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पाठशाला जाने की बजी सीटी, दौड़ चले आये बच्चे

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पाठशाला जाने की बजी सीटी, दौड़ चले आये बच्चे

जमुई. बच्चों को स्कूल तक लाना आज भी एक चुनौती पूर्ण कार्य है. विशेष कर महादलित टोला के बच्चे विद्यालय आना ही नहीं चाहते हैं. उनके माता-पिता इसे लेकर इतने जागरूकता नहीं दिखा रहे हैं. उक्त बातें जिला कार्यक्रम पदाधिकारी माध्यमिक शिक्षा एवं साक्षरता मानस मिलिंद ने बताया कि महादलित टोला के बच्चों को स्कूल तक लाने को लेकर जागो जमुई कार्यक्रम शुभारंभ किया गया है. इसके तहत महादलित टोला के बच्चों को संबंधित टोला के शिक्षा सेवक सीटी बजाकर घर-घर से बुलायेगें. इस प्रकार बच्चे एकत्रित होते हुए रेलगाड़ी का रूप ले लेंगे और छुक छुक करते हुए सीटी बजाते हुए रेलगाड़ी अपने गंतव्य विद्यालय मैं पहुंचेगी. उन्होंने बताया कि गुरुवार को मांझी टोला सोनाय उत्क्रमित विद्यालय में इसका अद्भुत दृश्य देखने को मिला. शिक्षा सेवकों ने सीटी बजाते हुए और झंडा लहराते हुए महादलित टोला के बच्चों को बुला रहे थे और बच्चे एकत्रित होकर रेलगाड़ी का रूप ले ले रहे थे. फिर इंजन और डब्बे की शक्ल में छुक छुक करते हुए विद्यालय तक पहुंचे. महादलित टोले के अभिभावक व अन्य व्यक्ति इस दृश्य को देखकर बहुत खुश थे. सबसे ज्यादा खुश तो वह बच्चे थे जो रेलगाड़ी बनकर विद्यालय जा रहे थे. बच्चों ने बताया कि हम लोग पहली बार इस तरह से स्कूल जा रहे हैं. हमें बहुत अच्छा लग रहा है. ऐसे हम लोग रोज स्कूल जाएंगे. जिला कार्यक्रम पदाधिकारी मानस मिलिंद ने बताया कि इसकी शुरुआत जमुई प्रखंड से की गई है इसी प्रकार से जिले के सभी प्रखंडों में इसकी शुरुआत की जायेगी. इतना ही नहीं शिक्षा सेवक दोपहर में जो महिलाओं को साक्षर करने का कार्य करते हैं उसके अतिरिक्त उन महिलाओं को विभिन्न प्रकार की जानकारी भी देगें. इस संदर्भ में स्वास्थ्य विभाग, कृषि विभाग, आपदा विभाग के अलावा अन्य गैर सरकारी संस्थाओं का भी सहयोग लिया जायेगा. इससे महिलाओं को विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों की जानकारी प्राप्त होगी बल्कि उनके स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं अथवा आजीविका के संदर्भ में भी जागरूक किया जा सकेगा. उन्होंने बताया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने में महत्वपूर्ण बात है बच्चों का विद्यालय तक पहुंचना. यदि बच्चे विद्यालय ही नहीं आएंगे तो शिक्षा किसे प्रदान की जायेगी. महादलित टोलो में यह एक गंभीर समस्या है जहां बच्चे विद्यालय नहीं आते है. यदि आते भी हैं तो अनियमित रूप से आते हैं. अतः इस प्रकार खेलखेल में विद्यालय आने से बच्चों में काफी उत्साह होता है. कार्यक्रम को सफल बनाने में कर्मी अजय कुमार, अरविंद कुमार, केआरपी संजीव सिंह, शिक्षा सेवकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाया.

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