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जिलेभर में हर्षोल्लास के साथ मनी मकर संक्रांति

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जिलेभर में हर्षोल्लास के साथ मनी मकर संक्रांति

जमुई . सूर्य के उत्तरायण होने के विशेष अवसर पर मकर संक्रांति पर्व मंगलवार को जिलेभर में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. मकर संक्रांति के उपलक्ष्य पर श्रद्धालुओं ने नदी, तालाबों में आस्था की डुबकी लगाते हुए शिव मंदिरों में पूजा-अर्चना कर अपने और अपने परिवार के मंगल कामना का आशीर्वाद मांगा. अक्षत, तिलवा, तिल को छूकर ब्राह्मणों को दान दिया. इसके उपरांत परिजनों के साथ दही, चूड़ा, तिलकुट, तिलवा तथा सब्जी का आंनद लिया. सनातन धर्म में मकर संक्रांति का अपना विशेष महत्व है. पंडित शिरोमणि झा ने बताया कि मकर संक्रांति के दिन सुबह अपने दैनिक क्रियाकलाप के बाद स्नान कर तांबे के लोटे में लाल फूल और अक्षत तथा तिल डालकर भगवान सूर्य को अर्घ्य देने से भगवान सूर्य को अर्घ्य देने से लाभ होता है. साथ ही भगवान गणेश माता लक्ष्मी, भगवान शिव की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है और मनुष्य का सोया भाग्य भी खुल जाता है. उन्होंने बताया कि इस दिन श्रीमद्भागवत कथा का एक अध्याय या गीता का पाठ करने से सभी मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं.

स्नान के बाद किया लोगों ने किया दान

चकाई. प्रखंड क्षेत्र में मंगलवार को मकर संक्रांति पर्व धूम-धाम से मनाया गया. अहले सुबह से ही लोगों ने अजय नदी, धोबघट नदी, नावा आहर, जोर, तालाब आदि में पवित्र स्नान के लिए डुबकी लगाई तथा स्नान के उपरांत मंदिरों में पूजा पाठ कर इस मौके पर तिल, गुड़ का दान किया. अपने अपने घरों में पंडित, पुरोहित या ब्राह्मण को दही चूड़ा, तिल, लाई, तिलकुट का ज्योनार करा कर यथा संभव दान दक्षिणा देकर विदा कराने के बाद खुद सपरिवार चूड़ा दही ग्रहण किया. इस मौके पर बड़ी संख्या में लोगों ने चकाई से देवघर जाकर बाबा वैद्यनाथ की पूजा अर्चना की. स्थानीय शिव मंदिरों सहित अन्य देवी देवताओं के मंदिरों में भी बड़ी संख्या में लोगों एवं महिलाओं ने पूजा अर्चना की. बहुत दिनों के बाद पहली बार सारे चकाईवासी 14 जनवरी को ही मकर संक्रांति का पर्व एक ही दिन मनाया. इस बार पर्व को मनाने में दिन या समय का कोई मतांतर नहीं था.

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