[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home बिहार जमुई संघर्ष कर बनायी पहचान, अब बनेगी पीएम की मेहमान

संघर्ष कर बनायी पहचान, अब बनेगी पीएम की मेहमान

0
संघर्ष कर बनायी पहचान, अब बनेगी पीएम की मेहमान

जमुई. कभी हालात ऐसे थे कि घर का गुजारा करना मुश्किल था. महज तीन हजार रुपये की मासिक आमदनी थी, जिसमें मुश्किल से भोजन मिल पाता था. बच्चों की पढ़ाई तो दूर की बात थी. पर संघर्ष कर जमुई जिले के सोनो के रहने वाली सोनी देवी ने खुद को ऐसा साबित किया कि अब प्रधानमंत्री की खास मेहमान बनने वाली हैं. सोनी देवी का चयन बिहार के उन 61 दंपतियों में किया गया है, जो दिल्ली जाकर स्वतंत्रता दिवस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खास मेहमान बनेंगे. सोनी देवी की कहानी काफी संघर्षों से भरी है. बताते चलें कि सोनी देवी जिले के सोनो प्रखंड क्षेत्र के ढोढरी पंचायत के पिपराबांक गांव की रहने वाली है. अब से करीब 6 साल पहले वर्ष 2018 में इन्होंने अपना पहला कारोबार शुरू किया था, लेकिन उसके पहले उनकी स्थिति इतनी खराब थी कि परिवार का भरण पोषण काफी मुश्किल से हो पाता था. सोनी ने संघर्ष करना जारी रखा तथा अपने संघर्ष के बल पर न सिर्फ अपने आप को साबित किया बल्कि अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बना लिया.

तीन हजार में करना पड़ता था पूरे महीने का गुजारा

सोनी देवी की कहानी संघर्षों से भरी है. सोनी देवी के पति अजय कुमार सिंह गांव में बच्चों को ट्यूशन पढ़ाते थे. सोनी ने बताया कि वर्ष 2018 से पहले उनके परिवार की माली हालत ठीक नहीं थी. मुश्किल से महीने में दो से तीन हजार की मासिक आमदनी होती थी. जिससे बच्चों की अच्छी पढ़ाई तो दूर परिवार का भरण पोषण करना भी काफी मुश्किल हो जाता था. सोनी को सिलाई आती थी, लेकिन हाथ में हुनर होने के बावजूद वह कुछ नहीं कर पा रही थी. इसके बाद सोनी ने वर्ष 2018 में जीविका से 10 हजार का ऋण लिया, फिर धीरे-धीरे उनके जीवन में परिवर्तन आना शुरू हो गया. 2018 में सोनी देवी ने गांव में चल रही आरती जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़कर 10 हजार का ऋण लेकर साड़ी का व्यवसाय शुरू किया. साड़ी का व्यवसाय अच्छे से चला लेने के बाद पहले ऋण को चुकाकर, उन्होंने पुनः जीविका से 50 हजार का ऋण लिया और साड़ी के साथ-साथ शृंगार आइटम और सिलाई मशीन खरीद कर सिलाई का काम भी शुरू कर दिया.

खुद के रोजगार के साथ-साथ पति को भी दिया रोजगार

सोनी देवी ने बताया कि कोरोना के समय में उन्होंने आपदा को अवसर में बदलकर उसे आय का एक बेहतर जरिया बनाया. सोनी ने घर पर ही मास्क की सिलाई की और उससे अच्छी खासी आमदनी कर अपने दुकान में कई और बड़े बदलाव किये. इसके बाद उन्होंने अपने बचत से पति के लिए भी अलग से जनरल स्टोर खोल दिया तथा उन्हें भी स्वरोजगार से जोड़ दिया. सोनी देवी के इसी संघर्ष को देखते हुए जीविका के द्वारा उनका नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशेष मेहमान की सूची में शामिल करने के लिए भेजा गया था. जिस पर मोहर लगा दी गयी तथा सोमवार को सोनी अपने पति तथा जिले के अन्य तीन दंपतियों के साथ दिल्ली के लिए रवाना हो गयी. सोनी ने कहा कि वह काफी खुश है, आज वह जो कुछ भी है. इसका श्रेय पूरी तरह से जीविका को जाता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel