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Home बिहार जमुई संघर्ष को सलाम : ठेला चलाने वाले मजदूर की बेटी बनी बिहार पुलिस की सिपाही

संघर्ष को सलाम : ठेला चलाने वाले मजदूर की बेटी बनी बिहार पुलिस की सिपाही

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संघर्ष को सलाम : ठेला चलाने वाले मजदूर की बेटी बनी बिहार पुलिस की सिपाही

मजदूर पिता के संघर्ष और बेटी की मेहनत ने लिखी प्रेरणा की नई इबारत, बैंक खाता खुलवाने भी ठेले पर ही पहुंची रजनी, संघर्ष, मेहनत और हौसले की मिसाल बनी भजौर की रजनी कुमारी

फोटो 14 अपने माता पिता के साथ रजन

जमुई से गुलशन कश्यप की रिपोर्ट:-

जमुई.

सफलता की कई कहानियां सुनने को मिलती हैं, लेकिन जिले के भजौर गांव की रजनी कुमारी की कहानी संघर्ष, मेहनत और संकल्प की ऐसी मिसाल है, जो हर किसी को प्रेरित करती है। एक मजदूर पिता की बेटी रजनी ने आर्थिक तंगी और अभावों को मात देकर बिहार पुलिस में सिपाही पद पर चयनित होकर यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के आगे कठिन परिस्थितियां भी हार मान लेती हैं। उनकी सफलता केवल नौकरी पाने की उपलब्धि नहीं, बल्कि उस पिता के संघर्ष की जीत है, जिसने ठेला चलाकर बेटी के सपनों को साकार किया।

मजदूरी और ठेला चलाकर बेटी को पढ़ाया

रजनी के पिता दशरथ पासवान वर्षों से मजदूरी और ठेला चलाकर परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। दिनभर की मेहनत से होने वाली आमदनी से ही घर का खर्च और बच्चों की पढ़ाई चलती रही। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने कभी बेटी की शिक्षा में बाधा नहीं आने दी। रजनी की प्रारंभिक शिक्षा कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में हुई, जहां उन्होंने छठी से आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की।

सीमित संसाधनों में की तैयारी, हासिल की सफलता

रजनी ने वर्ष 2024 में इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की और इसके बाद बिहार पुलिस भर्ती परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई जारी रखी और लगातार मेहनत करती रहीं। उनकी लगन रंग लाई और 17 दिसंबर 2025 को पीटी परीक्षा में सफलता मिली। जून 2026 में मेडिकल प्रक्रिया पूरी होने के बाद बिहार पुलिस में उनका चयन सुनिश्चित हो गया।

माता-पिता को दिया सफलता का श्रेय

रजनी अपनी सफलता का पूरा श्रेय माता-पिता को देती हैं। उनका कहना है कि पिता ने कभी आर्थिक परेशानियों को उनकी पढ़ाई के रास्ते में नहीं आने दिया। बेटी की उपलब्धि पर भावुक हुए दशरथ पासवान ने कहा कि मजदूरी और ठेला चलाकर बेटी को पढ़ाया। जीवन में अनेक कठिनाइयां आईं, लेकिन आज बेटी की सफलता ने सारी परेशानियों को भुला दिया है।

सफलता के बाद भी नहीं भूली संघर्ष की पहचान

मंगलवार को रजनी बैंक में खाता खुलवाने के लिए अपने माता-पिता के साथ उसी ठेला गाड़ी पर बैठकर पहुंचीं, जिससे उनके पिता वर्षों से परिवार का गुजारा करते रहे हैं। करीब तीन किलोमीटर का सफर ठेले से तय कर बैंक पहुंची रजनी ने कहा कि यह ठेला उनके पिता की मेहनत, त्याग और संघर्ष का प्रतीक है। इसलिए वह अपनी सफलता के इस महत्वपूर्ण पड़ाव पर भी उसे अपने साथ रखना चाहती थीं। आज रजनी की सफलता पूरे क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

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