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जहां हंसी होती है, वहां शोक नहीं रहता – डॉ निरंजन

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जहां हंसी होती है, वहां शोक नहीं रहता – डॉ निरंजन

जमुई. विश्व हास्य दिवस के अवसर पर नगर परिषद जमुई स्थित कल्याणपुर में मानव जीवन में हंसी के महत्व विषय पर एक परिचर्चा आयोजित की गयी. कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ शिक्षक एवं हास्य कवि श्री दिनेश मंडल ने की. परिचर्चा की अध्यक्षता करते हुए श्री मंडल ने कहा कि विश्व हास्य दिवस प्रत्येक वर्ष मई के प्रथम रविवार को मनाया जाता है. इसकी शुरुआत 10 मई 1998 को मुंबई में लाफ्टर योगा मूवमेंट के जनक डॉ मदन कपाड़िया ने की थी. उन्होंने कहा कि हंसी जीवन का संगीत है और यह केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि जीवन की आवश्यकता है. मुख्य वक्ता के रूप में राजकीय महिला डिग्री कॉलेज, जमुई के अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. गौरी शंकर पासवान ने कहा कि हंसी एक प्राकृतिक और अनमोल संजीवनी है, जो निःशुल्क होते हुए भी शारीरिक, मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य देती है. उन्होंने कहा कि चिंता, तनाव और अवसाद जैसी समस्याओं का सरल उपचार हंसी में छिपा है. डॉ. पासवान ने कहा, मुस्कान वह वक्र रेखा है, जो सीधी से सीधी समस्याओं को भी हल कर सकती है. एक मुस्कान सौ गमों को दूर कर देती है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि हंसी मानव जीवन की वह संजीवनी बूटी है, जो व्यस्तता और तनाव के युग में संतुलन बनाये रखती है.

चिंता, अकेलापन व अवसाद का समाधान है हंसी

एसपीएस महिला कॉलेज के इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो. संजीव कुमार सिंह ने कहा कि हंसी जीवन के अंधकार को दूर करने वाला सूर्य है. यह चिंता, अकेलापन और अवसाद का समाधान है. वरिष्ठ अधिवक्ता मुरारी झा ने हंसी को सरल चिकित्सा बताया और कहा कि हंसी दिलों को जोड़ने वाला एक जादू है. वहीं वरीय अधिवक्ता रामचंद्र रवि ने कहा कि हंसी प्रकृति का निःशुल्क उपहार है और जो व्यक्ति नित्य हंसता है, वह दीर्घायु होता है. एसपीएस महिला डिग्री कॉलेज के प्रो आनंद कुमार सिंह ने हंसी को स्वास्थ्यवर्धक सिरप की संज्ञा दी. उन्होंने कहा कि यह सिरप जिसे भी मिले, उसके पास रोग टिक नहीं सकता. सरस्वती अर्जुन एकलव्य डिग्री महाविद्यालय के इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ निरंजन कुमार दुबे ने हंसी को योग की संज्ञा देते हुए कहा कि जहां हंसी होती है, वहां शोक का स्थान नहीं होता. मौके पर कई प्रबुद्ध लोग उपस्थित थे, जिन्होंने हंसी के महत्व पर अपने विचार रखे और इसके बहुआयामी लाभ को समाज तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया. कार्यक्रम का उद्देश्य शांति, सामाजिक सौहार्द और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देना रहा.

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