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hajipur news. वतन को पड़े जब जरूरत किसी की, तो ए बंधु पहले मेरा नाम आये

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hajipur news. वतन को पड़े जब जरूरत किसी की, तो ए बंधु पहले मेरा नाम आये

हाजीपुर

. साहित्यिक संस्था किरण मंडल (पुराना) के तत्वावधान में महाप्राण निराला जयंती सह कवि सम्मेलन हुआ. इसके पहले सत्र में निराला के व्यक्तित्व और कृतित्व पर परिचर्चा हुई. मुख्य अतिथि बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन के साहित्य मंत्री डॉ भगवती प्रसाद द्विवेदी ने कहा कि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला हिंदी छायावाद के प्रबल स्तंभ एवं लोकधर्मिता के महाप्राण थे. यह भी कहा कि निराला ने ही सबसे पहले छंद तोड़ने का दुस्साहस किया था. उनकी रचनाएं संवेदना और जन समस्याओं को उद्धृत करने वाली हैं. वे सदैव प्रयोगधर्मी रहे और उनकी कविताएं आज भी जनमानस को झकझोरती हैं.

शहर के बागमली स्थित बेटी विद्यायन के राष्ट्रकवि दिनकर सभागार में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ भगवती प्रसाद द्विवेदी ने की. संचालन डॉ आशुतोष सिंह ने किया. सर्वप्रथम निराला रचित वर दे वीणा वादिनी वर दे.. का सस्वर पाठ अखौरी चंद्रशेखर ने किया. संस्था के अध्यक्ष डॉ दामोदर प्रसाद सिंह एवं महासचिव डॉ महेंद्र प्रियदर्शी ने अतिथियों को अंग-वस्त्र, बुके और मोमेंटो देकर सम्मानित किया.

दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

दूसरे सत्र में कवि सम्मेलन हुआ, जिसमें कवियों ने गीत-गजलों की रसधार बहाकर श्रोताओं को मुग्ध किया. चर्चित कवि अविनाश बंधु ने अपनी रचना, मेरी शानो-शौकत तिरंगा ये प्यारा, वतन के लिए हर जतन काम आए, वतन को पड़े जब ज़रूरत किसी की, तो ए बंधु पहले मेरा नाम आए… सुनाकर सिलसिला शुरू किया. इसके बाद सुकंठ कवयित्री डॉ अर्चना त्रिपाठी ने शरद की धुंध छंटी, खिल उठी कलियां सखी, छा गयी धरा पीली वितान से…, डॉ आराधना प्रसाद ने सिर्फ उम्मीद पर टिकी मिट्टी, कुछ नये ख्वाब देखती मिट्टी, एक नयी जिंदगी की चाह में चाक पर घूमती रही मिट्टी…, सीताराम सिंह ने पकड़ नहीं पर गगन चूमता हूं, रंगों में डूबा नयन चूमता हूं, चर्म चक्षुओं से न देखा गया जो, उन्हीं फूलों का चमन ढूंढता हूं…, डॉ भगवती प्रसाद द्विवेदी ने इस शहर में गीत बंजर हो गया है, सांस खूंटी पर टंगी तन पंजर हो गया है …, डॉ रेणु शर्मा राध्या ने चलो आज लिखते हैं कोई ऐसा मंगल गीत, टूटे रिश्ते फिर जुड़ जाएं, दिखे चातुर्दिक प्रीत…, डॉ प्रतिभा पराशर ने वतन है हमारा तुम्हारा, इसे मत भूलाना वो यारा…, करणजीत सांवरिया ने उसे जब कलम मिली, जहां बदलने लगा, एक खामोश सा घर था ज़माना बदलने लगा…, डॉ अशोक कुमार सिंह ने रोशनी है लाती कायनात फकत जिसके नूर से… सुनाकर लोगों प्रभावित किया. साथ ही हरिविलास राय, शंभु शरण मिश्र आदि ने काव्यपाठ किया. डॉ महेंद्र प्रियदर्शी ने धन्यवाद ज्ञापित किया.

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