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Home बिहार जहानाबाद जहानाबाद के 75% प्रतिष्ठानों में फायर सेफ्टी नहीं, 30% अग्निशामक यंत्र खराब

जहानाबाद के 75% प्रतिष्ठानों में फायर सेफ्टी नहीं, 30% अग्निशामक यंत्र खराब

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जहानाबाद के 75% प्रतिष्ठानों में फायर सेफ्टी नहीं, 30% अग्निशामक यंत्र खराब
निजी अस्पताल और होटल रेस्टोरेंट का निरीक्षण करते अनुमंडल अधिकारी एवं जिला अग्निशमन पदाधिकारी

जहानाबाद से संजय अनुराग की रिपोर्ट
Jehanabad News : अग्निशमन विभाग और जिला प्रशासन के संयुक्त सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है कि 25 प्रतिशत से भी कम निजी अस्पताल, क्लीनिक, होटल एवं रेस्टोरेंट में आग से बचाव के इंतजाम हैं. अब तक करीब 100 से अधिक संस्थानों का सर्वेक्षण किया जा चुका है, जिनमें से केवल 24 संस्थानों में फायर सुरक्षा के इंतजाम मिले हैं, जबकि 76 संस्थानों में सुरक्षा के कोई इंतजाम नजर नहीं आए हैं.

निजी क्लीनिक और अस्पतालों में व्यापक लापरवाही

जांच के दौरान अब तक करीब 60 निजी क्लीनिक और अस्पतालों में अग्निशमन विभाग तथा जिला प्रशासन द्वारा पड़ताल की गई है. इनमें से केवल 15 निजी क्लीनिक और अस्पतालों में आग लगने की घटना के दौरान सुरक्षा और बचाव के इंतजाम पाए गए हैं, जबकि 45 अस्पतालों में सुरक्षा के कोई इंतजाम नजर नहीं आए हैं. इसी तरह अब तक किए गए सर्वेक्षण के दौरान 40 होटल और रेस्टोरेंट की पड़ताल की गई है, जिसमें से केवल 9 में ही सुरक्षा और सेफ्टी के इंतजाम पाए गए हैं, जबकि 31 होटल और रेस्टोरेंट में सुरक्षा इंतजामों का अभाव नजर आया है.

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन संस्थानों में फायर एक्सटिंग्विशर लगे भी हैं, उनमें से 30% या तो खराब हैं या उनके उपयोग की तिथि खत्म (एक्सपायर) हो चुकी है. मुजफ्फरपुर और दिल्ली में अगलगी की घटना के बाद बिहार सरकार के आदेश पर जहानाबाद के अनुमंडल अधिकारी राजीव रंजन सिन्हा और जिला अग्निशमन पदाधिकारी स्नेही सोनल द्वारा यह संयुक्त पड़ताल की जा रही है.

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जहानाबाद के 75% प्रतिष्ठानों में फायर सेफ्टी नहीं, 30% अग्निशामक यंत्र खराब 3

यह हैं अग्नि से सुरक्षा के जरूरी इंतजाम

प्रतिष्ठानों में आग से बचाव के लिए मुख्य रूप से फायर एक्सटिंग्विशर, स्मोक डिटेकटर, स्प्रिंकलर, फायर अलार्म और होज रील जैसे सुरक्षा इंतजाम होने आवश्यक हैं.

क्या कहती हैं जिला अग्निशमन पदाधिकारी

जिला अग्निशमन पदाधिकारी स्नेही सोनल ने कहा कि अग्नि सुरक्षा में खामी पाए जाने वाले संस्थानों को नोटिस दिया जा रहा है, जिसमें 15 दिन के भीतर सुरक्षा के सारे इंतजाम दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं. अगर यह संस्थान 15 दिनों में अपने यहां आग लगने की स्थिति में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें संस्थान को सील करने की कार्रवाई भी शामिल है.

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मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर पलायन कर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट ( माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय). नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है. नोएडा में टीवी न्यूज में काम करने के बाद हिंदुस्तान ग्रूप होते हुए बिहार, झारखंड की सबसे पसंदीदा अखबार प्रभात खबर में कार्यरत. हां एक बात और... पढ़ने-लिखने की जिज्ञासा कभी खत्म नहीं होगी. साहित्य में बेहद दिलचस्पी.
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