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Home बिहार कैमूर जिले में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर, एयर पॉल्यूशन 302 आरपीएम दर्ज

जिले में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर, एयर पॉल्यूशन 302 आरपीएम दर्ज

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जिले में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर, एयर पॉल्यूशन 302 आरपीएम दर्ज
सांकेतिक तस्वीर

वाहनों के रफ्तार और धुंध से छोटे शहरों में भी बढ़ा प्रदूषण का खतरा

भीड़-भाड़ वाले इलाकों में सांस लेना भी मुश्किल

प्रतिनिधि, भभुआ सदर.

बुधवार को जिले का एयर पॉल्यूशन 302 आरपीएम दर्ज किया गया, जिसके चलते दोपहर दो बजे के बाद शहर के आसमान पर धुंध छा गयी और विजिबिलिटी लगातार कम होती चली गयी. हालांकि अब भी अधिकांश लोग इस गंभीर समस्या को लेकर लापरवाह बने हुए हैं, लेकिन ऐसे लोगों की संख्या भी कम नहीं है जो इसकी गंभीरता को समझने लगे हैं. वायु प्रदूषण से बचाव के लिए लोग अब मास्क सहित अन्य उपाय अपनाने लगे हैं. प्रदूषण की चपेट में अब अपेक्षाकृत छोटे शहरों के साथ-साथ ग्रामीण इलाके भी आने लगे हैं. हवा में घुले प्रदूषण को अब सहज ही महसूस किया जा रहा है. भीड़-भाड़ वाले इलाकों में सांस लेना भी मुश्किल हो रहा है. हवा के साथ लोग धूल कणों को भी सांस के जरिये ग्रहण कर रहे हैं, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है.

दिनों-दिन बढ़ रही वाहनों की संख्या

परिवहन विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो भभुआ व मोहनियां शहर में हर प्रकार के वाहनों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है. पिछले जनवरी से अब तक छोटे-बड़े मिलाकर करीब डेढ़ लाख से अधिक नये वाहन सड़कों पर उतर चुके हैं. बेतहाशा बढ़ते नये-पुराने लाखों वाहन वातावरण में धुआं छोड़कर प्रदूषण फैला रहे हैं. इन वाहनों के बीच से गुजरने वाले लोग उसी जहरीली हवा को सांस के रूप में ले रहे हैं और बीमार हो रहे हैं.लेकन, प्रदूषण पर नियंत्रण को लेकर अब तक किसी भी स्तर से कोई कारगर पहल सामने नहीं आयी है. वाहनों के लिए प्रदूषण जांच की व्यवस्था भी फिलहाल शहर में लागू नहीं हो सकी है. नतीजतन अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की पहचान नहीं हो पा रही है और लोग लगातार वायु प्रदूषण की चपेट में आते जा रहे हैं.

कचरे का अवशेष जलने से भी बढ़ रही परेशानी

शहरों में आमतौर पर कचरे को जलाने की परंपरा बनी हुई है. दिन भर एकत्र किये गये कचरे को जला दिया जाता है, जिसमें प्लास्टिक भी शामिल होता है. इनके जलने से निकलने वाला जहरीला धुआं वातावरण में घुल जाता है और वही हवा लोगों के स्वास्थ्य के लिए घातक साबित हो रही है. इस पर रोक लगाने की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है. प्रशासनिक स्तर पर कार्ययोजना तो बनायी गयी है, लेकिन वह धरातल पर अब तक लागू नहीं हो सकी है, जिससे स्थिति और गंभीर होती जा रही है.

वायु प्रदूषण से बीमारियों का बढ़ता खतरा

छोटे शहरों में भी वाहनों की बढ़ती भीड़ और लापरवाही से फैल रहे वायु प्रदूषण के कारण कई तरह की बीमारियां पांव पसार रही हैं. सदर अस्पताल के डॉक्टर डॉ विनय तिवारी के अनुसार छोटे शहरों में अभी से ही प्रदूषण पर नियंत्रण बेहद जरूरी हो गया है. अधिक प्रदूषण वाले क्षेत्रों में रहने या काम करने वाले लोगों को मास्क का उपयोग जरूर करना चाहिए. हवा में मौजूद डस्ट पार्टिकल का सीधा असर फेफड़ों पर पड़ता है, जिससे सांस लेने में दिक्कत, सिरदर्द, चक्कर आना जैसी समस्याएं हो सकती हैं. प्रदूषण का स्तर अधिक होने पर फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियों का भी खतरा रहता है. ऐसी किसी भी परेशानी के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

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