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Home बिहार जमुई नकटी में छह हजार मेहमानों के साथ तीन प्रवासी शिकारी व नागी में मिले दो दुर्लभ पक्षी

नकटी में छह हजार मेहमानों के साथ तीन प्रवासी शिकारी व नागी में मिले दो दुर्लभ पक्षी

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नकटी में छह हजार मेहमानों के साथ तीन प्रवासी शिकारी व नागी में मिले दो दुर्लभ पक्षी

झाझा . बिहार में पक्षी पर्यटन के प्रमुख केंद्र नागी–नकटी में एशियाई मध्य शीतकालीन जलपक्षी गणना छह से नौ फरवरी तक सफलतापूर्वक संपन्न हुई. इस वर्ष राज्य के अधिकतर जिलों में नये जलाशयों को चिह्नित करते हुए करीब 130 स्थलों पर जलपक्षियों की गणना की जा रही है. जमुई जिला इस मामले में अग्रणी रहा, जहां 13 जलाशयों में गणना कार्य किया गया, जो राज्य में सर्वाधिक है. पक्षी विशेषज्ञ डॉ अरविंद कुमार मिश्रा ने बताया कि किसी भी जलाशय की वास्तविक स्थिति का आकलन वहां पक्षियों की उपस्थिति से होता है. इस गणना का उद्देश्य जलाशयों की वर्तमान स्थिति का मूल्यांकन, उन पर मंडराते खतरों का अध्ययन तथा आम लोगों में जागरूकता और सहभागिता बढ़ाना है. चयनित स्थलों पर यह गणना वर्ष में तीन बार—शीत की शुरुआत, मध्य शीतकाल और शीत समाप्ति के बाद—की जाती है. जमुई जिले के नागी, नकटी और गरही जलाशय इसमें प्रमुख हैं. यह गणना राज्य सरकार के दिशा-निर्देश पर डॉ मिश्रा के नेतृत्व में वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार सरकार के सहयोग से की गई, जिसमें बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (बीएनएचएस) का तकनीकी सहयोग भी शामिल रहा. दल में पटना के मनीष कुमार, नागी के युवा पक्षी विशेषज्ञ संदीप कुमार, मनीष कुमार यादव, आरुष कुमार, श्याम सुंदर यादव, बर्ड गाइड त्रिदेव, सागर कुमार सहित अन्य शामिल थे. वन प्रमंडल पदाधिकारी तेजस जायसवाल, क्षेत्र पदाधिकारी सुजीत कुमार तथा वनरक्षी मनोरंजन कुमार का भी सराहनीय सहयोग रहा. स्थानीय सहयोगियों में नाविक शेषनाथ यादव, मनोज यादव, राजा ठाकुर, नागेश्वर मंडल, योगेंद्र यादव व अर्जुन यादव का योगदान उल्लेखनीय रहा. चार दिवसीय भ्रमण के दौरान नागी, नकटी, गरही जलाशय के अलावा बेला टांड, पैलबाजन, देवन आहर, झाझा रेलवे तालाब, धमना आहर, राजा आहर, दिघरा ताल, सोनो प्रखंड के तिलवरिया व परमनिया जलाशय में पक्षियों की गणना की गयी. डॉ मिश्रा ने बताया कि नकटी पक्षी आश्रयणी में सर्वाधिक 40 प्रजातियों के करीब 5,500 से अधिक पक्षियों की गिनती हुई. इनमें प्रवासी यूरेशियन कूट लगभग 2,500, रेड क्रेस्टेड पोचार्ड (लालसर) करीब 1,500 तथा स्थानीय लेसर व्हिसलिंग डक (छोटी सिल्ली) लगभग 1,500 की संख्या में दर्ज की गयी. इसके अलावा तीन प्रवासी शिकारी पक्षी—पेरिग्रीन फाल्कन, बूटेड ईगल और ग्रेटर स्पॉटेड ईगल—का दिखना विशेष आकर्षण रहा. कुल मिलाकर नकटी में लगभग 6,000 पक्षी दर्ज किये गये. नागी जलाशय में पक्षियों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही. यहां जलस्तर भी कम पाया गया, जिसका कारण सिंचाई के लिए छोड़ा गया पानी बताया गया. हालांकि नागी में दो दुर्लभ पक्षी—कॉमन मर्गेन्सर और ग्रेटर व्हाइट फ्रंटेड गूज—देखे गये. कॉमन मर्गेन्सर बिहार में अत्यंत दुर्लभ हैं और नागी में इन्हें पहली बार दर्ज किया गया. ग्रेटर व्हाइट फ्रंटेड गूज को पहचानने में नागी के पक्षी विशेषज्ञ मनीष कुमार व संदीप कुमार की भूमिका सराहनीय रही. पक्षी गणना के दौरान वन कर्मियों के सहयोग से यह अभियान सफलतापूर्वक संपन्न हुआ.

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