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Home बिहार जमुई उर्दू भाषा का जन्म व विकास भारत में ही हुआ – नागमणि

उर्दू भाषा का जन्म व विकास भारत में ही हुआ – नागमणि

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उर्दू भाषा का जन्म व विकास भारत में ही हुआ –  नागमणि

जमुई . जिला मुख्यालय स्थित शुक्रदास भवन में गुरुवार को उर्दू निदेशालय, मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग व जिला प्रशासन के निर्देशानुसार फरोग-ए-उर्दू सेमिनार, कार्यशाला एवं मुशायरा का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में जिले के सभी उर्दू शिक्षक के साथ-साथ उर्दू भाषा प्रेमियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया. कार्यक्रम का शुभारंभ एसपी विश्वजीत दयाल, डीडीसी सुभाषचंद्र मंडल, जिला सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी बिनोद प्रसाद, अधीक्षक मध्य निषेध सुभाष कुमार, प्रभारी पदाधिकारी जिला उर्दू भाषा कोषांग नागमणि कुमार वर्मा, उप समाहर्ता भूमि सुधार सुजीत कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी सौरव कुमार, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया. इस दौरान सर्वप्रथम डेलिगेट्स एवं मोटिवेशनल स्पीकर व प्रशिक्षक फुरकान मुमताज खान ने शिक्षकों को उनके कर्तव्यों के प्रति जागरूक करते हुए उर्दू भाषा के संरक्षण, संवर्धन और शिक्षा में इसकी भूमिका पर विस्तार से चर्चा की. पुलिस अधीक्षक ने अपने संबोधन में उर्दू भाषा की मिठास और गंगा-जमुनी तहजीब का उल्लेख करते हुए कहा कि उर्दू समाज को जोड़ने वाली भाषा है, जो आपसी भाईचारे और सौहार्द को मजबूत करती है. वहीं प्रभारी पदाधिकारी जिला उर्दू भाषा कोषांग नागमणि कुमार वर्मा ने कहा कि उर्दू भाषा का जन्म और विकास इसी देश में हुआ है. यह भाषा समाज को जोड़ने का कार्य करती है और बिहार सरकार की अनेक योजनाओं के साथ उर्दू द्वितीय राजभाषा के रूप में जुड़ी हुई है. उप विकास आयुक्त ने कहा कि भाषा किसी एक समाज या वर्ग की नहीं होती. उर्दू ऐसी भाषा है, जिसमें अनेक भाषाओं का समन्वय देखने को मिलता है, जो इसे और समृद्ध बनाता है. कार्यक्रम के दूसरे सत्र में मुशायरा का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय शायरों और कवियों के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर के शायरों ने भी शिरकत की. श्रोताओं ने मो अमान, नसीम साज़ और मासूम रजा अमरथी की रचनाओं को खूब सराहा गया. मौके पर मो सैयद जुनैद अली, मो सादिक, उर्दू अनुवादक मो जुल्फिकार अली भुट्टो, मो अयूब अंसारी सहित कई प्रबुद्धजन उपस्थित रहे. कार्यक्रम ने उर्दू भाषा के प्रति जागरूकता और प्रेम को नई ऊर्जा प्रदान की गई.

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