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महात्मा बुद्ध के विश्व शांति के संदेश आज के दौर हेतु बेहद प्रासंगिक

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महात्मा बुद्ध के विश्व शांति के संदेश आज के दौर हेतु बेहद प्रासंगिक

-बुद्ध पूर्णिमा पर विशेष: युद्ध नहीं बुद्ध है आज की पुकार सोनो. आज दुनिया के कई क्षेत्र में युद्ध हो रहा है. चारों ओर अशांति मची है. युद्ध की विभीषिका से त्रस्त लोगों को युद्ध नहीं बल्कि बुद्ध चाहिए. उनके विश्व शांति के संदेश आज की जरूरत है. बुद्ध पूर्णिमा के पूर्व संध्या पर अपने विचार रखते हुए प्रखंड के चुरहेत निवासी शिक्षाविद कामदेव सिंह बताते हैं कि महात्मा बुद्ध के जीवन दर्शन और उनके सिद्धांतों पर ही चलकर समस्त विश्व में शांति स्थापित हो सकती है. महात्मा बुद्ध के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितना उनके समय में था. आज विश्व जिस तरह तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर खड़ा है उसमें महात्मा बुद्ध के विश्व शांति का संदेश बड़े मायने रखते है. उनके जीवन दर्शन लोगों के लिए अहिंसा व प्रेम का प्रदर्शक साबित होगा. श्री सिंह ने कहा कि वैशाख पूर्णिमा के दिन ही महात्मा बुद्ध का जन्म हुआ था. नेपाल की तराई में स्थित कपिलवस्तु के निकट लुंबिनी नमक आम के बगीचे में महामाया देवी द्वारा एक शिशु को जन्म दिया गया था. वही बच्चा बाद में सिद्धार्थ कहलाया और आगे चलकर सारे विश्व में प्रेम शांति और अहिंसा का संदेश देने वाला महात्मा बुद्ध हो गया. क्षत्रिय कुल में जन्म लेने वाले बुद्ध ने अपने राज पाठ, पत्नी, बच्चे को छोड़कर 29 वर्ष की अवस्था में घर से निकल गए थे और 6 वर्ष की कठिन साधना के बाद बुद्ध पूर्णिमा के दिन ही उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई थी. महात्मा बुद्ध ने सारे विश्व में शांति का संदेश दिया. वे विश्व कल्याण और सभी जीवों से प्रेम करने की बात कही थी. 80 वर्ष की उम्र में बुद्ध का देहावसान कुशीनगर में हुआ था. उस दिन भी वैशाख पूर्णिमा ही था जिसे हम बौद्ध धर्म में महापरिनिर्वाण कहते हैं. बुद्ध पूर्णिमा सिर्फ जयंती नहीं बल्कि ज्ञान प्राप्त का दिन तथा महापरिनिर्वाण दिन भी है. उनका संदेश खासकर आज के परिपेक्ष्य में बेहद प्रासंगिक है. उनके बताए रास्ते पर चलकर ही हम विश्व में शांति की कामना कर सकते हैं. उनके जीवन दर्शन में हिंसा का कोई स्थान नहीं था.

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