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कटका गांव के महादलित समाज की पहली स्नातक बनी सीमा

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कटका गांव के महादलित समाज की पहली स्नातक बनी सीमा

बरहट. कहते हैं कि दिल में कुछ कर गुजरने का जज़्बा हो, तो कामयाबी निश्चित मिलती है. इस बात को सच कर दिखाया है बरहट प्रखंड के नुमर पंचायत अंतर्गत महादलित टोला कटका गांव की बेटी सीमा ने. विशेष बात तो यह है कि सीमा अपने गांव की पहली बेटी है जिसने स्नातक स्तरीय एएनएम हैं. वह अपने समाज के लोगों को जागरूक करते हुए उन्हें मुफ्त चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध करा रही है. सीमा ने बताया कि उनके समाज में बहुत कम लोग ही पढ़ाई करते हैं. इस वजह से उनको शिक्षा व स्वास्थ्य की सही जानकारी नहीं मिल पाती. उसने बताया कि उनके घरवालों ने कम उम्र में शादी की बात की तो उसने साफ मना कर दिया. उसका सपना डॉक्टर बनने का था. लेकिन आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण उसने नर्सिंग की पढ़ाई पूरी की और एएनएम बन कर गांव में लोगों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करा रही हैं.

पढ़ाई के दौरान समाज का विरोध झेलना पड़ा

सीमा बताती हैं कि पढ़ाई के दौरान उन्हें तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ा. समाज के कुछ लोग उनके खिलाफ थे और उन्हें ताने देते थे. लेकिन उसने हार नहीं मानी. परिवार का पूरा सहयोग मिला, खासकर उनके पिता का. सीमा के पिता रामदेव मांझी ने बताया कि वे आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आते हैं. इसलिए वे अपनी बेटी की शादी कम उम्र में करना चाहते थे, लेकिन सीमा ने पढ़ाई के लिए शादी से इनकार कर दिया और आज अपने गांव की पहली ग्रेजुएट बनकर दूसरों के लिए मिसाल पेश कर रही हैं. आज सीमा अपने गांव में मुफ्त स्वास्थ्य सेवा लोगों को उपलब्ध करा रही हैं. उनके इस कार्य से गांव के लोग बहुत खुश हैं और उन्हें सम्मान की नजर से देखते हैं.

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