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भरत चरित्र व रामराज्य प्रसंग ने श्रद्धालुओं को किया भाव विभोर

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भरत चरित्र व रामराज्य प्रसंग ने श्रद्धालुओं को किया भाव विभोर

गिद्धौर. ऐतिहासिक पंचमंदिर परिसर के समीप सनातन संस्कृति सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित नौ दिवसीय विराट महायज्ञ सोमवार की देर संध्या विधिवत रूप से संपन्न हो गया. महायज्ञ के अंतिम दिन रामकथा व रामलीला के भावपूर्ण प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भक्ति और करुणा रस में सराबोर कर दिया. पूरा वातावरण जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा. महायज्ञ में श्रीधाम वृंदावन से पधारे सुप्रसिद्ध कथा वाचक पंडित कृष्णकांत जी महाराज ने श्रीरामकथा के मार्मिक प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन कर श्रोताओं को भावविह्वल कर दिया. कथा के क्रम में उन्होंने सर्वप्रथम श्रवण कुमार के प्रसंग का उल्लेख करते हुए माता-पिता की सेवा, आज्ञा पालन और त्याग के महत्व को विस्तार से बताया. इसके बाद पंडित कृष्णकांत जी महाराज ने भरत चरित्र का अत्यंत भावुक वर्णन किया. कथा में बताया गया कि जब भरत जी ननिहाल से अयोध्या लौटे तो पूरी नगरी में सूनापन और लोगों के बदले हुए भाव देखकर वे व्यथित हो उठे. माता कैकेई से उन्हें जब महाराज दशरथ के देहावसान और भगवान श्रीराम के चौदह वर्षों के वनवास का समाचार मिला, तो वे अत्यंत व्याकुल हो गये. उन्होंने माता कैकेई के निर्णय की कठोर शब्दों में निंदा करते हुए स्वयं को उनका पुत्र मानने से इंकार कर दिया और माता कौशल्या के चरणों में जाकर क्षमा याचना की. इसी क्रम में मंथरा को शत्रुघ्न द्वारा दंडित करने का दृश्य भी कथा में प्रस्तुत किया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावुक हो उठे और कई की आंखें नम हो गयी. इधर, महायज्ञ के अंतर्गत आयोजित रामलीला का भव्य समापन सोमवार की अर्धरात्रि में हुआ. रामलीला में रावण वध, लंका विजय और अयोध्या वापसी के पश्चात भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक का अत्यंत मनोहारी मंचन किया गया. इस अवसर पर पंडाल में दीप प्रज्ज्वलित कर दीपावली जैसा उत्सव मनाया गया, जिससे श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला. संपूर्ण रामलीला के दौरान पंडाल दर्शकों से खचाखच भरा रहा. महायज्ञ के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रतिदिन भव्य भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद ग्रहण किया. आयोजन को शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने में प्रशासन का भी पूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ. कार्यक्रम के सफल संचालन में सनातन संस्कृति सेवा समिति के अध्यक्ष सोनू कुमार, सचिव सुमन कुमार, सह-कोषाध्यक्ष रॉकी कुमार, उपाध्यक्ष राजेश कुमार उर्फ पाजो जी, सदस्य राहुल रावत, युवराज कुमार, राकेश कुमार राम, धीरज रावत, रणबीर राव, संतोष पंडित, ठाकुर अंकित, ब्रह्मदेव कुमार, आदित्य रावत सहित अन्य सदस्य पूरी निष्ठा और समर्पण भाव से जुटे रहे.

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