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औषधीय गुणों से भरपूर चिया की खेती करें किसान

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औषधीय गुणों से भरपूर चिया की खेती करें किसान

लक्ष्मीपुर. नेचर विलेज मटिया की ओर से किसानों को अधिक लाभ दिलाने के लिए एक मुहिम की शुरुआत की है. किसानों को औषधीय गुणों से भरपूर चिया की खेती करने के लिए एक अभियान चलाया है. इस अभियान के तहत जमुई जिले के कई पंचायतों में किसानों के साथ बैठक कर औषधीय गुण वाले चिया की खेती के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रही हैं. किसान भी इससे प्रेरित हो कर चिया की खेती करने के लिए तैयार भी हुए हैं. चिया की खेती से उपजी फसल की खरीद के लिए कार्बो किसान एग्रो कंपनी किसानों के साथ करार किया है. उसी की देखरेख में इसकी खेती करवाई जायेगी. उक्त जानकारी देते हुए नेचर विलेज मटिया के संस्थापक पूर्व सीओ निर्भय प्रताप सिंह ने बताया कि जिले के झाझा प्रखंड में करीब 100 एकड़ भूमि पर चिया की खेती करने का लक्ष्य रखा गया है.

60 से 70 किसान खेती करने के लिए तैयार

पूर्व सीओ निर्भय प्रताप सिंह ने बताया कि अभी तक 60-70 किसान इस खेती के लिए तैयार हो चुके हैं. किसान नागेश्वर यादव जो झाझा के भीटरा गांव के रहने वाले हैं. उन्होंने 10 कट्ठा ज़मीन पर चिया की बुनाई की शुरुआत कर दी है. उन्होंने कहा कि परंपरागत खेती की तुलना में चिया की खेती से होने फायदे 20-30 प्रतिशत आय में बढ़ोतरी होगी. ⁠मात्र एक पानी का पटवन, ⁠बहुत ही कम रसायन का ज़रूरत, गेहूं की तुलना में ⁠मवेशी इस पौधा को नहीं खाते है. वहीं इसकी खेती करने से ⁠पानी और ज़मीन प्रदूषित नहीं होती है. ⁠कई औषधीय गुण से भरपूर चिया स्वास्थ्य के लिये लाभकारी है. उन्होंने कहा कि गुरुवार को लक्ष्मीपुर प्रखंड अंतर्गत खिलार, बंगारडीह, गुरिया गांव में किसानों के साथ बैठक कर चिया की खेती करने पर बल दिया गया. बैठक में प्रेरित होकर खिलार में 06 एकड़, बंगारडीह में 02 अकड़ तथा गुरिया गांव में भी किसान चिया की खेती करने के लिए इच्छुक है. उन्होंने जमुई जिले के किसानों से निवेदन किया है कि कम से कम 1-2 एकड़ ट्रायल पर खेती कर के देखें. अगर सही परिणाम आये तो अगली बार से ज़्यादा संख्या में धान और गेहूं के अलावा भी चिया की खेती करे.

चिया की खेती करने के लिए किसानों को किया जागरूक

बरहट. प्रखंड के कटौना और केवाल गांव को नेचर विलेज के तहत आत्मनिर्भर गांव बनाने को लेकर कटौना पंचायत मुखिया कपिलदेव प्रसाद की अध्यक्षता में गादी कटौना पुस्तकालय भवन में गुरुवार को बैठक की गई. बैठक में पंचायत के किसानों के साथ-साथ कई गणमान्य लोगों ने भाग लिया. मौके पर उपस्थित लक्ष्मीपुर के निवर्तमान सीओ लक्ष्मीपुर सह नेचर विलेज के संस्थापक निर्भय प्रताप सिंह ने ग्रामीणों को औषधि फसल चिया की खेती करने को लेकर जागरुक किया. उन्होंने कहा कि चिया की खेती पहले विदेश में की जाती थी. एक फूल वाला पौधा चिया मूल रूप से मध्य व दक्षिण देशों की प्रजाति है. लेकिन भारत कृषि प्रधान देश है, यहां के किसान भी चिया की खेती कर रहे हैं. इसे बढ़ावा देने को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी अपने मन की बात भी की है. मन की बात कार्यक्रम में पीएम के द्वारा इसकी खेती करने को लेकर किसानों को प्रेरित किया गया है.

कम लागत में होता है अच्छा मुनाफा

किसानों को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि हम लोग सिर्फ पारंपरिक खेती आज तक करते आ रहे हैं. जिसमें लागत के अनुसार मुनाफा कम पाया पाया जा रहा है. लेकिन चिया की खेती में कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं. उन्होंने बताया कि एक बीघा में चिया की खेती करने पर 700 से 750 रुपये का खर्च आता है. जबकि किसानों को 25 से 30 हजार रुपया मुनाफा हो सकता है. इस दौरान कटौना और केवाल गांव के कई किसानों ने चिया बीज की खरीदारी भी किया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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