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Hajipur News : बुद्ध का अस्थिकलश स्थापित, सीएम ने किया नमन

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Hajipur News : बुद्ध का अस्थिकलश स्थापित, सीएम ने किया नमन

वैशाली. वैशाली गढ़ स्थित अभिषेक पुष्करणी के समीप निर्मित भव्य बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय का उद्घाटन मंगलवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया. मुख्यमंत्री दोपहर करीब 3.35 बजे वैशाली पहुंचे, जहां बौद्ध परंपरा के अनुसार उनका स्वागत किया गया. इसके बाद करीब 3.45 बजे उन्होंने संग्रहालय का विधिवत उद्घाटन किया. उद्घाटन समारोह के दौरान बौद्धिक मंत्रोच्चारण से संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक और पवित्र बन गया. मुख्यमंत्री ने संग्रहालय परिसर स्थित स्मृति स्तूप के प्रथम तल पर भगवान बुद्ध के पवित्र अस्थि अवशेष के अधिष्ठापन समारोह में भाग लिया. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पूरे श्रद्धा भाव से पूजा समारोह में भाग लेते हुए भगवान बुद्ध को नमन किया. भगवान बुद्ध के अस्थिकलश को अब इस संग्रहालय में सम्मानपूर्वक स्थापित किया गया है. संग्रहालय में बुद्ध के जीवन, उनके उपदेशों, ध्यान, और महापरिनिर्वाण की घटनाओं को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है. यह संग्रहालय बिहार को अंतरराष्ट्रीय बौद्ध पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा. यह संग्रहालय बौद्ध सर्किट का एक अहम हिस्सा बनेगा और बिहार की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचायेगा. उद्घाटन समारोह के बाद मुख्यमंत्री शाम 4:20 बजे स्मृति स्तूप से निकलकर गेस्ट हाउस पहुंचे और निरीक्षण के बाद 4:30 बजे सड़क मार्ग से पटना के लिए रवाना हो गये.

2019 में हुआ था स्तूप का शिलान्यास

: वैशाली ऐतिहासिक और पौराणिक भूमि है, जिसने दुनिया को पहला गणतंत्र दिया. यह नारी सशक्तीकरण की भी भूमि रही है. बौद्ध धर्मावलंबियों के संघ में पहली बार यहां महिलाओं को शामिल किया गया. बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय एवं स्मृति स्तूप बिहार की सांस्कृतिक धरोहर और वैश्विक बौद्ध विरासत का भव्य प्रतीक है. सौर ऊर्जा संयंत्र के साथ-साथ इस परिसर में बेहतर पार्किंग की व्यवस्था की गयी है. इस स्तूप का वर्ष 2019 में शिलान्यास किया गया था.

राजगीर के बाद वैशाली पहुंचे थे भगवान बुद्ध

भगवान बुद्ध जगह-जगह घूमा करते थे. इस दौरान वे राजगीर के वेणुवन में रहे और फिर यहां से बोधगया चले गये थे, जहां उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई. भगवान बुद्ध ज्ञान प्राप्ति के बाद उत्तर प्रदेश के सारनाथ चले गये जहां उन्होंने पहला उपदेश दिया. उसके बाद वे पुनः राजगीर आये और गृद्धकूट पर्वत पर उपदेश देने लगे. इसके बाद भगवान बुद्ध के वैशाली में ठहरे और फिर केसरिया (पूर्वी चम्पारण), लौरिया नन्दन गढ़ (पश्चिमी चंपारण) होते हुए कुशीनगर (उत्तर प्रदेश) पहुंचे थे. अंत में ये बहुत बीमार हो गये थे और उत्तर प्रदेश के कुशीनगर पहुंचे, जहां उनका निधन हो गया.

बुद्ध से जुड़े सभी स्थलों का हुआ विकास : राज्य सरकार ने राज्य में भगवान बुद्ध से जुड़े सभी स्थलों का विकास कराया है. राजगीर के वेणुवन के क्षेत्र को बढ़ाया गया है और इसका सौंदर्गीकरण कराया गया है. गृद्धकूट पर्वत पर आने-जाने के लिए रास्ते को ठीक कराया गया है. घोड़ा कटोरा में भगवान बुद्ध की 50 फुट ऊंची प्रतिमा लगायी गयी है. वर्ष 2010 में पटना में बुद्ध स्मृति पार्क एवं बुद्ध स्तूप का निर्माण कराया गया है. अब वैशाली में बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय सह स्मृति स्तूप का उद्घाटन किया गया है. बौद्ध पर्यटक स्थलों को एक सर्किट में जोड़ा गया है. बोधगया आने वाले पर्यटक राजगीर, राजगीर से पटना, पटना से वैशाली तथा वैशाली से केसरिया स्तूप, लौरिया नंदन गढ़ होते हुए पश्चिमी चंपारण जिले में गंडक नदी पर निर्मित (गौतम बुद्ध) सेतु से कुशीनगर जा सकते हैं.

ये रहे मौजूद

कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, ऊर्जा सह योजना एवं विकास मंत्री सह वैशाली के प्रभारी मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, जल संसाधन सह संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी, भवन निर्माण मंत्री जयंत राज, कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के मंत्री मोतीलाल प्रसाद, विधायक सिद्धार्थ पटेल, जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा, बिहार संग्रहालय के महानिदेशक अंजनी कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव अमृत लाल मीणा, विकास आयुक्त प्रत्यय अमृत, पुलिस महानिदेशक विनय कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव सह भवन निर्माण विभाग के सचिव कुमार रवि, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी गोपाल सिंह सहित अन्य अधिकारी और गणमान्य मौजूद रहे.

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