Labour Card: श्रम विभाग के शिविर में श्रम कार्ड बनाने के नाम पर पैसे मांगने का आरोप, डीडीसी ने दिए जांच के आदेश

Labour Card: जमुई जिले के बरहट प्रखंड में आयोजित श्रम विभाग के सहयोग शिविर को लेकर विवाद गहरा गया है. नुमर पंचायत में आयोजित शिविर की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें एक कथित साइबर कैफे संचालक श्रम विभाग के काउंटर पर प्रखंड श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी के बगल में बैठा नजर आ रहा है. तस्वीर सामने आने के बाद सरकारी शिविरों में बिचौलियों की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे हैं. मामले की गंभीरता को देखते हुए उप विकास आयुक्त ने जांच के आदेश दिए हैं.

By Pintu Pranav | June 18, 2026 3:18 PM
बरहट से शशिलाल की रिपोर्ट

Labour Card: बीते मंगलवार को नुमर पंचायत में आयोजित सहयोग शिविर से जुड़ा है. वायरल तस्वीर में मेरून रंग की शर्ट पहने एक व्यक्ति श्रम विभाग के काउंटर पर अधिकारी के ठीक बगल में बैठा दिखाई दे रहा है.व्यक्ति की फोटो वायरल होने के बाद स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है.लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि वह व्यक्ति विभागीय कर्मचारी नहीं था तो उसे सरकारी काउंटर पर बैठने की अनुमति कैसे मिली. यह भी चर्चा है कि सरकारी योजनाओं के संचालन में कहीं बिचौलियों की भूमिका तो नहीं बढ़ रही है.

नोट-वायरल तस्वीर या फुटेज की पुष्टि प्रभात खबर नहीं करता है

श्रम कार्ड बनाने में पैसे मांगने का आरोप

नुमर गांव निवासी प्रदीप यादव और साकेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि उन्होंने श्रम कार्ड बनवाने के लिए कई बार आवेदन किया, लेकिन महीनों बाद भी उनका कार्ड नहीं बन सका. उनका कहना है कि कार्यालय के लगातार चक्कर लगाने के बावजूद कोई समाधान नहीं हुआ.ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ लोगों का काम आसानी से हो जाता है, जबकि आम आवेदकों को बार-बार लौटाया जाता है. उन्होंने यह भी दावा किया कि श्रम कार्ड बनवाने के नाम पर 1200 रुपये की मांग की गई थी. हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है.

जांच की मांग, ग्रामीणों ने उठाए सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि हाल के वर्षों में बने श्रम कार्डों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं. उनका आरोप है कि लाभार्थियों के चयन और कार्ड निर्गत करने की प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं.

डिडीसी ने लिया संज्ञान, मांगा स्पष्टीकरण

मामले की जानकारी मिलने के बाद जमुई के डीडीसी सुभाष चंद्र मंडल ने सख्त रुख अपनाया है. उन्होंने कहा कि सरकारी कार्यों में किसी भी प्रकार की अनियमितता या बिचौलियों की भूमिका स्वीकार नहीं की जाएगी. उन्होंने ने प्रखंड विकास पदाधिकारी को श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी से स्पष्टीकरण मांगने और पूरे मामले की जांच कराने का निर्देश दिया है.

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