बरहट. वह भूमि जो कभी बंजर थी और श्मशान बन चुकी थी. वहां सिर्फ जलते शवाें की आग व धुआं ही दिखायी देते थे, लेकिन आज उसी भूमि पर हरियाली की चादर बिछी है. ऐसा संभव हो पाया है एक किसान के अथक प्रयास व उनके द्वारा अपनायी गयी प्राकृतिक पद्धति जैविक खेती से. प्रखंड अंतर्गत कटौना क्षेत्र के योगेंद्र पंडित की लगभग पांच एकड़ की पैतृक भूमि बंजर होने के कारण श्मशान के रूप में उपयोग में लाया जाता था. लेकिन बीते एक दशक से योगेंद्र ने बिना किसी रासायनिक खाद व कीटनाशक के उपयोग से जैविक खेती करके यह साबित कर दिया है कि संकल्प और वैज्ञानिक सोच से बंजर जमीन को भी उपजाऊ बनाया जा सकता है. उन्होंने करीब पांच एकड़ बंजर भूमि को खेती योग्य बनाकर एक नयी मिसाल पेश की है. लगातार मेहनत और धैर्य के साथ उन्होंने इस जमीन की उर्वरता बढ़ायी, जिसका परिणाम आज हरियाली और भरपूर फसल के रूप में सामने है.