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hajipur news. ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन से तीन वर्षों में फाइलेरिया संक्रमण दर में आयी गिरावट

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hajipur news. ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन से तीन वर्षों में फाइलेरिया संक्रमण दर में आयी गिरावट

हाजीपुर

. जिले को 2027 तक फाइलेरिया मुक्त करने के लक्ष्य की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. इस वर्ष का सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) राउंड एक नयी उम्मीद के साथ शुरू हो रहा है. जिले के 14 ब्लॉक अब प्री-ट्रांसमिशन असेसमेंट सर्वे (प्री-टास) के दौर में पहुंच चुके हैं. विभाग द्वारा जारी हालिया डाटा के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में जिले के फाइलेरिया संक्रमण प्रसार दर में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है. जहां पहले यह दर कई क्षेत्रों में खतरनाक स्तर पर थी, वहीं अब यह घटकर कम हो गयी है.

इस सफलता के पीछे स्वास्थ्य विभाग की एक सुनियोजित रणनीति रही है. विभाग द्वारा ब्लॉक स्तर पर सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) को विशेष प्रशिक्षण दिया गया, ताकि वे प्रभावित मरीजों के बीच से लीड पेशेंट की पहचान कर सकें. इसके अलावा, विभाग ने एमडीए राउंड के दौरान ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (डीए) पर जोर दिया, जिसमें स्वास्थ्यकर्मी अपनी मौजूदगी में दवा खिलाते हैं. विभाग की इसी दूरदर्शी सोच और सीएचओ लीड-पेशेंट सपोर्ट प्रोवाइडर (पीएसपी) के जमीनी संघर्ष ने मिलकर जिले को प्री-टास की श्रेणी में लाकर खड़ा किया है.

केस 1 :

सदर प्रखंड की थाथन पंचायत के कुतुबपुर एचडब्ल्यूसी में नीतू कुमारी एएनएम के रूप में कार्यरत हैं. जनवरी 2024 में वह सीएचओ लीड पीएसपी से जुड़ी. हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर सीएचओ लीड पीएसपी और अन्य सामुदायिक समूहों के गठन के माध्यम से इन्होंने लोगों के बीच अपनी पैठ बनाई. रिंकी कुमारी ईमानदारी से स्वीकार करती हैं कि पहले उन्हें स्वयं फाइलेरिया की गहराई का अंदाजा नहीं था,लेकिन पीएसपी की बैठकों और प्रशिक्षण ने उन्हें समाज के प्रति अधिक संवेदनशील बनाया. आज उनके प्रयासों से करीब चार गांवों के समाज में फाइलेरिया से व्याप्त भ्रांतियां दूर हुई हैं, जिसके परिणामस्वरूप सेंटर पर मरीजों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है. उन्होंने न केवल फाइलेरिया प्रभावितों को एमएमडीपी किट देकर प्रशिक्षित किया, बल्कि उन्हें सामाजिक सुरक्षा दिलाने के लिए दिव्यांगता प्रमाणपत्र और पेंशन योजनाओं के आवेदन भी करवाया.

केस 2 :

रश्मि कुमारी थाथन बुजुर्ग आंगनबाड़ी केंद्र-301 पर सेविका है. इन्होंने फाइलेरिया उन्मूलन की दिशा में अद्वितीय समर्पण दिखाते हुए 242 ग्रामीणों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया. रश्मि ने यह मुख्य उपलब्धि टीकाकरण सत्रों और क्षेत्र भ्रमण के दौरान व्यक्तिगत संवाद के माध्यम से हासिल की. विशेष बात यह है कि उन्होंने यह सामाजिक जिम्मेदारी अपने घर की कठिन परिस्थितियों के बीच निभाई, जहां उनके ससुर रामप्रीत महतो, भरत महतो एवं उनके बड़े भाई सिकंदर महतो बीमारी के कारण उनकी देखभाल पर निर्भर हैं. इन पीएसपी सदस्यों के समर्पण और स्वास्थ्य विभाग की वैज्ञानिक कार्ययोजना ने यह साबित कर दिया है कि जब सरकारी तंत्र और जनभागीदारी एक साथ मिलते हैं, तो फाइलेरिया जैसी गंभीर बीमारी को भी घुटने टेकने पड़ते हैं. जिले का प्री-टास में प्रवेश करना इसी अटूट तालमेल का सुखद परिणाम है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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