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Home बिहार हाजीपुर केले की खेती में वरदान बनी यह नई तकनीक, सही मात्रा में खाद-पानी मिलने से बंपर मुनाफे में किसान!

केले की खेती में वरदान बनी यह नई तकनीक, सही मात्रा में खाद-पानी मिलने से बंपर मुनाफे में किसान!

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केले की खेती में वरदान बनी यह नई तकनीक, सही मात्रा में खाद-पानी मिलने से बंपर मुनाफे में किसान!
सांकेतिक तस्वीर

Banana Farming News: बदलते कृषि परिदृश्य में अब किसान पारंपरिक खेती छोड़ आधुनिक तकनीकों को अपनाकर बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफा कमा रहे हैं. केले की खेती में ड्रिप सिंचाई (टपक सिंचाई) और फर्टिगेशन तकनीक किसानों के लिए काफी लाभदायक साबित हो रही है. इस तकनीक के माध्यम से पौधों को उनकी जरूरत के अनुसार पानी और घुलनशील खाद सीधे जड़ों तक पहुंचाई जाती है, जिससे पानी और उर्वरक दोनों की बचत होती है.

किसानों को दी जाती है नई-नई तकनीकों की जानकारी

कृषि विशेषज्ञ समय-समय पर किसानों को केले की उन्नत खेती, पौधरोपण, पौधों की दूरी, रोग एवं कीट नियंत्रण, उर्वरक प्रबंधन और आधुनिक सिंचाई प्रणाली की जानकारी देते हैं. प्रशिक्षण के दौरान किसानों को यह भी बताया जाता है कि नई तकनीक अपनाकर कम लागत में अधिक उत्पादन कैसे प्राप्त किया जा सकता है.

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सांकेतिक तस्वीर

ड्रिप सिंचाई से पौधों को मिलती है जरूरत के अनुसार पानी

ड्रिप सिंचाई प्रणाली के जरिए प्रत्येक पौधे की जड़ों तक निर्धारित मात्रा में पानी पहुंचाया जाता है. इससे पानी की बर्बादी नहीं होती और खेत में नमी भी लंबे समय तक बनी रहती है. कम पानी वाले क्षेत्रों में यह तकनीक किसानों के लिए काफी उपयोगी साबित हो रही है.

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सांकेतिक तस्वीर

फर्टिगेशन तकनीक से सीधे जड़ों तक पहुंचती है खाद

ड्रिप सिस्टम के माध्यम से घुलनशील उर्वरकों को पानी के साथ पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है. इस प्रक्रिया को फर्टिगेशन कहा जाता है. इससे खाद का पूरा लाभ पौधों को मिलता है और उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होती है.

रोग नियंत्रण और उत्पादन पर विशेष ध्यान

विशेषज्ञ किसानों को पौधों में लगने वाले प्रमुख रोगों और कीटों की पहचान तथा समय पर नियंत्रण के उपाय भी बताते हैं. साथ ही पौधों की नियमित निगरानी, पत्तियों की सफाई और खेत की स्वच्छता बनाए रखने की सलाह दी जाती है, जिससे फसल स्वस्थ रहती है.

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सांकेतिक तस्वीर

किसानों की बढ़ रही आमदनी

आधुनिक तकनीक अपनाने वाले किसानों का कहना है कि ड्रिप सिंचाई और फर्टिगेशन से सिंचाई एवं खाद पर होने वाला खर्च कम हुआ है. साथ ही केले की गुणवत्ता और उत्पादन में भी बढ़ोतरी हुई है, जिससे उनकी आय पहले की तुलना में बेहतर हुई है. कृषि विभाग भी किसानों को आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रहा है.

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विवेक रंजन पाण्डेय पिछले 7 वर्षों से टीवी और डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत नेटवर्क 10 नेशनल न्यूज चैनल से की, जहां समाचार लेखन, फील्ड रिपोर्टिंग, ग्राउंड रिपोर्टिंग और समसामयिक घटनाओं के विश्लेषण का व्यापक अनुभव प्राप्त किया. जमीनी स्तर पर की गई उनकी रिपोर्टिंग ने उन्हें जनसरोकार से जुड़े मुद्दों को गहराई से समझने का अवसर दिया. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम में कार्यरत हैं. यहां वे बिहार की राजनीति, प्रशासन, शिक्षा, अपराध, चुनाव और जनहित से जुड़े विषयों पर तथ्यपरक, विश्वसनीय और प्रभावशाली खबरें पाठकों तक पहुंचा रहे हैं. देश और बिहार की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके साथ ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर भी उनकी पैनी नजर रहती है. जटिल विषयों को सरल, सटीक और सहज भाषा में प्रस्तुत करना उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषता है. डिजिटल मीडिया के बदलते ट्रेंड्स, SEO, डेटा आधारित पत्रकारिता और आधुनिक स्टोरीटेलिंग तकनीकों के साथ काम करना उन्हें पसंद है. वे हमेशा ऐसे कंटेंट तैयार करने का प्रयास करते हैं, जो पाठकों के लिए उपयोगी, विश्वसनीय और तथ्य आधारित हो. पत्रकारिता में उनका उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को जिम्मेदारी और निष्पक्षता के साथ सामने लाना, पाठकों तक तेज, सटीक और भरोसेमंद जानकारी पहुंचाना तथा जनहित की आवाज को मजबूती से उठाना है.
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