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Home बिहार जमुई नक्सलियों की जन-अदालत से योग और विकास तक: गुरमहा ने लिखी बदलाव की नई इबारत

नक्सलियों की जन-अदालत से योग और विकास तक: गुरमहा ने लिखी बदलाव की नई इबारत

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नक्सलियों की जन-अदालत से योग और विकास तक: गुरमहा ने लिखी बदलाव की नई इबारत
आशा कार्यकर्ताओं को नियुक्ति पत्र सौंपते हुए मंत्री व पदाधिकारी

जमुई (बरहट) से शशिलाल की रिपोर्ट

Yoga Day: कभी जहां नक्सलियों की जन-अदालत लगती थी और बंदूक की धमक सुनाई देती थी, वहीं रविवार को योग, विकास और विश्वास का संदेश गूंजा. बरहट प्रखंड का गुरमहा गांव अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर बदलाव और मुख्यधारा से जुड़ने की नई मिसाल बनकर उभरा.

नक्सल प्रभावित क्षेत्र में दिखी बदलाव की तस्वीर

गुरमहा और आसपास का इलाका कभी नक्सली गतिविधियों के कारण सुर्खियों में रहता था. प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का यहां पहुंचना भी चुनौती माना जाता था. लेकिन रविवार को बदले हालात की तस्वीर सामने आई. मंत्री, डीएम और एसपी ने ग्रामीणों के बीच बैठकर योगाभ्यास किया, उनकी समस्याएं सुनीं और विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी.

योग को बताया स्वस्थ समाज का आधार

मंत्री श्रेयसी सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से योग को वैश्विक पहचान मिली है. योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ और सकारात्मक समाज निर्माण का माध्यम है. उन्होंने कहा कि जिस क्षेत्र ने कभी हिंसा और भय का दौर देखा, वहां आज योग और विकास की चर्चा होना सकारात्मक बदलाव का सबसे बड़ा प्रमाण है. उन्होंने गुरमहा की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत की सराहना करते हुए इसे पर्यटन मानचित्र पर लाने की बात भी कही. इस दौरान उन्होंने गांव में नल-जल योजना का उद्घाटन भी किया.

गांव को मिली स्कूल और अस्पताल की सौगात

जिलाधिकारी नवीन कुमार ने ग्रामीणों से संवाद करते हुए कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता है. उन्होंने घोषणा की कि गुरमहा में जल्द ही मध्य विद्यालय भवन का निर्माण कराया जाएगा. साथ ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए अस्पताल खोलने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी. उन्होंने कहा कि सड़क, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए लगातार काम किया जा रहा है.

महिलाओं और दिव्यांगों को मिला सम्मान

कार्यक्रम के दौरान चोरमारा गांव की सुगंती कुमारी और गुरमहा की अन्नू कुमारी को आशा कार्यकर्ता के रूप में नियुक्ति पत्र सौंपा गया. वहीं दिव्यांग महेश राणा को ट्राइसाइकिल प्रदान की गई. बुजुर्ग महिलाओं को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया. कार्यक्रम के अंत में मंत्री और अधिकारियों ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया.

नक्सल स्मारक की जगह योग शिविर बना बदलाव का प्रतीक

ग्रामीणों के अनुसार जिस स्थान पर योग शिविर आयोजित किया गया, वहां कभी नक्सलियों की गतिविधियां संचालित होती थीं. पुलिस मुठभेड़ों में मारे गए नक्सलियों के स्मारक भी यहीं बनाए जाते थे. आज उसी स्थान पर योगाभ्यास और विकास योजनाओं की चर्चा ने यह साबित कर दिया कि गुरमहा अब भय और हिंसा के अतीत को पीछे छोड़ चुका है.

सुरक्षा के बीच विकास का संदेश

पुलिस अधीक्षक विश्वजीत दयाल ने कहा कि पूरा क्षेत्र अब नक्सलमुक्त हो चुका है. लोगों के मन से डर समाप्त हुआ है और प्रशासन उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य एवं रोजगार से जोड़ने के लिए लगातार प्रयासरत है. कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी. डॉग स्क्वायड सहित पुलिस बल की तैनाती की गई थी. गुरमहा में आयोजित यह योग शिविर केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि क्षेत्र में आए सामाजिक बदलाव और विकास की नई तस्वीर का प्रतीक बन गया.

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