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अंजान व्यक्ति को ओटीपी व आधार नंबर देने से बचें

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अंजान व्यक्ति को ओटीपी व आधार नंबर देने से बचें

भभुआ सदर. देश में साइबर क्राइम का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है और लोग आये दिन साइबर ठगों के शिकार हो रहे हैं. साइबर ठग सालाना करोड़ों से अधिक की चपत खाताधारकों को लगा रहे हैं. अधिकतर मामलों में पुराने पोपुलर तरीके से ही ठगी किये जाने की बात सामने आती है और जब तक लोगों को अपनी गलती का अहसास होता है, तब तक उनकी गाढ़ी कमाई साइबर ठगों के पास पहुंच चुकी होती है. इसमें कम पढ़े लिखे लोगों के अलावा अधिकारी से लेकर पुलिस, डॉक्टर, अधिवक्ता व गणमान्य लोग भी इन साइबर ठगों के शिकार हो रहे हैं. सोमवार को शहर के वार्ड छह में आयोजित प्रभात खबर संवाद में जुटे लोगों ने भी अपील की कि किसी भी अंजान व्यक्ति या मोबाइल नंबरों पर ओटीपी और आधार नंबर देने से बचें, क्योंकि जितने देर में आप किसी से मदद लेंगे या समझेंगे, उतनी देर में आपके दिये जानकारी पर साइबर अपराधी आपके पैसे उड़ा ले जायेंगे. = 10 उपाय कर बच सकते हैं साइबर अपराध से सोमवार को आयोजित प्रभात खबर संवाद में उपस्थित साइबर एक्सपर्ट शंभू शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि जो भी लोग इंटरनेट उपयोग करते हैं वह साइबर अपराधियों से बचने के लिए 10 जरूरी उपाय करना नहीं भूलें. क्योंकि मामूली चूक से ही बैंक खाता और कंप्यूटर का डाटा चोरी हो सकता है. इसलिए यदि आप जागरूक रहेंगे तो वैसे अपराधियों से बच सकते हैं अन्यथा आपके द्वारा किसी भी कार्य स्थल पर लापरवाही बरती गयी तो साइबर क्राइम के शिकार हो सकते हैं. उन्होंने बताया कि एक पासवर्ड को एक ही डिवाइस के उपयोग करें और एक से अधिक डिवाइस वाले अलग-अलग पासवर्ड बनाये और कंप्यूटर, मोबाइल या लैपटॉप को अनलॉक नहीं छोड़ें. हमेशा लॉक रखें या फिर उसे बंद कर दें. इसके अलावा सॉफ्टवेयर को भी हमेशा अपडेट करते रहें. खासकर जो लोग मोबाइल या इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं उन्हें सॉफ्टवेयर को अपडेट करते रहना चाहिए. यदि किसी अनजान लिंक आता है तो उसे क्लिक नहीं करें और कोई भी व्यक्ति यदि वाट्सएप पर कोई फाइल भेजता है तो उसे डाउनलोड नहीं करें. कार्यालय में काम करते वक्त ऐसे नेटवर्क का उपयोग नहीं करें जिसके बारे में आपको जानकारी नहीं हो. वाई-फाई ऑन करने के समय जिसे नहीं जानते हों उसे कनेक्ट नहीं करें. पासवर्ड को गुप्त रखें, उसे अपने दफ्तर के टेबल पर चिपका कर नहीं रखें. सार्वजनिक होने के कारण आप साइबर क्राइम के शिकार हो सकते हैं. इसके अलावा संवेदनशील डाटा वाले सिस्टम को लापरवाही से नहीं रखें. इतने सारे कवायद के बावजूद अगर आप फिर भी साइबर कांड की चपेट में आ जाते हैं तो तत्काल ही साइबर क्राइम से संबंधित किसी भी प्रकार की सहायता के लिए नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग, पोर्टल, हेल्प लाइन नंबर,साइबर सेल नंबर और पुलिस हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर सकते हैं . = जरूरत है साइबर फ्रॉड से बचाव की – साइबर क्राइम व्यक्तिगत और व्यावसायिक स्तर पर सुरक्षा कमजोरियों का फायदा उठाकर किया जाता है. इसलिए किसी भी स्थिति में अपना गोपनीय दस्तावेज आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खाता, क्रेडिट कार्ड के नंबर, ओटीपी व अन्य गोपनीय पासवर्ड किसी से भी शेयर नहीं करें. विनीत कुमार – अपनी गोपनीय जानकारी मोबाइल पर किसी से भी शेयर नहीं करना चाहिए. फेसबुक पर चैटिंग और अनावश्यक फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट नहीं करना चाहिए. फेसबुक और वाट्सअप पर साइबर फ्राड लोगों को चेंज करते हैं और मौका मिलते ही उन्हें अपना शिकार बनाते हैं. अमित पटेल – वर्तमान समय में पूरे दिन भर में चार से पांच फेंक काॅल काॅल सेंटर के नाम पर आते है. इनसे इंटरटेन करना नुकसानदायक हो सकता है, क्योंकि ऐसे काॅल साइबर फ्राड महिला पुरुष किया करते हैं और ये पेशेवर होते हैं. राधे सिंह – अत्यधिक समय मोबाइल का उपयोग काफी खतरनाक है. जो हमें साइबर ठगी का शिकार बनाती है और मानसिक परेशानी देती है. अनावश्यक एप डाउनलोड करना भी साइबर क्राइम की चपेट में आने जैसा है. साइबर क्राइम तेजी से पांव पसार रहा है, जिस पर लगाम लगाये जाने की आवश्यकता है. हरी सिंह – कोई भी बैंक या ऑनलाइन कंपनी लोगों से उनके बैंक खातों की जानकारी या मोबाइल नंबर नहीं मांगती, इससे बचने की जरूरत है. चंदन पटेल – सरकार और प्रशासन की ओर से साइबर क्राइम और हो रहे डिजिटल फ्रॉड को लेकर लगभग आये दिन अखबारों और टीवी या जनहित के रूप में लोगों को जागरूक किया जा रहा है ,लेकिन अभी भी कई ऐसे लोग है जो जागरूक रहने के बावजूद साइबर अपराध की चपेट में आ ही जा रहे है. संजय सिंह

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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