gopalganj news : गोपालगंज. शहर को कैसे स्मार्ट सिटी बनाया जाये? शहर के विकास की जिम्मेदारी जिनके हाथों में थी वही राहु-केतु बनकर सरकार के विकास को डकार रहे. यह हम नहीं कह रहे, महालेखागार की ऑडिट रिपोर्ट कह रही है. ऑडिट रिपोर्ट पर जहां आपकी नजर जायेगी, वहीं फ्रॉड, घोटाला, धांधली दिखेगी.
आज आपको बताते हैं कि शहर को विकसित व स्मार्ट सिटी के रूप में परिवर्तित करने में सहायक होने वाले 14वें वित्त आयोग के अनुदान की 12.58 करोड़ की राशि भी इनके करप्शन की भेंट चढ़कर रह गयी. ऑडिट के दौरान पाया गया कि शहर के विकास के बदले 16 लाख 60673 रुपये में स्कॉर्पियो खरीद ली गयी. जबकि कानूनी शुल्क, विज्ञापन शुल्क, कार्यालय कर्मचारी का वेतन, कार्यालय जेनेरेटर, गोदाम का किराया, वार्ड पार्षदों के भत्ते में एक करोड़ खर्च कर दिया गया. पाया गया कि 1.22 करोड़ की राशि की हेराफेरी कर विचलन किया गया. नियम के आलोक में 14वें वित्त आयोग की अनुशंसा पर प्राप्त राशि 12.58 करोड़ के विरुद्ध कितनी राशि का उपयोगिता प्रमाणपत्र विभाग को भेजा गया इसका कोई साक्ष्य नगर परिषद द्वारा ऑडिट में उपलब्ध नहीं कराया गया. ऑडिट टीम के सवालों पर नगर परिषद के जिम्मेदारों ने गोल-गोल घुमाने की भरपूर कोशिश भी की.