बरहट. प्रखंड स्थित कुकुरझप डैम का जलस्तर लगातार घटने से क्षेत्र के किसानों की चिंता बढ़ गयी है. रबी फसल की सिंचाई प्रभावित होने से गेहूं की फसल सूखने लगी है. किसानों का कहना है कि समय पर बुवाई के बावजूद पानी नहीं मिलने से अब फसल बचाना मुश्किल होता जा रहा है. बरहट के दिनेश यादव, भालुका के महेंद्र यादव, पेंघी के अरुण सिंह, जावातरी के महेश यादव, रामशरण महतो, जीवन कुमार, चैती देवी, सुकन्या देवी, आझोला देवी और रूक्मिणी देवी सहित कई किसानों ने बताया कि हर वर्ष वे जल संसाधन विभाग को सिंचाई शुल्क अदा करते हैं, लेकिन इसके बावजूद डैम से खेतों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाता. इस वर्ष स्थिति और भी गंभीर हो गई है. खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं और गेहूं की फसल पीली पड़ रही है. किसानों का आरोप है कि पहले डैम सालभर लबालब रहता था और सिंचाई में कोई दिक्कत नहीं होती थी, लेकिन मछली पालन शुरू होने के बाद से जलस्तर में गिरावट देखी जा रही है. उनका कहना है कि मछली पालन से जुड़े कर्मियों द्वारा पानी का स्तर नियंत्रित करने के नाम पर धीरे-धीरे पानी निकाला गया, जिससे डैम में पानी की कमी हो गयी. इसका सीधा असर किसानों की खेती पर पड़ रहा है. विभागीय पदाधिकारी भी स्वीकार करते हैं कि रबी फसल को देखते हुए डैम से पानी छोड़ा गया, लेकिन जलस्तर कम होने के कारण पानी आसपास के खेतों तक ही सीमित रह गया. दूरवर्ती गांवों के किसानों को इसका लाभ नहीं मिल सका. नोडल मत्स्य पदाधिकारी पल्लवी कुमारी ने बताया कि डैम में पानी की कमी है. मामले से वरीय पदाधिकारी को अवगत करा दिया गया है तथा केयरटेकर को आवश्यक निर्देश दिये गये हैं. इधर, किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं छोड़ा गया तो वे आंदोलन की रणनीति बनाने को बाध्य होंगे. किसानों की मांग है कि डैम के जल प्रबंधन की पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित की जाये, ताकि सिंचाई और मत्स्य पालन दोनों गतिविधियां संतुलित रूप से संचालित हो सके.