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जमुई सदर अस्पताल: व्यवस्था स्ट्रेचर पर, मरीजों की जान दांव पर

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जमुई सदर अस्पताल: व्यवस्था स्ट्रेचर पर, मरीजों की जान दांव पर

जमुई . राज्य सरकार के बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था बनाने के दावों के बीच जमुई सदर अस्पताल से एक शर्मनाक तस्वीर सामने आ रही है. जिले का सबसे बड़ा अस्पताल खुद ””””बीमार”””” नजर आ रहा है. यहां मरीजों को वार्ड तक ले जाने वाले स्ट्रेचर टूटे हुए हैं. इससे इमरजेंसी में आने वाले मरीजों और उनके परिजनों की मुश्किलें बढ़ गयी हैं. अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में अक्सर गंभीर स्थिति में मरीज पहुंचते हैं, जहां हर एक सेकंड कीमती होती है. लेकिन बदहाली का आलम यह है कि टूटे पहिये और जर्जर ढांचा स्ट्रेचर के पहिये जाम हैं या टूटे हुए हैं. इससे परिजनों को उन्हें खींचने में भारी मशक्कत करनी पड़ती है. स्ट्रेचर की हालत इतनी खराब है कि उस पर लेटे मरीज के नीचे गिर जाने का खतरा हमेशा बना रहता है. कई बार स्ट्रेचर न मिलने या खराब होने के कारण परिजन मरीज को गोद में उठाकर या चादर के सहारे वार्ड तक ले जाने को मजबूर हैं.

पदाधिकारी की अनदेखी, मरम्मत के नाम पर खानापूर्ति

स्थानीय लोगों व मरीजों के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन सिर्फ कागजों पर व्यवस्था दुरुस्त रखने का दावा करता है. अस्पताल प्रशासन को कई बार इसकी सूचना दी गयी, लेकिन नये स्ट्रेचर की खरीद या पुराने की मरम्मत के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है. अधिकारियों का रवैया पूरी तरह से उदासीन बना हुआ है. बताते चलें कि एक तरफ सरकार ””””मिशन 60 डेज”””” जैसे अभियानों के जरिए अस्पतालों की सूरत बदलने की बात करती है, वहीं जमुई सदर अस्पताल की यह तस्वीर हकीकत बयां कर रही है. अगर समय रहते उपकरणों की मरम्मत और नई व्यवस्था नहीं की गई, तो किसी दिन यह लापरवाही किसी की जान पर भारी पड़ सकती है.

कहते हैं प्रबंधक

जब इस संबंध में अस्पताल प्रबंधक रमेश कुमार पांडेय से बात की गई, तो उन्होंने रटा-रटाया जवाब देते हुए कहा कि संसाधनों की कमी नहीं है बस उचित रख-रखाव के अभाव में स्ट्रेचर टूट जाता है. जल्द ही नए स्ट्रेचर उपलब्ध करा दिया जायेगा.

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