शिवमहापुराण कथा का श्रवण आत्मशुद्धि का माध्यम : कैलाशानंद

हर-हर महादेव के गगनभेदी जयघोष, हवन की पवित्र सुगंध और भक्तों के अटूट विश्वास श्री श्री 1008 शिव शक्ति महायज्ञ में देखने को मिला.

By PANKAJ KUMAR SINGH | March 17, 2026 10:00 PM

सिमुलतला. हर-हर महादेव के गगनभेदी जयघोष, हवन की पवित्र सुगंध और भक्तों के अटूट विश्वास श्री श्री 1008 शिव शक्ति महायज्ञ में देखने को मिला. कथा स्थल पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ पूरी तरह शिवमय हो उठी. निरंजनी पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज ने अपनी ओजस्वी वाणी से शिवतत्व का विस्तारपूर्वक वर्णन किया. उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन की सार्थकता महादेव के चरणों में ही निहित है. शिव केवल संहार के देव नहीं, बल्कि करुणा के सागर हैं. आज का मानव शांति की तलाश में भटक रहा है, जबकि वास्तविक शांति महादेव के अघोर स्वरूप में समाहित है. महाराज श्री ने कहा कि शिवमहापुराण की कथा का श्रवण मात्र श्रवण नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि का माध्यम है, जो जन्म-जन्मांतर के पापों को नष्ट करने की शक्ति रखता है. उन्होंने भोलेनाथ की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान शिव को भव्यता नहीं, बल्कि भक्त का निर्मल हृदय प्रिय है. हालांकि, उन्होंने यह भी चेताया कि अहंकार और तामसी प्रवृत्तियों के साथ शिव की शरण में जाना संभव नहीं है. महादेव की कृपा पाने के लिए व्यक्ति को अपने भीतर के अहंकार का त्याग करना होगा. महायज्ञ और कथा के इस संगम को उन्होंने आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बताया. कहा कि जहां शक्ति की आराधना के साथ शिव का नाम जुड़ता है, वहां दरिद्रता और दुखों का वास नहीं होता. उन्होंने उपस्थित जनसमूह के साथ राष्ट्र कल्याण और विश्व शांति की कामना की. कथा के दौरान साधु-संतों की उपस्थिति और हजारों श्रद्धालुओं के हर-हर महादेव के उद्घोष से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा. कथा के समापन पर हुई महाआरती में दीपों की रोशनी के बीच श्रद्धालुओं ने महादेव की दिव्य अनुभूति की. अंत में प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ. इस अवसर पर बांका के सांसद गिरिधारी यादव भी उपस्थित रहे. साथ ही जयदेव जी महाराज, आचार्य पवन दत्त मिश्रा, प्रमोद पांडेय, सुनील पांडेय, सतीश राय, चंदन पांडेय समेत कई गणमान्य लोग मौजूद थे.