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बज्जिका को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग

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बज्जिका को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग

लालगंज. लालगंज के नामीडीह में साहित्यिक सांस्कृतिक संस्था बज्जिका मंदाकिनी के तत्वावधान में विश्व बज्जिका महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया. इस अवसर पर बज्जिका पत्रिका ‘बज्जिका बेआर’ अंक-03 का लोकार्पण, सम्मान समारोह और विराट बज्जिका कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता स्थानीय साहित्यकार कपिलदेव सिंह ने की, जबकि संचालन राघवेंद्र प्रताप और संजय विजित्वर ने किया. समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में एलएन कॉलेज भगवानपुर के पूर्व प्राध्यापक डॉ रणवीर कुमार राजन तथा अति विशिष्ट अतिथि के रूप में बज्जिका साहित्य समाज सर्लाही, नेपाल के अध्यक्ष रामचंद्र महतो कुशवाहा उपस्थित थे. समारोह का उद्घाटन सुरेंद्र मानपुरी ने किया. पत्रिका का लोकार्पण बिहार विश्वविद्यालय के मानविकी संकायाध्यक्ष डॉ हरिनारायण पांडेय ने किया.

इस अवसर पर अखिल भारतीय धर्मसंघ के प्रांतीय अध्यक्ष रामाशंकर शास्त्री, अखिल भारतीय बज्जिका विकास संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष उमेश राय, बज्जिका की शीर्ष साहित्यकार डॉ विद्या चौधरी, डॉ उषा किरण, बज्जिकांचल विकास पार्टी के अध्यक्ष देवेंद्र राकेश, ज्ञान ज्योति गुरुकुलम के निदेशक अजीत कुमार आर्य, बज्जिका भाषा के वरिष्ठ साहित्यकार ज्वाला सांध्यपुष्प तथा डॉ. शशिभूषण कुमार सिंह उपस्थित थे.

बज्जिका की दुर्दशा के लिए जनप्रतिनिधियों को ठहराया जिम्मेदार

समारोह के प्रायोजक और बज्जिका मंदाकिनी के संयोजक मणिभूषण प्रसाद सिंह ‘अकेला’ ने स्वागत भाषण में राज्य और केंद्र सरकार से बज्जिका भाषा के लिए अकादमी गठन, जनगणना कोड निर्धारण तथा बज्जिका को संविधान की अष्टम अनुसूची में शामिल करने की मांग रखी, जिसका उपस्थित जनसमूह ने गर्मजोशी से समर्थन किया. कार्यक्रम का शुभारंभ सामूहिक राष्ट्रगान से हुआ. इसके बाद बज्जिका के दो दिवंगत साहित्यकार स्व. रामानंद सिंह और स्व. रणधीर सिंह के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई.

मुख्य अतिथि डॉ. रणवीर कुमार राजन ने बज्जिका भाषा को बिहार में अधिसंख्य लोगों द्वारा बोली जाने वाली समृद्ध और सशक्त भाषा बताते हुए इसे शीघ्र अष्टम अनुसूची में शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया. अखिल भारतीय बज्जिका विकास संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष उमेश राय और देवेंद्र राकेश ने बज्जिका भाषा की दुर्दशा के लिए जनप्रतिनिधियों को जिम्मेदार ठहराया और इसके मान-सम्मान के लिए जन जागरण की जरूरत बताई.

मौके पर पूनम सिन्हा श्रेयसी, प्रीति सुमन, रजनी प्रभा, वीरेंद्र नाथ मिश्र ‘विभवासु’, नेपाल के मनमोहन सिंह ‘मनोहर’, रुवेश राउत, संजय महतो राज, ममता मृदुल, मुकेश कुमार मिश्र सहित सैकड़ों लोग उपस्थित थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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