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Home बिहार कैमूर कई मंत्री देने वाला अधौरा प्रखंड आज भी है विकास से कोसों दूर

कई मंत्री देने वाला अधौरा प्रखंड आज भी है विकास से कोसों दूर

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कई मंत्री देने वाला अधौरा प्रखंड आज भी है विकास से कोसों दूर
सांकेतिक तस्वीर

पक्की सड़क से आज भी नहीं जुड़ पाये हैं गांव, नेटवर्क की भी रहती है भारी समस्या

विकास नहीं, जाति के आधार पर लोग करते हैं मतदान

प्रतिनिधि, भभुआ नगर.

कैमूर जिले का अधौरा प्रखंड राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण रहा है. यह इलाका कई बार मंत्री दे चुका है, लेकिन विडंबना यह है कि आज भी अधौरा विकास की बुनियादी सुविधाओं से वंचित है. यहां शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली और पानी की स्थिति बेहद खराब है. पहाड़ी और नक्सल प्रभावित इलाका होने के बावजूद सरकार और जनप्रतिनिधियों ने इस क्षेत्र की लगातार अनदेखी की है. इसी का नतीजा है कि अधौरा प्रखंड के कई गांवों तक आज भी पक्की सड़क नहीं पहुंच पायी हैं, जिससे बारिश के दिनों में आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाता है. स्कूलों में शिक्षक हैं पर पढ़ाने नहीं जाते, अस्पताल है पर इलाज के लिए डॉक्टर नहीं, इसके साथ ही पीने के पानी की किल्लत आम बात है. बिजली आपूर्ति भी अनियमित है, जिससे यहां के ग्रामीण अंधेरे और कई समस्याओं के बीच जीवन गुजारने को विवश हैं.

क्या कहते हैं स्थानीय लोग

स्थानीय लोगों का कहना है कि चुनाव के समय नेता गांवों में पहुंचकर वादों की झड़ी लगा देते हैं, लेकिन चुनाव बीतते ही सब वादे हवा हो जाते हैं. स्थिति यह है कि शिक्षा और रोजगार के अभाव में यहां के युवा मजबूरी में पलायन कर जा रहे हैं. वहीं सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इतने वर्षों की उपेक्षा के बावजूद यहां के मतदाता विकास के मुद्दे पर नहीं, बल्कि जातीय समीकरण के आधार पर मतदान करते हैं. यही कारण है कि अधौरा का विकास आज भी अधूरा है. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जब तक मतदाता जात-पात से ऊपर उठकर विकास को प्राथमिकता नहीं देंगे, तब तक यह क्षेत्र पिछड़ेपन के चक्र से बाहर नहीं निकल पायेगा. अधौरा की कहानी बिहार के कई पहाड़ी और ग्रामीण इलाकों की हकीकत को बयां करती है, जहां राजनीतिक चेहरे बदलते रहे, पर हालात अभी भी जस के तस हैं.

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