुट फाॅर्म से नकल प्राप्त करने की व्यवस्था बंद हो जायेगी. अब लोगों को भू-अभिलेख पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन के बाद भुगतान कर आवश्यक दस्तावेज डाउनलोड करने होंगे. एक जनवरी से ऑनलाइन ही नकल प्राप्त होने लगेगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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