टेलवा ब्रिज का निरीक्षण कर लौट गये डीआरएम, समस्या लेकर इंतजार करते रह गये ग्रामीण

आसनसोल रेल मंडल के डीआरएम संग्रह मौर्य मंगलवार को लाहाबन-सिमुलतला रेलखंड के बीच स्थित टेलवा ब्रिज (ब्रिज संख्या-676) का निरीक्षण करने पहुंचे.

By PANKAJ KUMAR SINGH | March 31, 2026 9:39 PM

सिमुलतला. आसनसोल रेल मंडल के डीआरएम संग्रह मौर्य मंगलवार को लाहाबन-सिमुलतला रेलखंड के बीच स्थित टेलवा ब्रिज (ब्रिज संख्या-676) का निरीक्षण करने पहुंचे. यह वही पुल है, जहां बीते 27 दिसंबर को सीमेंट लदी मालगाड़ी के 20 डिब्बे बेपटरी हो गये थे और नौ डिब्बे पुल से नीचे गिर गये थे. निरीक्षण के दौरान डीआरएम ने सुरक्षा मानकों को लेकर सख्त रुख अपनाया. उन्होंने जसीडीह के सहायक अभियंता आरबी महतो से पुल की वर्तमान स्थिति और चल रहे मिट्टी भराई कार्यों को लेकर कई अहम सवाल किये. हालांकि, इस दौरान उन्होंने स्थानीय पत्रकारों से दूरी बनाये रखी. इधर, सिमुलतला स्टेशन पर बड़ी संख्या में ग्रामीण अपनी समस्याओं को लेकर डीआरएम के आने का इंतजार करते रहे, लेकिन वे पुल का निरीक्षण कर सीधे जसीडीह लौट गये. इससे ग्रामीणों को बैरंग वापस लौटना पड़ा, जिससे उनमें नाराजगी देखी गयी. उल्लेखनीय है कि बीते दिसंबर माह में हुए रेल हादसे के कारण करीब 75 घंटे तक रेल परिचालन ठप रहा था. इस घटना के प्रशासनिक परिणाम भी सामने आए थे, जिसमें तत्कालीन डीआरएम विनीता श्रीवास्तव का तबादला कर दिया गया था. मामला कोलकाता कैट कोर्ट तक पहुंच गया था. निरीक्षण के बीच सिमुलतला स्टेशन की बदहाली का मुद्दा भी गरमाया रहा. यात्रियों की सबसे बड़ी समस्या फुट ओवरब्रिज का अभाव है. ब्रिटिश कालीन पुराने पुल को नए निर्माण के वादे के साथ तोड़ दिया गया था, लेकिन अब तक नया पुल नहीं बन पाया है. यात्रियों को प्लेटफॉर्म बदलने के लिए दूर स्थित घुमावदार रैंप पुल का सहारा लेना पड़ता है, जिससे खासकर बुजुर्गों और मरीजों को भारी परेशानी होती है. वहीं, गेट नंबर-36 बंद होने के बाद बनाये गये सब-वे की डिजाइन भी सवालों के घेरे में है. संकरा और त्रुटिपूर्ण होने के कारण अक्सर बड़े वाहन इसमें फंस जाते हैं. यह मार्ग बिहार और झारखंड को जोड़ता है, लेकिन वर्तमान स्थिति के कारण स्थानीय व्यापार पूरी तरह प्रभावित हुआ है. कुल मिलाकर, एक ओर जहां रेल प्रशासन बुनियादी ढांचे को दुरुस्त करने का दावा कर रहा है, वहीं सिमुलतला के यात्री और व्यापारी खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं. अब देखना यह है कि डीआरएम के इस निरीक्षण के बाद टेलवा ब्रिज की मजबूती और स्थानीय समस्याओं के समाधान को लेकर क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं.