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Home बिहार कैमूर निजी विद्यालयों की मनमानी पर प्रशासन सख्त, जांच के लिए 13 अधिकारियों की टीम गठित

निजी विद्यालयों की मनमानी पर प्रशासन सख्त, जांच के लिए 13 अधिकारियों की टीम गठित

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निजी विद्यालयों की मनमानी पर प्रशासन सख्त, जांच के लिए 13 अधिकारियों की टीम गठित
सांकेतिक तस्वीर

प्रभात खबर में समाचार प्रकाशित होने के बाद हरकत में आया प्रशासन डीएम के निर्देश पर तैनात पदाधिकारी सभी बिंदुओं पर जांच कर देंगे रिपोर्ट एक सप्ताह में देनी होगी रिपोर्ट, महंगी किताब व फीस वसूली की होगी जांच एनसीइआरटी-एससीइआरटी मानकों की होगी पड़ताल, स्कूलों की कार्यप्रणाली पर कड़ी नजर –इंपैक्ट– भभुआ नगर. जिले में संचालित निजी विद्यालयों की मनमानी पर अब प्रशासन ने कड़ा रुख अपना लिया है. जिला पदाधिकारी नितिन कुमार सिंह के निर्देश पर जिला शिक्षा पदाधिकारी राजन कुमार ने 13 अधिकारियों की टीम गठित कर प्रखंडवार जांच के लिए तैनात कर दिया है. ये सभी पदाधिकारी अपने-अपने क्षेत्र के निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली की गहन जांच करेंगे. प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि यह कार्रवाई केवल औपचारिक नहीं, बल्कि पूरी गंभीरता के साथ की जायेगी. सभी अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे एक सप्ताह के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंप देंगे. दरअसल, इस मामले को लेकर लंबे समय से अभिभावकों में नाराजगी थी व स्थानीय स्तर पर विरोध भी बढ़ रहा था. इस मुद्दे को प्रभात खबर द्वारा लगातार प्रमुखता से उठाये जाने के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ है. पूर्व नगर सभापति जैनेंद्र आर्य ने भी जिला पदाधिकारी व डीइओ को आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की थी. अब गठित समिति सभी पहलुओं की जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके आधार पर दोषी विद्यालयों पर सख्त कार्रवाई की जायेगी. महंगी किताबें व जबरन खरीद पर होगी कार्रवाई जिले के कई निजी विद्यालयों पर आरोप है कि वे छात्रों से री-एडमिशन के नाम पर अत्यधिक शुल्क वसूलते हैं व हर वर्ष नयी व महंगी किताबें खरीदने के लिए अभिभावकों पर दबाव डालते हैं. ये किताबें सामान्य बाजार में उपलब्ध नहीं होतीं व अभिभावकों को तय दुकानों से ही खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है. इससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है. अब जांच समिति इन सभी मामलों की बारीकी से जांच करेगी व दोषी पाये जाने पर कड़ी कार्रवाई की जायेगी. जांच का एक मुख्य उद्देश्य यह भी है कि स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली किताबें सरकारी मानकों के अनुरूप हैं या नहीं. कई मामलों में विद्यालय एनसीइआरटी या एससीइआरटी की पुस्तकों के बजाय निजी प्रकाशन की महंगी किताबें लागू कर देते हैं. इससे न केवल अभिभावकों की जेब पर असर पड़ता है, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता पर भी असर पड़ता है. समिति यह सुनिश्चित करेगी कि सभी विद्यालय निर्धारित पाठ्यक्रम व मानकों का पालन करें. स्कूल परिसर में बिक्री व फीस वृद्धि पर निगरानी जांच टीम स्कूल परिसर में यूनिफॉर्म, किताबें व स्टेशनरी की बिक्री से जुड़े मामलों की भी जांच करेगी. कई विद्यालयों पर आरोप है कि वे अपने परिसर में ही इन वस्तुओं की बिक्री करते हैं या किसी विशेष दुकान से खरीदने के लिए बाध्य करते हैं. बाहर से सामान खरीदने पर अभिभावकों पर जुर्माना तक लगाया जाता है. प्रशासन ने इस तरह की प्रथाओं को अवैध बताया है. इसके साथ ही फीस वृद्धि के मामलों की भी समीक्षा की जायेगी, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सभी विद्यालय नियमों के अनुसार ही शुल्क ले रहे हैं. प्रशासन की इस पहल से अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है. यदि जांच निष्पक्ष व सख्ती से की गयी, तो शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता आयेगी. प्रखंडवार अधिकारियों की तैनाती निजी विद्यालयों की जांच के लिए प्रशासन ने प्रखंडवार अधिकारियों की तैनाती कर दी है. अधौरा में रविंद्र कुमार, भभुआ में विकास कुमार डीएन व गौरव सिन्हा, भगवानपुर में मो आसिफ आनंद, चैनपुर में अंशु कुमार, चांद में प्रकाश कुमार, दुर्गावती में रमेश कुमार, कुदरा में मुकेश कुमार, मोहनिया में अरविंद कुमार व शिवशंकर प्रसाद, नुआंव में मुन्ना कुमार, रामगढ़ में मो शहजाद अंजुम तथा रामपुर में तेजस्विनी आनंद को जिम्मेदारी सौंपी गयी है. सभी अधिकारी अपने-अपने प्रखंड के निजी विद्यालयों की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट प्रशासन को सौंपेंगे.

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