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मिथिलेश तिवारी: कोचिंग शिक्षक से मंत्री तक का सफर

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मिथिलेश तिवारी: कोचिंग शिक्षक से मंत्री तक का सफर
मिथिलेश तिवारी का फाइल फोटो

Gopalganj News: (पवन अग्रवाल की रिपोर्ट) बैकुंठपुर के विधायक मिथिलेश तिवारी को मंत्री बनाए जाने पर क्षेत्र में खुशी की लहर है. 41 वर्षों के बाद बैकुंठपुर को मंत्री पद मिला है। बिहार सरकार में पहली बार मंत्री बने मिथिलेश तिवारी ने अपने दम पर अपनी पहचान बनाई है. उनका कोई राजनीतिक बैकग्राउंड नहीं रहा है.

मिथिलेश तिवारी का राजनीतिक सफर

1988 में वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े और 1990 में भारतीय जनता पार्टी से सक्रिय राजनीति में आए. उसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. उन्होंने लगातार पार्टी में कई जिम्मेदारियों को निभाया है.1996 में भाजपा क्रीड़ा मंच के प्रदेश मंत्री, 1998 में प्रदेश उपाध्यक्ष, और 2000 में भाजपा क्रीड़ा मंच के प्रदेश उपाध्यक्ष बने. इसके बाद उन्होंने पार्टी में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया, जैसे कि प्रदेश महामंत्री, प्रदेश उपाध्यक्ष, राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य, और बिहार, बंगाल, उड़ीसा तथा झारखंड के प्रभारी भी बने. राजद के शासन में पहलीबार भाजपा ने मिथिलेश तिवारी को कटेया से 2005 के फरवरी में उम्मीदवार बनाया. बसपा के उम्मीदवार रहे अमरेंद्र कुमार पांडेय उर्फ पप्पू पांडेय से उनका मुकाबला रहा. चुनाव हारना पड़ा. उसके बाद 2015 में जदयू व भाजपा जब अलग चुनाव मैदान में आये तो बैकुंठपुर से भाजपा ने भरोसा जताते हुए मिथिलेश तिवारी को चुनाव मैदान में उतारा. तब जदयू व राजद को पीछे छोड़कर चुनाव जीते. 2020 के चुनाव में एनडीए ने बैकुंठपुर से चुनाव मैदान में उतारा. तब एनडीए से बगावत कर मंजीत सिंह निर्दलीय चुनाव लड़े. तब मिथिलेश तिवारी को हरा कर यहां से राजद ने बाजी मारी. प्रेम शंकर यादव विधायक बने. वर्ष 2025 में हुए चुनाव में मिथिलेश तिवारी ने राजद को हरा कर परचम लहराया था. मिथिलेश तिवारी के जीतने के बाद से ही तय था कि मंत्री बनेंगे. लेकिन तब नीतीश कुमार के कैबिनेट में मिथिलेश तिवारी को जगह नहीं मिली.

अपने दम पर बनाई पहचान, नहीं है कोई राजनीतिक बैकग्राउंड

बिहार सरकार में पहली बार मंत्री बने मिथिलेश तिवारी ने अपने दम पर अपनी पहचान बनाई है. उनका कोई राजनीतिक बैकग्राउंड नहीं रहा है. अपनी व्यवहार कुशलता, वाकपटुता और प्रखर वक्ता की छवि के कारण उन्होंने पार्टी में अपनी पकड़ बनाई और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का विश्वास जीत लिया. समय के साथ पार्टी में उनके समर्पण और कड़ी मेहनत के लिए उन्हें जाना और पहचाना जाने लगा, जिसका परिणाम आज मंत्री पद के रूप में सामने आया.

सनातन धर्म व क्षेत्र के विकास के लिए भी समर्पित

बिहार सरकार में पहली बार मंत्री बने मिथिलेश तिवारी न केवल क्षेत्र के बहुमुखी विकास के लिए समर्पित रहे हैं, बल्कि सनातन धर्म के उत्थान के प्रति भी जागरूक रहे हैं. अपने कार्यकाल में उन्होंने थावे महोत्सव, नारायणी महोत्सव, सिंहासनी महोत्सव को ना सिर्फ सरकार से अनुमति लिया बल्कि भव्य तरीके से आयोजित कराया, वहीं थावे महोत्सव की शुरुआत कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इसके अलावा वे प्रतिवर्ष विंध्याचल माता के दर्शन और काशी विश्वनाथ बाबा के दर्शन के लिए भी जाते रहे हैं.

मिथलेश तिवारी के मंत्री बनते ही समर्थकों में खुशी की लहर

बैकुंठपुर के विधायक मिथिलेश तिवारी के मंत्री बनते ही क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई. कार्यकर्ताओं ने एक दूसरे को गुलाल लगाकर मिठाइयां खिलाकर बधाई दी. जमकर पटाखे फोड़े गए. प्रखंड के शेर निवासी भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता राहुल आनंद ने कहा कि मिथलेश तिवारी को मंत्री बनाए जाने से बैकुंठपुर सहित पूरे बिहार का चौमुखी विकास होगा. भाजपा कार्यकर्ता पवन गुप्ता, मोहन साह,प्रदीप पांडेय,दिनेश पांडेय,संजय सिंह सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाया.

41 वर्षों बाद बैकुंठपुर को मिला मंत्री

बैकुंठपुर विधानसभा को 41 वर्षों बाद मंत्री पद मिला है. इससे पहले यहां से विधायक रहे ब्रजकिशोर नारायण सिंह उर्फ बाबू साहेब 1982 से 1985 तक बिहार सरकार में मंत्री रहे थे. तब बाबू साहब से उनको जाना जाता था. उनके ही पुत्र मंजीत सिंह बरौली से विधायक है. बैकुंठपुर में आज भी बाबू साहब को लोग सम्मान से नाम लेते है.

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मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर पलायन कर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट ( माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय). नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है. नोएडा में टीवी न्यूज में काम करने के बाद हिंदुस्तान ग्रूप होते हुए बिहार, झारखंड की सबसे पसंदीदा अखबार प्रभात खबर में कार्यरत. हां एक बात और... पढ़ने-लिखने की जिज्ञासा कभी खत्म नहीं होगी. साहित्य में बेहद दिलचस्पी.
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