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रैगिंग मानसिक, शारीरिक व भावनात्मक विकास में बाधा

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रैगिंग मानसिक, शारीरिक व भावनात्मक विकास में बाधा

जमुई. जिला मुख्यालय स्थित राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज सभागार में रविवार को एंटी रैगिंग वर्कशॉप का आयोजन किया गया. इसका उद्देश्य नये छात्रों को रैगिंग से सुरक्षित रखना और वरिष्ठ छात्रों को रैगिंग के खतरों के प्रति जागरूक करना था. प्राचार्य डॉ नीरज कुमार सिंह ने रैगिंग की बुराइयों और इसके कानूनी दुष्परिणामों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रैगिंग न केवल एक अमानवीय कृत्य है, बल्कि यह छात्र के मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक विकास में गंभीर बाधा डालता है. इससे कारण छात्रों में आत्मविश्वास की कमी, भय, और अवसाद जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, जो उनके शैक्षणिक प्रदर्शन और व्यक्तित्व विकास को प्रभावित करती है. उन्होंने कहा कि भारत में रैगिंग के खिलाफ सख्त कानून बनाये गये हैं. इसमें रैगिंग करने पर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा सकती है, कॉलेज से निष्कासन, आपराधिक मुकदमा और जेल की सजा इसमें शामिल है. सुप्रीम कोर्ट ने भी रैगिंग के खिलाफ सख्त निर्देश जारी किये हैं और यूजीसी द्वारा गठित एंटी-रैगिंग समितियां इन कानूनों के पालन को सुनिश्चित करती हैं. छात्रों को यह समझना चाहिये कि रैगिंग से न केवल उनके साथियों को नुकसान होता है, बल्कि यह उनके स्वयं के भविष्य के लिए भी हानिकारक है. सहायक प्राध्यापक प्रीति कुमारी ने भी रैगिंग के दुष्प्रभावों और इससे बचाव पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने कहा कि रैगिंग का प्रभाव केवल पीड़ित छात्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह पूरे शैक्षणिक संस्थान के वातावरण को विषाक्त बना सकता है. जब नये छात्रों को इस प्रकार की प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है, तो वे अपनी पढ़ाई और अन्य गतिविधियों में ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते. इससे उनकी समग्र शैक्षणिक यात्रा प्रभावित होती है. इसके अलावा रैगिंग से उत्पन्न तनाव और चिंता उनके मानसिक स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं. इसीलिए शैक्षणिक संस्थानों में स्वस्थ और सुरक्षित माहौल बनाये रखना अत्यंत आवश्यक है, जहां हर छात्र को बिना किसी भय के सीखने और बढ़ने का मौका मिले. भारत में सरकार और शैक्षणिक संस्थाएं मिलकर इस दिशा में काम कर रही हैं, ताकि छात्रों का अनुभव सुखद और सुरक्षित हो. उन्होंने कहा कि रैगिंग न केवल एक कानूनी अपराध है, बल्कि यह हमारे समाज की नैतिकता पर भी एक कलंक है. प्रत्येक छात्र को सुरक्षित, सम्मानजनक और प्रेरणादायक माहौल में सीखने का अधिकार है. यदि आप रैगिंग का शिकार होते हैं या किसी अन्य को इसका शिकार होते देखते हैं, तो तुरंत कॉलेज प्रशासन या संबंधित अधिकारियों को सूचित करें. वर्कशॉप में चीफ वार्डन, हॉस्टल वार्डन और सभी व्याख्याता गण भी उपस्थित थे. उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे कॉलेज में एक स्वस्थ और सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाये रखें और किसी भी प्रकार की रैगिंग गतिविधियों से दूर रहें. कार्यक्रम के अंत में सभी छात्रों ने रैगिंग के खिलाफ जागरूकता फैलाने और नये छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की शपथ ली. मौके पर विद्यालय के सहायक प्राध्यापक सहित छात्र-छात्रा उपस्थित थी.

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