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आइसीयू नहीं आता गंभीर मरीजों के काम

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आइसीयू नहीं आता गंभीर मरीजों के काम

जहानाबाद जिले के एक मात्र सदर अस्पताल में हार्ट अटैक, दुर्घटना अथवा गंभीर रूप से बीमार होकर आने वाले रोगियों को पीएमसीएच भेजना पड़ता है, जबकि सदर अस्पताल में करोड़ों की लागत से आइसीयू का निर्माण क्रिटिकल कंडीशन वाले मरीजों के लिए ही किया गया था. आइसीयू होने के बावजूद दुर्घटना में घायल गंभीर मरीज अथवा हृदयाघात या किसी अन्य बीमारी के कारण सीरियस पेशेंट को अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सक उन्हें तुरंत पीएमसीएच, आइजीआइएमएस अथवा एम्स रेफर कर देते हैं. सदर अस्पताल का आइसीयू फिलहाल ऑपरेशन के बाद रोगियों को रखने के काम में आता है. हालांकि आइसीयू में ही हर्ट वार्ड भी बना है किंतु उसमें भी हार्ट अटैक के किसी रोगी को भर्ती कर इलाज नहीं किया जाता है. ऐसे में हार्ट अटैक होने के बाद कोई रोगी जब कभी सदर अस्पताल में इलाज कराने आते हैं तो प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें पटना के बड़े अस्पतालों में भेज दिया जाता है. इसी तरह जिले में हुई दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल मरीज जब क्रिटिकल कंडीशन में इलाज के लिए सदर अस्पताल लाया जाता है, तो उन्हें भी प्राथमिक उपचार के बाद पीएमसीएच भेजना चिकित्सकों की विवशता बन जाती है. सदर अस्पताल विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है, जिसके कारण अस्पताल में गंभीर रोगियों का इलाज नहीं हो पाता है. गंभीर रोग से पीड़ित मरीज और दुर्घटना में गंभीर रूप से घायलों को पीएमसीएच भेजना चिकित्सकों की मजबूरी बन जाती है. सदर अस्पताल में आइसीयू का निर्माण बड़े तामझाम से किया गया था. चार बेड के इस आइसीयू में करोड़ों के इंस्ट्रूमेंट लगे हैं, किंतु विशेषज्ञ चिकित्सकों के अभाव में आइसीयू प्रायः बंद रहता है या किसी ऑपरेशन के बाद मरीज को रखने के काम में आता है. कभी कोई वीआइपी मरीज आइसीयू में रक्खे जाते हैं आइसीयू चलाने के लिए एमडी के बाद डीएम (हृदय रोग विशेषज्ञ) डिग्री के चिकित्सकों की जरूरत होती है किंतु सदर अस्पताल का हाल यह है कि यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की ही भारी कमी हैं. सदर अस्पताल में चिकित्सकों के 53 स्वीकृत पद हैं, जिनमें बहुत सारे चिकित्सकों के पद रिक्त हैं. इनमें ज्यादातर विशेषज्ञ चिकित्सक शामिल हैं. जिले में एसीएमओ का पद भी खाली है. एसीएमओ का पद बहुत ही महत्वपूर्ण होता है. सिविल सर्जन के बाद जिले में एसीएमओ का पद दूसरे नंबर पर आता है. सिविल सर्जन की अनुपस्थिति में स्वास्थ्य विभाग का सारा कार्यभार एसीएमओ के ही जिम्मे होता है. एसीएमओ के पद पर फिलहाल गैर संचारी रोग पदाधिकारी को प्रभार दिया गया है. वही एसीएमओ का भी कार्यभार देखते हैं. 10 साल पहले सदर अस्पताल में चार बेड का आइसीयू बनाया गया था. आइसीयू की स्थापना के बाद से ही यह विशेषज्ञ चिकित्सकों और अन्य तकनीशियनों की कमी से जूझ रहा है जिसके कारण कभी भी यह आइसीयू सुचारू रूप से संचालित नहीं हो सका. कभी-कभार ही इस आइसीयू में गंभीर मरीजों को रखा गया है. वैसे यह आइसीयू ज्यादातर बंध्याकरण सहित विभिन्न ऑपरेशन के बाद पोस्ट ऑपरेशन के मरीजों को रखने के काम में आता है या जब कभी कोई वीआइपी पेशेंट अस्पताल में ऑपरेशन कराने के बाद आइसीयू में रहता है, जबकि आइसीयू खासकर हार्ट अटैक और क्रिटिकल कंडीशन वाले रोगियों को रखने के लिए बनाया गया था, किंतु सदर अस्पताल में आने वाले सभी हार्ट अटैक मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद पीएमसीएच भेज दिया जाता है.

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